अपराजिता शर्मा
एक 'इंडेक्स' शेयरों का समूह है, जिसमें बाजार पूंजीकरण या क्षेत्र विशेष (आइटी, दवा, बैंकिंग) जैसे कारकों के आधार पर कंपनियों को रखा जाता है. 'इंडेक्स फंड' एक म्यूचुअल फंड है, जो किसी इंडेक्स में सूचीबद्ध शेयरों में निवेश करता है. निवेश का अनुपात भी इंडेक्स में शेयरों की हिस्सेदारी के समान अनुपात में होता है. एक आदर्श स्थिति में यह फंड पूरी तरह से सूचकांक के समान रिटर्न (लाभ) देते हैं. ये फंड अक्सर निष्क्रिय फंडों के रूप में जाने जाते हैं, क्योंकि उन्हें फंड मैनेजरों के सक्रिय प्रबंधन की आवश्यकता नहीं है.
सक्रिय फंडों में प्रबंधकों का लक्ष्य श्रेणी बेंचमार्क की तुलना में अधिक रिटर्न उत्पन्न करना होता है. हालांकि बाजार नियामक सेबी द्वारा 2018 में म्यूचुअल फंड योजनाओं के पुन: वर्गीकरण के साथ म्यूचुअल फंड पर किसी संपत्ति में निवेश के लिए फंड आवंटन की सीमा तय की गई है, जिसका मतलब है कि जोखिम भरे शेयरों के माध्यम से उच्च लाभ पैदा करना सक्रिय फंड मैनेजरों के लिए और भी कठिन हो गया है.
यदि कोई सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली म्यूचुअल फंड स्कीम का पता लगाए, तो वह देखेगा कि पिछले कुछ वर्षों में सक्रिय फंडों की तुलना में निष्क्रिय रूप से प्रबंधित कम लागत वाले इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड ने बेहतर प्रदर्शन किया है. हालंकि रिटर्न निवेश का एकमात्र मानदंड नहीं होना चाहिए, लेकिन ऐसी कई आकर्षक वजहें हैं, कि एक रूढि़वादी निवेशक के लिए इंडेक्स फंड एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
मॉर्निंगस्टार इंडेक्सेस में प्रोडक्ट मैनेजर हरिश तोश्नीवाल कहते हैं, ''इंडेक्स फंड को नियमों के आधार पर पारदर्शी तरीके से प्रबंधित किया जाता है, जो पोर्टफोलियो के लिए शेयरों का चयन करने में सभी संभावित पूर्वाग्रहों को दूर करता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निष्क्रिय रूप से प्रबंधित इंडेक्स फंड सक्रिय रूप से प्रबंधित रणनीतियों की तुलना में सस्ता हो जाता है.''
मुझे किस फंड में निवेश करना चाहिए?
मॉर्निंगस्टार के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 34 इंडेक्स फंड उपलब्ध हैं, जो निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों के साथ-साथ निफ्टी 50, बीएसई सेंसेक्स और मल्टीकैप निफ्टी 500 जैसे व्यापक सूचकांकों पर नजर रखते हैं. लंबे समय के दौरान, इस तरह के सूचकांकों में कई बदलाव किए जाते हैं, क्योंकि गैर-निष्पादित शेयरों को बदल दिया जाता है. लंबे समय में, सूचकांक अपने वर्ग के सर्वश्रेष्ठ शेयरों का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसलिए उन्हें अच्छे रिटर्न की उम्मीद होती है.
यदि आप इंडेक्स फंड में निवेश करने का फैसला करते हैं, तो जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर निवेश करना चाहिए: ''कम जोखिम के साथ लार्ज कैप में निवेश रणनीति बनाएं, जबकि उतार-चढ़ाव को झेल सकने वाले निवेशकों को मिडकैप या सेक्टोरल इंडेक्स फंड में निवेश करना चाहिए, जहां वे उच्च-जोखिम के साथ अच्छे रिटर्न पा सकते हैं.'' यह कहना है मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमैंट के निक्रिय फंड व्यवसाय प्रमुख प्रतीक ओसवाल का.
इंडेक्स फंड बनाम ईटीएफ
ईटीएफ और इंडेक्स फंड, दोनों पहले से मौजूद इंडेक्स पर नजर रखते हैं. हालांकि इंडेक्स फंड के विपरीत, ईटीएफ का कारोबार शेयर बाजार में किया जाता है और डीमैट खातों की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, कोई भी ईटीएफ में स्वचालित व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) स्थापित नहीं कर सकता. ओसवाल बताते हैं, ''मौजूदा हालात में भारतीय निवेशकों के लिए ईटीएफ खरीदना कष्टकर है, क्योंकि उन्हें ईटीएफ खरीदने के लिए एक्सचेंज, शेयर बाजार और बिचौलियों के माध्यम से जाने की जरूरत होती है.''
दूसरी तरफ इंडेक्स फंड बेहद सीधे और सरल होते हैं. वे बताते हैं, ''इसमें कोई बिचौलिया नहीं होता. डीमैट खातों की जरूरत नहीं होती, तुरंत एसआईपी की जा सकती है और खुदरा निवेशक ईटीएफ की तुलना में उन्हें कम लागत में खरीद सकते हैं.''
निवेश से कब परहेज करें
जब शेयरों की कीमत ऊंची होती है, उस दौरान इंडेक्स फंड की तुलना में एक्टिव फंड बेहतर प्रदर्शन करते हैं, क्योंकि प्रबंधक जिन शेयरों को कम मूल्य का मानते हैं, उन्हें लेने में उनके पास लचीलापन होता है. इंडेक्स फंड में इस तरह का लचीलापन नहीं होता है. अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक अरविंद राव कहते हैं, ''इंडेक्स शेयरों की एक टोकरी है, टोकरी का लाभ इसके घटकों से अधिक नहीं हो सकता.'' इसी तरह जब शेयरों के बाजार में तेजी आती है, तो इंडेक्स फंड डायवर्सिफाइड फंड की तुलना में कम रिटर्न देते हैं.
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