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सूचकांक-धुएं में छूमंतर

सेहत पर ई-सिगरेट के दुष्प्रभावों पर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है. इसको अक्सर धूम्रपान की लत छुड़ाने के उपाय के तौर पर बेचा जाता है, पर कोई सबूत नहीं कि ऐसा होता है.

इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती
इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती
अपडेटेड 2 अक्टूबर , 2019

इंडिया टुडे

सितंबर की शुरुआत में भारत ई-सिगरेट पर रोक लगाकर ब्राजील और थाइलैंड की बिरादरी में आ गया. सरकार ने आगाह किया कि वैपिंग यानी इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का बढ़ता चलन देश में तंबाकू इस्तेमाल घटाने की उसकी कोशिशों को 'गंभीरता से खोखला कर सकता है और पटरी से उतार' सकता है.

सेहत पर ई-सिगरेट के दुष्प्रभावों पर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है. इसको अक्सर धूम्रपान की लत छुड़ाने के उपाय के तौर पर बेचा जाता है, पर कोई सबूत नहीं कि ऐसा होता है. भारतीय वैपिंग उद्योग की एक संस्था हालांकि यही कहती है कि ई-सिगरेट बनिस्बतन सुरक्षित हैं और इस पाबंदी से सरकार और सिगरेट बनाने वाली आइटीसी जैसी बाजार की अग्रणी कंपनियों को फायदा होगा.

5.7 करोड़ डॉलर

का था भारत में ई-सिगरेट का बाजार 2018 में, यह कहना है रिसर्च फर्म यूरोमॉनीटर इंटरनेशनल का. रोक से पहले 2022 तक 60प्रतिशत की सालाना वृद्धि का अनुमान लगाया

गया था

119 प्रतिशत

वृद्धि हुई ईएनडीएस के भारतीय आयात में वित्तीय साल 17 से वित्तीय साल 19 में. सरकार का कहना है कि बाजार में 460 से ज्यादा ई-सिगरेट ब्रांड और 7,700 फ्लेवर मौजूद हैं

रू 1 लाख रुपए

जुर्माना है कानून के तहत पहली बार अपराध करने वालों पर और साथ में 1 साल की जेल, इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) की बिक्री पर; दोबारा उल्लंघन पर 3 साल की जेल और 5 लाख रुपए जुर्माना

28.6 प्रतिशत

वयस्क, 15 या उससे ऊपर के, यानी 26.68 करोड़ लोग, भारत में तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं, कहना है स्वास्थ्य मंत्रालय के 2018 में जारी एक सर्वेक्षण का; 42.4 प्रतिशत आदमी और 14.2 प्रतिशत औरतें

9.5 प्रतिशत

मौतें भारत में होने वाली कुल मौतों में से तंबाकू की वजह से होती हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक—48 प्रतिशत दिल की बीमारियों (सीवीडी) से, 10 प्रतिशत कैंसर से

4,49,844

सीवीडी मौतें तंबाकू के इस्तेमाल से हुईं 2018 में, यह कहना है डब्ल्यूएचओ का; भारत में हर साल कुल सीवीडी मौतों का 16प्रतिशत

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