अब तक क्या किया गया
भारत को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया गया है, पर आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि यह एक कठिन चुनौती होगी. विकास दर में गिरावट आई है और चीन ने भारत से सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का तमगा छीन लिया है
वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में पूरे वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे ने बजट अनुमान के 52 फीसद को छू लिया. उद्देश्य घाटे के लक्ष्य को जीडीपी के 3.4 फीसद तक सीमित करना है, पर बढ़ते व्यय और घटते राजस्व के साथ ज्यादा खर्च करने के दबाव का अर्थ यह है कि भारत इस मोर्चे पर फिसल रहा है
महंगाई के मोर्चे पर, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआइ) लक्षित चार फीसद की तुलना में एक फीसदकम रहा है. अप्रैल-मई में 3 फीसद से बढ़कर सीपीआइ जून में 5 फीसदी हो गया
2019 के अप्रैल-जून की तिमाही में, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आइआइपी) 3.6 फीसद की दर से बढ़ा, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में यह 5.1 फीसद की दर से बढ़ा था. मैन्युफैक्चरिंग और खनन में गिरावट से कारखानों के उत्पादन घटा
कमजोर आर्थिक आंकड़ों और नकारात्मक बाजार धारणा के कारण रुपया 30 जुलाई को 68.75 से फिसलकर 5 जुलाई को 71.9 प्रति डॉलर पर पहुंच गया
धीमी अर्थव्यवस्था के अलावा, बजट में बढ़े हुए टैक्स सरचार्ज की घोषणा से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) में नकारात्मक संकेत गया और इस कारण भी रुपया फिसला. बाद में सरकार ने उसे हटा लिया
'टैक्स टेररिज्म' को खत्म करने का आश्वासन दिया गया है. 1 अक्तूबर से आयकर की नोटिस सम्मन केंद्रीयकृत कंप्यूटर प्रणाली के जरिए जारी होंगे
स्टार्ट-अप पर लगाया गया 'ऐंजल टैक्स' हटा लिया गया है
क्या यह पर्याप्त है?
अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसके सभी हितधारकों का भरोसा कम होना है. सरकार को पॉलिसी प्रीडिक्टेबिलिटी के जरिए विश्वास बहाल करना होगा, नकदी में सुधार के लिए अधिक अल्पकालिक उपायों और न्यूनतम सरकार के वादे पर तेजी से अमल की जरूरत है. मजबूत इरादे के साथ विनिवेश एजेंडे को भी आगे बढ़ाना होगा
और क्या करने की जरूरत है
वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में वृद्धि 25 तिमाहियों में सबसे कम 5 फीसद रही. बुनियादी ढांचा पर खर्च करके सरकारी व्यय बढ़ाना होगा ताकि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले
जून में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि घटकर चार महीने के सबसे निचले स्तर 2 फीसद पर आ गई. मंदी को रोकने के लिए जरूरी उपाय करने चाहिए
खाद्य महंगाई दर में वृद्धि, रुपए का फिसलना अन्य प्रमुख चिंताएं हैं
रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्र जैसे कपड़ा और मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत सहारा देना होगा
कारोबार करने की सुगमता में सुधार
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