जब महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार 18 जून को अपना पांचवां बजट पेश करने के लिए खड़े हुए तो सरकार उत्साहित थी. राज्य में राजनैतिक स्थिति सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पक्ष में दिखती है. अगर लोकसभा चुनाव परिणामों को संकेत माना जाए, तो गठबंधन 288 विधानसभा क्षेत्रों में से 232 (भाजपा 128, शिवसेना 104) में बढ़त की स्थिति में दिखता है (साधारण बहुमत के लिए मात्र 145 सीटें चाहिए).

2019-20 के लिए सरकार के इस अंतिम बजट में कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा. 20,292 करोड़ रु. के राजस्व घाटे के साथ बजट में किसानों, विधवाओं, व्यापारियों, बेरोजगार युवाओं, दिव्यांगों और भाजपा के प्रमुख राष्ट्रवादी मतदाताओं समेत सभी का ध्यान रखा गया है.
जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया है और कृत्रिम बादलों के जरिए बारिश बढ़ाने की मद में 6,410 करोड़ रु. आवंटित किए गए हैं. (राज्य लगातार चौथे वर्ष सूखे का सामना कर रहा है). पाइपलाइनों के जरिये सिंचाई के लिए 12,597 करोड़ रु. और नए कृषि कॉलेजों और कृषि अनुसंधान संस्थानों को स्थापित करने के लिए 600 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है.
राज्य में पिछले तीन महीनों में 600 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है जिसे देखते हुए कृषक समुदाय के लिए बीमा योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है. पहले केवल किसान ही बीमा लाभ पाने का हकदार थे, अब पूरे परिवार को योजना के दायरे में लाया गया है.
अन्य बड़ी योजनाएं निम्न मध्यम वर्गों को लक्षित करती हैं. इनमें राज्य की 30.2 लाख बेरोजगार विधवाओं (1,000 रु. प्रति माह) के लिए सहायता राशि में वृद्धि; दिव्यांगजनों (शारीरिक रूप से असमर्थ) के लिए घरों के निर्माण के लिए 7,197 करोड़ रुपए; और महिलाओं तथा एससी/ एसटी वर्ग के उद्यमियों को वरीयता के साथ 10,000 छोटे उद्योग शुरू करने का कार्यक्रम शामिल है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस भी धनगर समुदाय को शांत करने में लगे हुए हैं, जो अनुसूचित जनजाति वर्ग (उनके शासनकाल के शुरुआती वादों में से एक) में शामिल किए जाने के लिए आंदोलन कर रहा है. फडऩवीस को उम्मीद है कि बजट में समुदाय की खातिर 23 कल्याणकारी योजनाओं के लिए 1,000 करोड़ रुपए का प्रावधान करने से उनकी नाराजगी कुछ कम हो जाएगी. धनगर वोट कम से कम 16 विधानसभा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं.
हिंदुत्व से जुड़े वोटरों को ध्यान में रखते हुए सरकार एक स्मारक का निर्माण भी करने का प्रस्ताव रखती है. इसलिए दिल्ली में नए महाराष्ट्र सदन में बाल गंगाधर तिलक की एक प्रतिमा लगाई जा रही है, तो मुंबई में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्मारक बनेगा. सरकार 25 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानों पर आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए स्मारक का निर्माण भी कर रही है जहां वे समुदाय चुनावों का रुख तय करते हैं.
बहरहाल, विपक्ष की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने राजस्व घाटे की आलोचना की और इसे सरकार की खराब योजना बताया. उन्होंने तर्क दिया कि यही भाजपा सिंचाई परियोजनाओं को संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति देने के कारण कांग्रेस-एनसीपी को घोटालेबाज कहा करती थी. चव्हाण पूछते हैं, ''उन्होंने 260 सिंचाई परियोजनाओं को वैसी ही मंजूरी दी है. क्या अब हमें उन्हें भ्रष्ट बता सकते हैं?''
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