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डार्क मोड

मेक इन इंडियाः अंधेरा भेदती नजरें

जीत की वजह सेना और सरकार के लिए इलेक्ट्रो ऑप्टिक्स की अग्रणी आपूर्तिकर्ता. रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सिलिकॉन वैली के सबसे बड़े निवेशों में से एक

हेमंत मिश्र
हेमंत मिश्र

प्रतिरक्षा और विमानन की टोन्बो इमेजिंग कंपनी के मालिक 42 वर्षीय अरविंद लक्ष्मीकुमार हैं.

टोन्बो इमेजिंग एडवांस इमेजिंग के साथ जटिल वातावरण को भी भांप और समझकर उसे नियंत्रित करने वाले सेंसर सिस्टम बनाने वाली ओईएम (मौलिक उपकरण निर्माता) है. बिट्स पिलानी के पूर्व छात्र अरविंद लक्ष्मीकुमार ने 2008 में इसकी नींव रखी थी.

यह एडवांस्ड इमेजिंग सिस्टम, नाइट विजन डिवाइस और थर्मल इमेजर्स बनाती है. टोन्बो साइट्स को ड्रोन, वाहनों और गन्स पर लगाया जा सकता है जो सैनिकों को अंधेरे या शून्य-दृश्यता वाली स्थितियों में भी देखने में सक्षम बनाती है.

भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, बीएसएफ, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और सीआरपीएफ समेत कई सरकारी एजेंसियां इसकी ग्राहक हैं. कंपनी के विदेशी ग्राहकों में अमेरिकी नेवी सील और पेरू की सेना शामिल हैं. आधुनिक दौर के युद्धक्षेत्र,  महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना, मानवरहित जासूसी उपकरण, अंधेरे में चलने वाले वाहन दौड़ाना—इन सभी गतिविधियों के लिए प्रभावी दृश्यता उपलब्ध कराना बहुत चुनौतीपूर्ण काम है.

धुआं, धूल, कोहरे, छद्म आवरण निगरानी और नेविगेशन को बहुत मुश्किल बनाते हैं. टोन्बो सैन्य जासूसी, महत्वपूर्ण आधारभूत सुरक्षा और परिवहन सुरक्षा के क्षेत्र में बाजार की मांग के अनुरूप सारी जरूरतों को पूरा करती है.

उन्नत इमेजिंग प्रोडक्ट कस्टम डिजाइन एप्लिकेशन और बौद्धिक संपदा कंपनी की असली ताकत हैं. टोन्बो इमेजिंग 104 करोड़ रुपए सालाना टर्नओवर वाली कंपनी है.

इसके प्लांट पांच मुख्य जगहों—सिंगापुर, भारत, अमेरिका, ग्रीस और पोलैंड में हैं. इसके प्रत्येक इंजीनियरिंग केंद्र में एक विशेष शोध और विकास केंद्र और  इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स परीक्षण केंद्र है जो कंपनी के उत्पादों के पूर्ण स्पेक्ट्रम के लिए इंजीनियरिंग और उत्पाद विकास का प्रबंधन करता है.

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