इधर कुछ साल से ओडिशा की राजनीति पर नजर रखने वालों के लिए सांसद और उद्योगपति बैजयंत 'जय' पंडा को बीजू जनता दल (बीजेडी) से निकाला जाना हैरानी की बात नहीं थी. खासतौर पर इसलिए भी कि उन्होंने खुले तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की नीतियों की तरफदारी जो की थी.
बैजयंत पंडा ने निलंबन के दिन ही ट्वीट कर हैरानी जाहिर की और कहा कि बहुत दुखद है कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक उनके खिलाफ एक आइएएस अधिकारी की साजिश को नहीं समझ सके.
हालांकि राजनीति के जानकारों को बीजद में चल रही खींचतान का एहसास मई 2017 की घटना से ही हो गया था. उस समय केंद्रपाड़ा जिले के जटियापारलो गांव में पेयजल योजना का उद्घाटन करने पहुंचे पंडा की नाराज कार्यकर्ताओं से झड़प हो गई थी.
इस प्रकरण में पंडा का ओडिय़ा अखबार दैनिक समाज में छपा लेख ताबूत में आखिर कील साबित हुआ जिसमें उन्होंने बीजद के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाए थे. राज्य के मंत्री और पार्टी प्रवक्ता सूर्य नारायण पात्र कहते हैं कि पंडा कुछ समय से नाराज चल रहे थे क्योंकि पार्टी ने लोकसभा में वित्त मामलों की स्थायी समिति का अध्यक्ष बनने की उनकी अर्जी नामंजूर कर दी थी. पंडा ने यह भी आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री के विशेष सचिव कार्तिकेय पांडियन के इशारे पर मुख्यमंत्री कार्यालय चल रहा है.
पंडा बीजद के संस्थापक सदस्य हैं और दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं. उन्होंने 2009 और 2014 में दो बार लोकसभा का चुनाव जीता है.
पंडा और बीजू पटनायक (मुख्यमंत्री के दिवंगत पिता) के परिवार का बहुत पुराना रिश्ता रहा है. पूर्व कृषि मंत्री दामोदर राउत कहते हैं कि एक जमाना था जब बैजयंत पंडा का परिवार बीजू पटनायक के करीब था. उनकी खनन कंपनी इम्फा का कारोबारी ग्राफ बढ़ाने में बीजू बाबू ने मदद की.
बैजयंत की मां इला पंडा (अब दिवंगत) को बीजू पटनायक ने राज्यसभा का सदस्य बनवाया तब वह जनता दल में थे. बीजद से निकाले जाने की खबर मिलते ही पंडा ने कहा कि वे भगवान जगन्नाथ से रास्ता दिखाने की प्रार्थना कर रहे हैं. इसके फौरन बाद वे पुरी के जगन्नाथ मंदिर में देखे गए.
मीडिया कंपनी ओटीवी (ओडिशा टीवी) के मालिक पंडा समाज और अन्य पत्र-पत्रिकाओं में लगातार लेख लिख रहे हैं और बीजद के आला नेतृत्व के निकम्मेपन पर सवाल उठा रहे हैं. उनके निष्कासन के बाद तो ओटीवी बड़े आक्रामक ढंग से ऐसी खबरें चला रहा है, जो बीजद सरकार की कमजोरियों को उजागर करती हैं.
उसका फोकस सरकार की गलत नीतियों और राज्य में कानून-व्यवस्था की खराब होती स्थिति पर है. कोरापुट जिले में कुंडुली गैंगरेप और पीड़िता की खुदकुशी की वारदात को नवीन सरकार की नाकामी की तरह पेश किया गया.
तो, आखिर आगे क्या है? दरअसल पंडा से भाजपा के धर्मेंद्र प्रधान की काफी छनती है. वे कुछ समय से उनके सबसे मुखर समर्थक हैं, इसलिए पंडा के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हुए हैं. हालांकि वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल दास का कहना है कि पंडा का खास असर नहीं है और उनके जाने से बीजद की चुनावी संभावनाएं प्रभावित होती नहीं लगतीं.
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