scorecardresearch
डार्क मोड

पंजाब: कारोबार के लिए बिछ गए पलक-पांवड़े

हालांकि दर्जनों इकाइयां बंद पड़ी हैं, फिर भी उद्योगों को रिझाने में पंजाब कोई कसर नहीं छोड़ रहा है.

2013 में प्रोग्रेसिव पंजाब प्रोग्रेसिव समिट में प्रतिनिधियों को संबोधित करते सीएम प्रकाश सिंह बाद
2013 में प्रोग्रेसिव पंजाब प्रोग्रेसिव समिट में प्रतिनिधियों को संबोधित करते सीएम प्रकाश सिंह बाद
अपडेटेड 19 अक्टूबर , 2015

भला किसी की कद्र करने के लिए इससे मौजूं वक्त दूसरा क्या हो सकता था. पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल 28-29 अक्तूतूबर को दूसरा निवेश शिखर सम्मेलन इन्वेस्ट पंजाब 2015 आयोजित करने वाले हैं, जिसमें वे राज्य को देश के अव्वल निवेश स्थल के तौर पर पेश करने की योजना बना रहे हैं. इसके ठीक पहले सितंबर की शुरुआत में 'कारोबार लगाने में आसानी' पर विश्व बैंक की ओर से की गई भारतीय राज्यों की रेटिंग में पंजाब ने शीर्ष जगह हासिल कर ली.

यह राज्य में बदलते माहौल का शायद शुरुआती संकेत है, जहां मौजूदा उद्योग पिछले एक दशक से अपना वजूद बचाने के लिए जूझ रहे हैं. केंद्र सरकार ने 1995 में उस वक्त प्रचलित फ्रेट इक्वलाइजेशन स्कीम यानी मालढुलाई को बराबर करने की योजना वापस ले ली थी. यह योजना पंजाब के औद्योगिक उत्पादकों को स्रोत इलाकों और बंदरगाहों से कच्चा माल लाने पर मालढुलाई के खर्चों की भरपाई कर देती थी. इस योजना का बंद होना राज्य के फलते-फूलते लौह धातु उद्योग के लिए कमर तोडऩे वाला साबित हुआ. बीसियों इस्पात इकाइयों और उससे जुड़े हजारों उद्योगों पर ताले जड़ गए. इनमें साइकिल निर्माण, यार्न और होजरी इकाइयां भी थीं, जिन्होंने लुधियाना को 'भारत के मैनचेस्टर' का खिताब दिलवाया था. राज्य को दूसरा धक्का 2003 में लगा, जब एनडीए सरकार ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में लगने वाली नई औद्योगिक इकाइयों को 10 साल का टैक्स हॉलीडे दिया, पर पंजाब को इससे बाहर रखा.

फैक्ट्रियों के मालिक रह चुके, खासकर छोटी और मध्यम इकाइयां चलाने वाले लोग कहते हैं कि उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने और देने में जो थोड़ी-बहुत बढ़त हासिल थी, वह भी एक के बाद एक राज्य सरकारों के थोपे गए बिजली के ऊंचे दामों और वेट की ऊंची दरों की बदौलत पूरी तरह जाती रही. रही-सही कसर को बिजली की लगातार कमी और राज्य में अनुकूल औद्योगिक नीति के नहीं होने ने पूरी कर दिया. सूक्ष्म, छोटे और मझौले उद्यमों की 2007-08 की अखिल भारतीय जनगणना के पिछले साल सामने आए नतीजों से तस्दीक हुई है कि यहां की 18,770 औद्योगिक इकाइयों ने या तो बोरिया-बिस्तर समेट लिया या दूसरे राज्यों में ठिकाने बना लिए. लेकिन निवेशकों को अब उम्मीद नजर आ रही है. पंजाब के लिए घातक साबित हुई पड़ोसी राज्यों के निवेशकों को हासिल टैक्स हॉलीडे की सुविधा आखिरी चरण में है. वहीं अपने दूसरे कार्यकाल के आखिरी दौर में बादल दावा कर रहे हैं कि वे अब 'कारोबार करने के लिए तैयार' हैं. 2007 में जब उनकी पार्टी गद्दीनशीन हुई थी, तब बादल के मुताबिक, ''हमारे पास देने को ज्यादा कुछ नहीं था.''

एक वक्त था जब राज्य में गर्मियों में बिजली कटौती आम बात थी. मोटे तौर पर इसकी वजह थी नाकाफी बिजली उत्पादन और बेहद असंतुलित खपतः सर्दियों में 3,500 मेगावॉट और धुर गर्मियों में 10,500 मेगावॉट. इसके बरअक्स आज पंजाब के पास 11,666 मेगावॉट बिजली बनाने की क्षमता है. यानी साल के आठ महीने के लिए 5,000 मेगावाट से ज्यादा अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है. असल में बादल ने नए निवेशकों के लिए जो पिटारा खोला, उसमें 'राज्य में कहीं भी बिजली की सुनिश्चित आपूर्ति' सबसे ऊपर थी.

मोहाली में दिसंबर 2013 में आयोजित प्रोग्रेसिव पंजाब समिट ने कई बेशकीमती निवेशकों को आकर्षित किया था और 66,936 करोड़ रु. के 128 एमओयू पर दस्तखत किए गए थे. उनमें रिलायंस, इन्फोसिस, एयरटेल, डीएलएफ, ओमेक्स, आइटीसी और कारगिल इंडिया प्रमुख थीं. इस सम्मेलन के थोड़े ही दिनों बाद डावोस में बोलते हुए एयरटेल के सुनील भारती मित्तल ने पंजाब को भविष्य का निवेश स्थल बताया था. 20 महीने बाद बादल दूसरे निवेशक सम्मेलन की तैयारी को अंतिम रूप दे रहे हैं. वे कहते हैं, ''मेरा शिखर सम्मेलन कॉर्पोरेट जगत के दिग्गजों के साथ फोटो खिंचवाने का मौका नहीं है. मैं कारोबार को लेकर संजीदा हूं.''

48 वर्षीय आइएएस अधिकारी अनिरुद्ध तिवारी कहते हैं कि राज्य ने नए कारोबार लगाने की गुत्थी को सुलझा लिया है. 2010 में इन्वेस्ट पंजाब दफ्तर खुलने के बाद से ही उसके मुखिया तिवारी कहते हैं, ''प्रदूषण नियंत्रण, श्रम, भवन योजना, वन, भू-उपयोग में बदलाव से लेकर बॉयलरों और फैक्ट्री कानून तक हर मुमकिन मंजूरी अब यहां हासिल की जा सकती है.'' दो साल पहले बादल ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी देश में कहीं मिसाल नहीं मिलती, उन्होंने तिवारी को 23 अलग-अलग विभागों से संबंधित मंजूरियां देने के अधिकार सौंप दिए. इसका फायदा हुआ. तिवारी का दावा है कि निर्माण शुरू करने के लिए विनियामक मंजूरियां पाने में लगने वाला औसत वक्त अब 38 कार्य दिवस है. वे बताते हैं कि 2013 के सम्मेलन के दौरान और उसके बाद से 228 निवेश प्रस्ताव मिले. इनमें से 117 सैद्धांतिक तौर पर मंजूर किए गए, 11 प्रोजेक्ट व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, 55 निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं और 109 का निर्माण कार्य शुरू होने वाला है.

तिवारी कहते हैं कि इस रफ्तार और आसानी ने कई राज्यों तथा साथ ही औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआइपीपी) को भी चौंका दिया. वे उस चीज पर ध्यान देने लगे जिसे अब आम तौर पर 'पश्चिम पंजाब मॉडल' कहा जा रहा है. खाद्य प्रसंस्करण और पशु आहार की बहुराष्ट्रीय कंपनी कारगिल पंजाब में निवेश करने वाली शुरुआती कंपनियों में से थी. इसने बठिंडा में 85 करोड़ रु. की लागत से डेयरी आहार इकाई लगाई है जिसके 2016 की शुरुआत में व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की उम्मीद की जा रही है. राज्य में कंपनी के कामकाज के प्रमुख अच्युत आयंगर कहते हैं, ''राज्य सरकार को खुद इतना बढ़-चढ़कर सक्रिय देख खुशगवार ताज्जुब हुआ.''
पंजाब को लंबे समय से खेतिहर राज्य माना जाता रहा है. पर अब यहां औद्योगिक कामगारों की बढ़ती आबादी संभावित निवेशकों के लिए बड़ा आकर्षण है. इनमें बड़ी तादाद उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी कामगारों की है. तिवारी जिसे वैश्विक निवेश माहौल में 'निराशा का दौर' कहते हैं, उसके बावजूद पंजाब में नए निवेश का लगातार प्रवाह बना रहा है. इनमें कपूरथला में आइटीसी का 900 करोड़ रु. का फूड पार्क, राजपुरा में टीआइ साइकल्स का बीएसए साइकल संयंत्र, होशियारपुर स्थित सोनालिका ट्रैक्टर्स की 220 करोड़ रु. की विस्तार परियोजना, राजपुरा में आदित्य बिड़ला समूह के अल्ट्राटेक की 540 करोड़ रु. की सीमेंट फैक्ट्री और गोइंदवाल में निर्माण के लिए रिकॉर्ड 20 दिनों में मंजूर कंसई-नेरोलक की नई पेंट फैक्ट्री शामिल हैं.

पंजाब दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद भूमि लीज नीति बनाने में कामयाब रहा है, जिसकी वजह से सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की बाढ़ आ गई. नई इकाइयां मार्च 2016 तक 500 मेगावॉट बिजली देने लगेंगी और नए प्रस्तावों पर गौर करें तो मार्च 2017 तक इसके बढ़कर 1,500 मेगावॉट हो जाने की उम्मीद है.

बादल 'औद्योगिक बिजली की सबसे सस्ती दरों' की पेशकश कर रहे हैं. राज्य वैट पर 7 से 13 साल की छूट, बिजली के शुल्क पर 50 से 100 फीसदी की छूट, जमीन पर स्टांप शुल्क से छूट और शहरी इलाकों में संपत्ति कर से छूट की पेशकश भी कर रहा है. बादल कहते हैं, ''हम पंजाब को दूसरे राज्यों से कई दर्जे ऊपर स्थापित करना चाहते हैं.'' इस दिशा में उप-मुख्यमंत्री नए एक्सप्रेस वे, नए चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट और मुकेश अंबानी के रिलायंस और एयरटेल के 4जी टेलीकॉम नेटवर्क की बदौलत बेमिसाल कनेक्टिविटी का वादा कर रहे हैं. वे कहते हैं, ''28 दिसंबर तक हर गांव 4जी से जुड़ा होगा.''

तिवारी कहते हैं कि 'एक सकारात्मक इकोसिस्टम विकसित करने के लिए' राज्य सरकार पहले ही लुधियाना के बीमार पड़े साइकल उद्योग, कपड़ा इकाइयों और फाउंड्री के मालिकों के बातचीत कर रही है. पंजाब ने नए कारोबार लगाने की 'गुत्थी' को भले ही सुलझा लिया हो, लेकिन परियोजनाओं के पूरे जीवनकाल तक निवेशकों को सहारा देने के रास्ते उसे तलाशने होंगे.

ADVERTISEMENT
Advertisement