राजस्थान में पिछले पखवाड़े दो बड़े बदलाव हुए. दो शख्सियतों को उनकी मौजूदा हैसियत से बेदखल कर दिया गया. दोनों ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी रहे हैं. बदलाव उस वक्त हुए जब राजे एक बिजनेस सम्मेलन में सिंगापुर गई हुई थीं. 16 अक्तूबर को उनके मुख्य सचिव राजीव महर्षी का तबादला केंद्रीय वित्त सचिव के पद पर दिल्ली कर दिया गया और 10 अक्तूबर को उनके पुराने दोस्त और आइपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया. तख्तापलट कर ललित को हटाने वाले अमीन पठान भी राजे के वफादार हैं. वे मोदी के भी सहायक रहे हैं.
दोनों बदलावों के पीछे केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का हाथ माना जा रहा है. जेटली और महर्षी दोनों के बहुत अच्छे संबंध हैं. जेटली लंबे समय से उन्हें अपने साथ लाना चाहते थे. हालांकि जेटली क्रिकेट के मामलों में मोदी के बेहद खिलाफ रहे हैं. महर्षी भी कभी मोदी के करीबी थे. लेकिन हाल के दिनों में राजे की तरह उन्हें भी क्रिकेट मामलों में तटस्थ देखा गया. तो क्या मोदी को बेदखल कर देने से जेटली खुश हो गए तब महॢष का तबादला वित्त मंत्रालय में किया गया? महर्षी का केंद्र में वित्त सचिव बनना बड़ी बात नहीं है. दिसंबर,2013 में राजे की ओर से उन्हें अपना मुख्य सचिव बनाकर लाने से पहले वे रसायन और उर्वरक सचिव थे ही. वे राजे के कामयाब वित्त सचिव भी रह चुके हैं. दिल्ली में वित्त सचिव के बतौर काम करने के बाद कैबिनेट सचिव बनने के लिए दावा पेश करने में भी उन्हें मदद मिलेगी. अगस्त, 2015 में महर्षी का सेवाकाल पूरा होना है. यदि वे कैबिनेट सचिव बन गए तो उन्हें दो साल का सेवा विस्तार मिल जाएगा.
लेकिन क्या प्रधानमंत्री एक ऐसे शख्स को कैबिनेट सचिव बनाना चाहेंगे जिसे राजे और जेटली का करीबी माना जाता है? वैसे आने वाले वक्त में यह राजे और नरेंद्र मोदी के बीच व्यापक सहमति का हिस्सा भी हो सकता है. सिंगापुर के लिए रवाना होने से पहले राजे ने अपने अप्रत्याशित बयान से खासी हलचल मचा दी थी. उन्होंने कहा था कि बीजेपी की जीत का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता. हालांकि राजे ने फौरन सफाई दी थी कि उनका इरादा प्रधानमंत्री पर निशाना साधना नहीं था. लेकिन राजनीति में मोल-तोल के लिए ऐसी रणनीतियां कोई नई बात नहीं हैं.
राजे ने ललित मोदी के तख्तापलट से जुड़े विवाद से अपने को दूर ही रखा है. महमूद आब्दी के नेतृत्व में मोदी की टीम आरसीए के कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभालने वाले अमीन पठान के खिलाफ अदालत में लड़ाई लड़ रही है. पठान और ललित गुट के बीच लड़ाई ने कुछ मैली सचाइयों को उजागर किया है. पठान ने ललित गुट पर आरोप लगाया है कि उसने वकीलों को करोड़ों रुपये की फीस चुकाई थी. आरोप के मुताबिक यह फीस कुछ ऐसे वकीलों को भी दी गई जो जलमहल समझौते को सुप्रीम कोर्ट से रद्द करवाने की राजे की कोशिश का विरोध करने में आगे थे. वहीं आब्दी ने आरोप लगाया कि विरोधियों ने इसलिए तख्तापलट किया क्योंकि आरसीए ने उनकी यात्रा और अन्य खर्चे देना बंद कर दिया. वे यह भी कहते हैं, ''जब हाइकोर्ट ने बीसीसीआइ को आरसीए के बैनर का इस्तेमाल किए बगैर
राजस्थान से खिलाडिय़ों के चयन का निर्देश दे दिया था, तो पठान ने विद्रोह
क्यों किया? '' पठान जोर देकर कहते हैं कि इस बगावत के पीछे राजे या जेटली का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''ललित मोदी आरसीए से बीसीसीआइ का प्रतिबंध हटवाने में नाकाम रहे. थे. वे
हमारे फोन कॉल्स का जवाब तक नहीं देते थे, हम सब इस बात से आजिज आ चुके थे. क्रिकेट को आगे बढ़ाने का यही एक रास्ता था कि मोदी को हटाएं और बीसीसीआइ की मान्यता हासिल करें. ''
राजे के इन दो करीबियों का राज्य के मामलों से हटना मदद ही करेगा. महर्षि के केंद्र में जाने से वे राज्य के लिए कुछ और मदद जुटा सकती हैं. इसी तरह ललित का हटना राज्य क्रिकेट के लिए अच्छा है. बीसीसीआइ ने ललित के नेतृत्व वाले आरसीए पर प्रतिबंध लगा रखा है, जो अब उम्मीद है कि हटा लिया जाएगा. दूसरी ओर इससे राजे और मोदी के बीच दूरी पाटने में भी मदद मिलेगी—वह दूरी जो केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य से केवल एक सांसद को शामिल करने और उससे भी ज्यादा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह को केंद्र में मंत्री नहीं बनाने से दिख रही थी.
ललित मोदी के हटने और वित्त सचिव के तबादले से क्या राजे को लाभ होगा?
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन से ललित मोदी के हटने और वित्त सचिव राजीव राजीव महर्षि के तबादले से क्या राजे को लाभ होगा?

अपडेटेड 20 अक्टूबर , 2014
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