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डार्क मोड

सबसे सस्ते सफर का सुहाना वादा

भारतीय विमानन बाजार में उतरने को तैयार एयर एशिया. कम किराया है हथियार. नजर उस बड़े तबके पर जिसने कभी हवाई यात्रा नहीं की

अपडेटेड 9 सितंबर , 2013
यह असामान्य बात है कि किसी एयरलाइंस का शीर्ष अधिकारी रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन पर खड़े होकर यह अध्ययन करे कि लोग यात्रा के दौरान किस तरह से पेश आते हैं. जुलाई में एयर एशिया की चीफ  कॉमर्शियल ऑफिसर बनने के बाद से अमीषा सेठी यही कर रही हैं. यह कवायद असल में पहली बार उड़ान पर जाने वालों को आकर्षित करने का हिस्सा है क्योंकि यह सस्ती विमान सेवा इस साल के अंत तक भारत में सेवाएं शुरू करने की तैयारी में है. एयर एशिया इंडिया के सीईओ मिट्टू चांडिल्य कंपनी की रणनीति के बारे में बताते हैं, “एयरलाइंस जिन यात्रियों को फ्लाइट में ले जाती हैं, उनके बारे में एक छवि बनाने की कोशिश करती हैं. हम उसे तोडऩा चाहते हैं.”

हालांकि, इसके लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होगी. खासकर भारत में, जहां मौजूदा एयरलाइंस पैसा कमाने के लिए जूझ रही हैं. कंसल्टेंसी सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन (सीएपीए) की हाल की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी विमान सेवा एयर इंडिया के अलावा अन्य सभी एयरलाइंस को जुलाई से सितंबर तिमाही में कुल मिलाकर 40 से 45 करोड़ डॉलर के घाटे का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक एयरलाइंस के हाल में किराए में छूट देने से भी हवाई यातायात को बढ़ाने में बाधा आई है, जबकि महंगे ईंधन और कमजोर रुपए की वजह से खर्च ऊंचा बना हुआ है.

तो एयर एशिया इस रुख को कैसे पलटेगी, कैसे लागत को नियंत्रण में रखेगी और सस्ते किराए पेश करेगी, जिसके लिए वह लोकप्रिय है? क्या 32 वर्षीय पूर्व मॉडल और उद्यमी चांडिल्य तथा उनकी टीम यह कर पाएगी? कुछ एविएशन एनालिस्ट का मानना है कि जटिल घरेलू बाजार को देखते हुए एयर एशिया इंडिया—मलेशिया के एयर एशिया ग्रुप, भारत के टाटा समूह और अरुण भाटिया के नेतृत्व वाले टेलेस्ट्रा टेलीसर्विसेज के संयुक्त उपक्रम—को और अनुभवी मैनेजमेंट टीम रखने की जरूरत है. पहले भारती एयरटेल और ब्लैकबेरी के साथ काम कर चुकीं जिंदादिल और आगे बढऩे की इच्छुक सेठी इस बात पर हंसती हैं. वे कहती हैं, “यह सब करने के लिए आपको उम्रदराज होने की नहीं, बल्कि समझदारी की जरूरत है.”

नई सवारियों की तैयारी
एयर एशिया की योजना हवाई यात्रा करने वाले लोगों के ऐसे सेगमेंट को जोडऩे की है जिन तक अभी दूसरे कैरियर नहीं पहुंचे हैं. इसका लक्ष्य उन ग्राहकों तक पहुंचना है जो रेल और सड़क से यात्रा करते हैं. यह कुछ ऐसा ही है जिसकी कोशिश भारत में सस्ती एविएशन सेवा के अगुआ जी.आर. गोपीनाथ अपनी एयरलाइंस एयर डेक्कन के साथ सात साल पहले ही कर चुके हैं. गोपीनाथ कामयाब नहीं हो पाए और उन्हें अपनी कंपनी, प्रतिद्वंद्वी किंगफिशर एयरलाइंस को बेचनी पड़ी, जो खुद ही अब जमीन पर आ गई है. मई में एयर एशिया के इंडिया सीईओ बने चांडिल्य इससे नहीं घबराते. वे कहते हैं, “मैं उन लोगों को फ्लाइट में बैठाना चाहता हूं जिन्हें यह नहीं पता होता कि प्लेन पर चढ़ते कैसे हैं. यह जोखिम भरी रणनीति हो सकती है, लेकिन इसकी मुझे कोई चिंता नहीं है, यह विशाल बाजार है और हम उन्हें साथ लेकर चलेंगे.”

तो क्या एयरलाइंस कॉर्पोरेट या बिजनेस क्लास के यात्रियों को नजरअंदाज करेगी? पूरी तरह से नहीं. चांडिल्य बताते हैं कि एयर एशिया अपने विमानों की 185 सीटों में से 20 सीटें इस कैटगरी के यात्रियों के लिए रखेगी जिन्हें अतिरिक्त किराया देने पर ज्यादा लेगरूम और विमान तक पहुंचाने के लिए गाड़ी मिलेगी. वे कहते हैं, “कॉर्पोरेट जगत के जो लोग एयर एशिया में यात्रा करना चाहेंगे और खास सुविधाएं चाहेंगे, उन्हें यह मिलेगा, लेकिन हमारा पूरा कारोबारी मॉडल उनके मुताबिक नहीं होगा.”

तो क्या एक मछुआरा अपनी मछलियों और फूलों की खेती करने वाला अपने फूलों के माल संग बिजनेस ट्रैवलर्स के साथ ही एयर एशिया में यात्रा करेगा. चांडिल्य कहते हैं, “मैं तो कभी हवाई यात्रा न करने वाले लोगों को लक्ष्य बना रहा हूं.” चांडिल्य के घुटने में अगर चोट न लगी होती तो वे टेनिस खिलाड़ी होते. अब सवाल उठता है कि चांडिल्य जिस सेगमेंट को लक्ष्य बना रहे हैं उसका आकार क्या है? वे बताते हैं, “भारत में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या 5 से 6 करोड़ ही है जबकि कुल आबादी 1.2 अरब है. हमारे पास ढेरों मौके हैं और हम इसी पर फोकस कर रहे हैं.”

साथ जोडऩे का सलीका
जिस नए सेगमेंट को एयर एशिया लक्ष्य बनाने की कोशिश में है उसे आकर्षित करने के लिए मार्केटिंग और डिस्ट्रिब्यूशन के लिए कुछ अनूठी योजना बनानी होगी. एयरलाइंस में सेल्स का जिम्मा संभाल रही सेठी कहती हैं कि एयर एशिया की मार्केटिंग “भारी हंगामा मचाएगी.” एयरलाइंस फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्क से भी संभावित ग्राहकों तक पहुंचेगी.

भारतीय बाजार की जटिलता को देखते हुए एयर एशिया अपनी डिस्ट्रिब्यूशन रणनीति भी बदलेगी. ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल एक्सपीडिया को एक्सक्लूसिव तरीके से बची हुई सीटें बेचने की इजाजत मिलेगी. वह कुछ स्थापित खिलाडिय़ों को नजरअंदाज कर सकती है और ऐसे उद्यमियों को तलाश सकती है जो एयर एशिया में भरोसा करते हैं. चांडिल्य कहते हैं कि उन्हें इसे लेकर ‘कोई भ्रम’ नहीं है कि स्थापित ट्रैवल पोर्टल ऐसे एयरलाइंस को बढ़ावा देंगे जो पहले से ही उनके टॉप कस्टमर हैं. वे बताते हैं, “मैं उनके  आगे गिड़गिड़ाऊंगा नहीं. मैं ऐसे शख्स के पास जाऊंगा जो हमारे यहां इन्वेस्ट करना चाहता है. हमारे साथ आगे बढऩा चाहता है. हमारे साथ कदम मिलाकर कड़ा मुकाबला सहने को तैयार है.”

भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन पोर्टल में से एक MakeMyTrip.com चांडिल्य से कुछ हद तक सहमत नहीं है. इसके चीफ  कॉमर्शियल ऑफिसर केयूर जोशी कहते हैं कि उनका पोर्टल एयर वेंचुरा जैसी कई क्षेत्रीय एयरलाइंस के संग काम कर रहा है. हालांकि, वे इससे सहमत हैं कि भारतीय एविएशन मार्केट अभी बहुत कम लोगों तक पहुंचा है. जोशी कहते हैं, “एयर एशिया छोटे शहरों और कस्बों को लक्ष्य बनाकर भारतीय बाजार में नया और रोमांचक आयाम लेकर आई है. मौजूदा और नए खिलाडिय़ों के लिए भारत में मौकों की भरमार है.”

दक्षिण है निशाने पर
शुरुआत में एयर एशिया दक्षिण भारत पर फोकस करेगी. एयर एशिया की रणनीति का अहम हिस्सा होगा इस इलाके में नए रूट शुरू करना. उन ठिकानों को प्रचारित करना जिनमें सैलानी दिलचस्पी रखते हैं. चांडिल्य कहते हैं, “हम जिस तरह दक्षिण पर फोकस करने जा रहे हैं, अभी तक भारत में किसी अन्य एयरलाइंस ने उस तरह से जोर नहीं दिया है.”
एयर एशिया मलेशिया और थाइलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से आने वाले हवाई यातायात का भी फायदा उठाएगी, जहां उसकी ग्रुप कंपनियां पहले ही सस्ती विमान सेवाएं दे रही हैं. इस कारोबार के जानकारों का कहना है कि भारत से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की हवाई यात्रा करने वाले करीब आधे लोग दक्षिण भारत से होते हैं. एयर एशिया इंडिया का मुख्यालय चेन्नै में है. चांडिल्य कहते हैं, “एयर एशिया से 4.3 करोड़ यात्री सफर करते हैं. हमारे पास विशाल डेटाबेस है. इस विशाल समुदाय को हम भारत में विभिन्न ठिकानों तक लाने की संभावना देख रहे हैं.”

यह एयरलाइंस मेट्रो और छोटे शहरों के बीच हब और स्पोक मॉडल का इस्तेमाल करते हुए हर बिंदु तक कनेक्टिविटी देने की कोशिश करेगी. इसकी योजना 2014 तक भारत में चार-पांच हब विकसित करने की है. चेन्नै के अलावा दक्षिण भारत में दो और हब बनाए जाएंगे. हैदराबाद, बंगलुरू और कोच्चि जैसे शहरों को कंपनी हब बनाने पर विचार कर रही है. कंपनी ने उन छोटे शहरों और कस्बों का नाम अभी तय नहीं किया है जहां उसे सेवा देनी है, लेकिन वह दक्षिण भारत के किसी भी ऐसे एयरपोर्ट पर विचार कर सकती है जहां ए 320 विमान लैंड कर सकता हो.

एयर एशिया के लिए सफलता की कुंजी सस्ता किराया है. एयरलाइंस भारत में अपने शुरुआती किराए तय करने के लिए रेलवे के फस्र्ट क्लास टिकट को मानक बनाएगी. उसकी योजना शुरुआती किराया रेल किराए से 1,000 रु. ज्यादा रखने की है. इसके लिए कंपनी को खर्चों पर लगाम कसनी होगी. जानकार बताते हैं कि एयर एशिया अपनी मलेशियाई पैरेंट कंपनी से कम ब्याज दर पर विमान लीज पर ले सकती है, जिसने यूरोपीय कंपनी एयरबस को 375 विमानों का ऑर्डर दिया है. एयरलाइंस को देख-रेख और स्पेयर्स कॉन्ट्रैक्ट में भी सख्त मोल-भाव करना होगा.
 
खर्च को करना होगा काबू
ऑपरेशन लागत कम रखने के लिए एयरलाइंस को कर्मचारी कम रखने होंगे. शुरुआत में इसकी योजना प्रति विमान 80 से 100 कर्मचारी और बाद में इसे घटाकर 60 कर्मचारी तक कर देने की है. इसकी तुलना में भारत की अन्य एयरलाइंस में प्रति विमान 102 से 185 कर्मचारियों का अनुपात है.

पहले के मुकाबले कम वेतन पर एयरलाइंस से जुडऩे वाले चांडिल्य हर कॉन्ट्रैक्ट के लिए जमकर मोल-तौल कर रहे हैं. चाहे वह कर्मचारियों संग हो, वेंडर्स, एयरपोर्ट या मार्केटिग एजेंसियों संग, ताकि लागत कम रखी जा सके. उन्होंने बताया, “केबिन क्रू की भर्ती में हम बिल्कुल बुनियादी स्तर तक हर चीज के लिए मोल-भाव कर रहे हैं. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कॉन्ट्रैक्ट हैवी बेस की बजाए परफॉर्मेंस आधारित हो.”

एयरलाइंस में फिलहाल 200 कर्मचारी हैं और जब तक उसे सभी रेगुलेटरी मंजूरी नहीं मिलतीं, तब तक भर्ती की रफ्तार धीमी रहेगी. चांडिल्य ने कहा, “हर महीने इतना खर्च होने (बिना ऑपरेशन) का मतलब है कि ज्यादा से ज्यादा नुकसान.” लेकिन एविएशन एक्सपर्ट लागत कम रखने के लिए कर्मचारियों की संख्या में कटौती की रणनीति को खारिज करते हैं. दुबई स्थित एयरलाइन एडवाइजरी फर्म मार्टिन कंसल्टेंसी के फाउंडर और सीईओ मार्क  मार्टिन कहते हैं, “मानव संसाधन की लागत किसी एयरलाइंस की कुल लागत के 10 से 18 फीसदी से ज्यादा नहीं होती. इसलिए एयर एशिया कम कर्मचारियों से बहुत कुछ हासिल नहीं कर सकती.”

भारत की सस्ती एयरलाइंस स्पाइसजेट के साथ काम कर चुके मार्टिन ने एयर एशिया के किराए को रेल किराए के आधार पर तय करने के मॉडल पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “भारतीय ग्राहकों के लिए रेल और हवाई यात्रा अलग-अलग उद्देश्य के लिए बनी हैं. दुनिया में कहीं भी एयरलाइंस रेल से मुकाबला करने की कोशिश नहीं करतीं. एयर एशिया को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक मॉडल तैयार करने की जरूरत है.”

एयरक्राफ्ट पार्किंग, नेविगेशन और लैंडिंग चार्ज के रूप में भारी खर्च होने की वजह से एयर एशिया दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से दूर ही रहेगी. इन दोनों एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट शुल्क में पिछले साल चार गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है. चांडिल्य का कहना है कि देश के इन दो सबसे व्यस्त एयरपोर्ट पर जाम की समस्या भी होती है जिससे ईंधन का खर्च बढ़ जाता है. चांडिल्य को उम्मीद है कि इन सभी प्रयासों की वजह से एयरलाइंस ऑपरेशन  के तीसरे महीने से ही पैसा बनाना शुरू कर देगी.

जानकार इसे कुछ ज्यादा ही आशावादी होना मानते हैं. एविएशन कंसल्टिंग फर्म सीएपीए के दक्षिण एशिया प्रमुख कपिल कौल कहते हैं, “एयर एशिया के लिए शुरुआती 12 से 18 महीने काफी चुनौतीपूर्ण होंगे.” कौल ने कहा कि एयर एशिया के संस्थापकों ने शुरुआती पूंजी 3 करोड़ डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है जिससे यह संकेत मिलता है कि एयरलाइंस में पूंजी कम है.

हालांकि, चांडिल्य दृढ़ दिखते हैं. वह इस बात को खारिज करते हैं कि रेगुलेटरी मंजूरी हासिल होने में देरी की वजह से एयरलाइंस के लिए नवंबर तक के निर्धारित समय से संचालन शुरू कर पाना मुश्किल लग रहा है. वे कहते हैं, “ये तो बस ध्यान भटकाने की बातें हैं. मैं मंजूरी हासिल करने को लेकर आशान्वित हूं. यह जल्दी ही होगा.”

एयर एशिया जैसी नए एयरलाइंस के लिए लागत और किराया कम रखना आसान होगा. निश्चित रूप से इसके प्रतिद्वंद्वी भी किराया कम करने की कोशिश करेंगे. लेकिन चांडिल्य को इससे कोई डर नहीं है. वे कहते हैं, “उन्हें ऐसा करने तो दें. यह हमारे लिए बेहतर होगा क्योंकि तब वे हमारे इलाके में आकर खेल खेलेंगे, जहां हम उन्हें बुरी तरह हरा सकते हैं.”
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