सुमित्रा गोमतम वीणावादक हैं. वे तमिलनाडु में वीणा सीखते हुए बड़ी हुई हैं और बरसों इस तार वाले साज की झंकार सुनने के उनके शौक ने अप्रत्याशित तरीकों से उनकी मदद की है. इसने उनकी सुनने की क्षमता को मांजा है और उनकी सोच को आकार दिया है—ये वह गुण हैं जिनका आज वे अपने कारोबार के क्रम में इस्तेमाल करती हैं.
46 वर्षीया गोमतम भारत की दूसरी सबसे बड़ी आइटी सेवा कंपनी कॉग्निजेंट की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं. उनकी सुनने की योग्यता के साथ उनकी कंपनी के दूरदराज वाले डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल का अच्छा सामंजस्य बैठता है जिसमें कर्मचारी विभिन्न टाइम जोन में रह रहे ग्राहकों के फोन सुनते हैं. यह तो उन्हें एक महान लीडर बनाने वाला सिर्फ एक हुनर है. उनमें अत्यधिक दृढ़ निश्चय और काम करने की क्षमता है.
गोमतम ने कॉग्निजेंट की सॉफ्टवेयर परीक्षण प्रेक्टिस को 2004 के 800 लोगों से 23,000 तक पहुंचा दिया है. वे रिटेल, इंश्योरेंस, लाइफ साइंसेज, मैन्युफैक्चिंरग, मीडिया और एंटरटेनमेंट जैसी व्यावसायिक इकाइयों को सेवा प्रदान करने वाले विभाग की प्रमुख भी हैं जो संयुक्त रूप से कंपनी के 7 अरब डॉलर से भी अधिक के राजस्व में 50 प्रतिशत का योगदान करता है. कॉग्निजेंट के वाइस चेयरमैन लक्ष्मी नारायणन कहते हैं. ''वे साहसी डिसीजन मेकर हैं.”
गोमतम ने लीडर होने के लक्षण जल्द ही जाहिर कर दिए थे. वे 1995 में टीसीएस छोड़कर कॉग्निजेंट के साथ जुड़ी थीं और तबसे उन्होंने कंपनी के मील के पत्थरों को रखने में अपनी भूमिका निभाई है. 2005 में कॉग्निजेंट ने उनसे टेस्टिंग का काम संभालने के लिए कहा. वे बताती हैं, ''यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें कॉग्निजेंट विश्व स्तर पर बाजार का अगुआ है.”
क्या महिला होना कभी आड़े आया है? कंपनी में लगभग दो दशक काम करने के बाद गोमतम कहती हैं कि उन्हें कभी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. उन्हीं के शब्दों में, ''देश के बाहर ग्राहक पाने के लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ती है. आप कितनी दूर तक जाएंगी, यह इसी बात पर निर्भर करता है कि आप अपना कितना दम लगाना चाहती हैं.”
46 वर्षीया गोमतम भारत की दूसरी सबसे बड़ी आइटी सेवा कंपनी कॉग्निजेंट की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं. उनकी सुनने की योग्यता के साथ उनकी कंपनी के दूरदराज वाले डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल का अच्छा सामंजस्य बैठता है जिसमें कर्मचारी विभिन्न टाइम जोन में रह रहे ग्राहकों के फोन सुनते हैं. यह तो उन्हें एक महान लीडर बनाने वाला सिर्फ एक हुनर है. उनमें अत्यधिक दृढ़ निश्चय और काम करने की क्षमता है.
गोमतम ने कॉग्निजेंट की सॉफ्टवेयर परीक्षण प्रेक्टिस को 2004 के 800 लोगों से 23,000 तक पहुंचा दिया है. वे रिटेल, इंश्योरेंस, लाइफ साइंसेज, मैन्युफैक्चिंरग, मीडिया और एंटरटेनमेंट जैसी व्यावसायिक इकाइयों को सेवा प्रदान करने वाले विभाग की प्रमुख भी हैं जो संयुक्त रूप से कंपनी के 7 अरब डॉलर से भी अधिक के राजस्व में 50 प्रतिशत का योगदान करता है. कॉग्निजेंट के वाइस चेयरमैन लक्ष्मी नारायणन कहते हैं. ''वे साहसी डिसीजन मेकर हैं.”
गोमतम ने लीडर होने के लक्षण जल्द ही जाहिर कर दिए थे. वे 1995 में टीसीएस छोड़कर कॉग्निजेंट के साथ जुड़ी थीं और तबसे उन्होंने कंपनी के मील के पत्थरों को रखने में अपनी भूमिका निभाई है. 2005 में कॉग्निजेंट ने उनसे टेस्टिंग का काम संभालने के लिए कहा. वे बताती हैं, ''यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें कॉग्निजेंट विश्व स्तर पर बाजार का अगुआ है.”
क्या महिला होना कभी आड़े आया है? कंपनी में लगभग दो दशक काम करने के बाद गोमतम कहती हैं कि उन्हें कभी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. उन्हीं के शब्दों में, ''देश के बाहर ग्राहक पाने के लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ती है. आप कितनी दूर तक जाएंगी, यह इसी बात पर निर्भर करता है कि आप अपना कितना दम लगाना चाहती हैं.”

