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डार्क मोड

प्रकृति की गोद में बसा कृष्ण का घर

पुरी भगवान श्रीकृष्ण का एकमात्र ऐसा तीर्थस्थल है, जहां पर वे अपने भाई -बहन के संग वास करते हैं. शास्त्रों के मुताबिक, अयोध्या-काशी की तरह यहां भी होती है मोक्ष की प्राप्ति

अपडेटेड 10 सितंबर , 2013
भारत के पूर्वी राज्य ओडिसा की धरती पर पैर धरते ही जो पहला नाम जबान पर आता है, वह है पुरी के प्रसिद्घ मंदिर जगन्नाथ पुरी का. संस्कृत शब्द जगन्नाथ का अर्थ है जगत के स्वामी. जगन्नाथ पुरी भारत में हिंदुओं की सात पवित्र तीर्थ नगरियों में से एक है. हिंदू धर्मग्रंथों में जिन आठ स्थानों पर मोक्ष प्राप्ति की बात कही गई है, पुरी उनमें से एक है. पुरी का शाब्दिक अर्थ है—शहर.

राजधानी भुवनेश्वर से तकरीबन 60 किलोमीटर दूर समुद्र की लहरों के किनारे बसा यह शहर जगन्नाथ मंदिर के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है. साल में कभी भी चले जाएं, पुरी स्टेशन पर उतरते ही वहां की भीड़भाड़, लोगों का पहनावा, बोली और रूप-रंग बता देता है कि इस भीड़ में बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो ओडिसा  के नहीं हैं और जगन्नाथ पुरी के दर्शन के लिए आए हैं. अपने धार्मिक महत्व के कारण पुरी श्रद्घालुओं के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र है.

यहां के मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियां हैं. पुरी हर वर्ष आषाढ़ महीने की द्वितीया को निकलने वाली रथ यात्रा के कारण मशîर है. इस यात्रा में जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां साल में एक बार मंदिर प्रासाद से बाहर आती हैं और यह यात्रा दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुंदेचा मंदिर तक जाती है. उल्लेखनीय है कि भगवान के तीनों रथों को हर साल एक विशिष्ट पेड़ की लकड़ी से बनाया जाता है, जिन्हें श्रद्धालु रस्सों के सहारे खींचते हैं. प्रसिद्घ नृत्यांगना शोवना नारायण कहती हैं, ''पुरी में स्वयं ईश्वर का वास है. मैंने अनेक बार सांस्कृतिक रूप से समृद्घ ओडिसा की यात्रा की है, लेकिन मेरी हर यात्रा पुरी और कोणार्क तक ही सीमित रही है.

इतिहास की किताबों में पंद्रहवीं शती में जगन्नाथ मंदिर के अस्तित्व और वहां पूजा होने के प्रमाण मिलते हैं. आदि शंकराचार्य के स्थापित चार प्रमुख मठों में से एक गोवर्धन मठ पुरी ही में है. अपने धार्मिक महत्व के अलावा यहां का प्राकृतिक सौंदर्य बहुत ही मनमोहक है. यहां के खूबसूरत समुद्र तट, बालीगढ़ी तट, चिल्का झ्ील और रंग-बिरंगे बाजार आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं. दिन के समय यहां के प्रसिद्घ मंदिरों की यात्रा और शाम के वक्त समुद्र के किनारे सूर्यास्त का दृश्य पुरी यात्रा को यादगार बना देता है. यहां के लोग बहुत सरल और मिलनसार हैं. हालांकि उनकी भाषा हिंदी या अंग्रेजी नहीं है, लेकिन प्रमुख पर्यटन केंद्र होने के कारण मंदिर के पुजारी से लेकर, रिक्शेवाले, बस ड्राइवर और दुकानदार भी हिंदी समझते हैं. शहर में आवागमन का प्रमुख साधन ऑटो रिक्शा, हाथ रिक्शा, लोकल बस और टैक्सी हैं. रथ यात्रा के अलावा यहां वर्ष भर उत्सवों का सिलसिला चलता रहता है. कोणार्क उत्सव, कोणार्क संगीत और नृत्य उत्सव और पुरी बीच फेस्टिवल के दौरान यहां पर्यटकों की काफी भीड़ होती है.

बंगाल की  खाड़ी के तट पर बसे होने के कारण यहां का मौसम हमेशा सुहावना रहता है. यहां न ज्यादा गर्मी पड़ती है और न ज्यादा सर्दी. गर्मियों में यहां का अधिकतम तापमान 36 डिग्री और सर्दियों में न्यूनतम 25 डिग्री सेल्शियस तक होता है. जून के तीसरे हफ्ते से यहां बारिश शुरू हो जाती है. जगन्नाथ रथ यात्रा भी वर्षा ऋतु में होती है, जो प्राय: जून या जुलाई के महीने में होती है. पर्यटन के लिहाज से पुरी जाने के लिए सबसे बढिय़ा समय है सर्दी यानी अक्तूबर से लेकर मार्च तक. अधिकांश फेस्टिवल भी इसी दौरान होते हैं. नवंबर में होने वाला पुरी बीच फेस्टिवल पर्यटकों के आकर्षण का खास केंद्र है.

पुरी की यात्रा यहां के खूबसूरत बाजारों की सैर और खरीदारी के बगैर पूरी नहीं हो सकती. राघराजपुर, सुदर्शन वर्कशॉप, पट्टचित्र केंद्र, पीपली, पुरी, बीच मार्केट और ओडिसा एंपोरियम यहां के प्रमुख बाजार हैं. यह बाजार इस लिहाज से खास है कि यहां ऐसी चीजें मिलती हैं, जो ओडिसा के बाहर आपको नहीं मिलेंगी. ओडिसा को पूरे देश में अपनी हस्तकला और वस्त्रों की बुनाई के लिए जाना जाता है. आदिवासी बहुल राज्य ओडिसा से हथकरघे में बुनी हुई बोमकाई वर्क वाली साडिय़ां विदेशों तक निर्यात की जाती हैं.

पुरी जाने का सबसे सुविधाजनक और आसान साधन वायु और रेल मार्ग है. राजधानी भुवनेश्वर स्थित बीजू पटनायक एयरपोर्ट पुरी से 60 किलोमीटर दूर है और दिल्ली से भुवनेश्वर के लिए सीधी फ्लाइट है. भारत के सौ सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक पुरी स्टेशन पर लगभग सभी महत्वपूर्ण गाडिय़ां रुकती हैं.

पुरी के भीड़भाड़ भरे बाजार और लोगों की आवाजाही के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का प्रसिद्ध मंदिर
जगन्नाथ पुरी मंदिर के बाहर सजी खाने-पीने की चीजों की दुकानें. पुरी के मंदिर में यही प्रसाद चढ़ाया जाता है

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