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डार्क मोड

बिग ब्लू की बॉस

आइबीएम इंडिया की प्रमुख ने कंपनी में ट्रेनी के रूप में करियर की शुरुआत की थी और आज भारत में इस कंपनी का नेतृत्व कर रही हैं

अपडेटेड 10 सितंबर , 2013

बहुत पहले की बात नहीं है. वनिता नारायणन के पास अमेरिका में अपने परिवार के लिए डिनर बनाने की खातिर किचन गार्डन से रोजमेरी और तुलसी तोडऩे के लिए समय होता था. लेकिन इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स (आइबीएम) में दिनभर का अपना काम पूरा करने के बाद डिनर पकाना उनके लिए कोई उबाऊ काम नहीं था, यह उनके लिए रिलैक्स होने का एक तरीका था.

लेकिन जब वे 2009 में भारत आईं तो स्थितियां बदल गईं. सेल्स एवं डिस्ट्रिब्यूशन लीडर और इसके बाद ग्लोबल बिजनेस सर्विसेज में मैनेजिंग पार्टनर की हाइ प्रोफाइल भूमिका निभाने में तो उनके पास टीवी के फूड शो देखने का भी टाइम नहीं मिलता था, पकाने की तो बात ही छोड़ दें.

इसके बाद नारायणन की थाली में पर्याप्त से भी ज्यादा कुछ आ गया, आइबीएम इंडिया की नई मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका. इस भूमिका ने उन्हें देश की उन चंद महिलाओं की कतार में शामिल कर दिया जो देश में किसी टेक्नोलॉजी कंपनी की कमान संभाल रही हों.

आइबीएम ने पिछले कुछ वर्षों में अच्छा प्रदर्शन किया है: कंपनी देश के हिसाब से कमाई या कर्मचारियों की संख्या के अलग-अलग आंकड़े तो नहीं बताती, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उसने करीब 1,50,000 लोगों को रोजगार दे रखा है. इस हिसाब से तो वह भारत में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी है.

नारायणन कंपनी की अगुआई करते हुए उसे परंपरागत रूप से मजबूत गढ़ टेलीकॉम से आगे अन्य सेक्टर में भी लेकर गई हैं. वे बताती हैं, ''पिछले कुछ वर्षों में मैं आइबीएम को टेलीकॉम के अलावा बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और बीमा, इंडस्ट्रियल और रिटेल सेगमेंट में भी लेकर गई हूं.”

आइबीएम इंडिया की 54 वर्षीया मुखिया धीरे-धीरे आगे बढ़ी हैं. उन्होंने कंपनी में अपना करियर ट्रेनी के रूप में शुरू किया था और अमेरिका के मिसौरी स्थित एक टेलीकॉम क्लाइंट साउथ वेस्टर्न बेल टेलीफोन को सेवाएं दे रही थीं. कॉर्पोरेट जगत की सीढ़ी चढ़ते हुए वे आइबीएम के टेलीकॉम सोल्युशंस ऑफरिंग्स की ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट बन गईं.

2006 में आइबीएम की एशिया पैसिफिक यूनिट के संचार क्षेत्र का कारोबार देखने के लिए उन्हें शंघाई भेजा गया. इसके बाद भारत का नंबर आया और यह उनके प्रोफेशनल करियर का सर्वश्रेष्ठ तमगा साबित हुआ. हालांकि, बिग ब्ल्यू (आइबीएम को इस नाम से भी जाना जाता है) के भारतीय कारोबार से नारायणन का संपर्क वर्ष 2001 से ही हो गया था, जब एक स्थानीय टेलीकॉम प्रैक्टिस को शुरू करने में उनसे मदद मांगी गई.

उन्होंने एक 'स्पेशल प्रोजेक्ट’ पूरा किया और ऐसी टीम के साथ काम किया जिसने इतिहास रच दिया. आइबीएम को 2004 में भारती एयरटेल से 10 साल के लिए 75 करोड़ डॉलर का ऐतिहासिक आउटसोर्सिंग सौदा हासिल हुआ, जो अब 2.5 अरब डॉलर का है.

इसके बावजूद नारायणन खुद को ताकतवर नहीं समझ्तीं—इसकी जगह उन्हें 'प्रभावी’ शब्द पसंद है. अपने नेतृत्व के तरीके पर बात करने से पहले नारायणन एक क्षण के लिए रुकती हैं. वे कहती हैं, ''इसके बारे में आपको मेरी टीम के लोगों से पूछना चाहिए.”

उनके सहकर्मियों का कहना है कि नारायणन एक ही साथ सहयोगपूर्ण और स्पष्ट निर्णय लेने वाली, दोनों हैं. आइबीएम के ग्लोबल बिजनेस सर्विस, इंडिया एवं साउथ एशिया के वाइस प्रेसिडेंट एवं मैनेजिंग पार्टनर जे.बी. चेयिरन कहते हैं, ''वह भोली नहीं हैं. लेकिन वे बहुत आसानी से किसी पर भरोसा कर सकती हैं.”    
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