अपने सीईओ नितिन परांजपे के साथ पिछले साल तमिलनाडु के दूरदराज के गांव की यात्रा के दौरान हिंदुस्तान यूनीलिवर (एचयूएल) की वाइस प्रेसिडेंट, डिटर्जेंट्स, प्रिया नायर एक बात देखकर हैरान रह गईं. उन्होंने एक गरीब किसान के घर में एचयूएल के कंफर्ट फैब्रिक कंडिशनर की बोतल देखी. फैब्रिक कंडिशनर को किसी भी नजरिए से आम खपत का प्रोडक्ट नहीं माना जा सकता.
इस अनुभव ने नायर को समझ दिया कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स के लिए भारत के गांवों में भी बाजार है. नायर ने बताया, ''वे रोजाना फैब्रिक कंडिशनर भले ही इस्तेमाल न करें लेकिन कुछ लोग महीने में एक या दो बार तो इस्तेमाल करते ही हैं. आकांक्षाएं बदलने के साथ ग्राहक खुद को भी बदलने लगते हैं.”
एचयूएल देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी या उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनी है और उसके एक अरब डॉलर से अधिक के डिटर्जेंट कारोबार की मुखिया के नाते नायर इस वर्ग में कारोबार और बढ़ाने के लिए प्रोडक्ट को खास बनाने पर जोर दे रही हैं.
उनका कहना है, ''मैं प्रोडक्ट को खास बनाने के सफर में इस कारोबार को आगे बढ़ते देख रही हूं, लेकिन हमें सपनों और सच्चाई के बीच संतुलन भी रखना होगा.” अभी हाल ही में उन्होंने कंफर्ट वन रिन्स नाम से एक फैब्रिक कंडिशनर बाजार में उतारा है. कंपनी का दावा है कि इस प्रोडक्ट से कपड़ों की धुलाई में पानी कम खर्च होता है.
वास्तव में नायर लीक से हटकर ऐसी नई बातें सोचने के लिए जानी जाती हैं. एचयूएल में नायर के साथ एक दशक से ज्यादा समय तक काम कर चुकीं अनुराधा अग्रवाल उन्हें चैंपियन ऑफ इनोवेशंस कहती हैं. अनुराधा इस समय वोडाफोन में सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (ब्रांड कम्युनिकेशंस, इनसाइड्स ऐंड ऑनलाइन) हैं.
नायर ने एचयूएल में निचले पायदान से शुरुआत की. उन्होंने पुणे के सिम्बायसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस से 1995 में एमबीए करने के बाद मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर शुरुआत की. उन्होंने कंज्यूमर रिसर्च, सेल्स और मार्केटिंग विभागों में डव, ऐक्स, रेक्सोना, क्लोज-अप और पेप्सोडेंट के ब्रांड मैनेजर के तौर पर काम किया. फिर 2011 में कंपनी के डिटर्जेंट्स विभाग में कैटेगरी हेड बन गईं.
उनकी जिंदगी और करियर में एचयूएल का सबसे बड़ा योगदान क्या है? वे बताती हैं, ''इसने मुझे मेरे देश और मेरे उपभोक्ताओं के बारे में विनम्रता से सोचने की तमीज दी है.”
इस अनुभव ने नायर को समझ दिया कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स के लिए भारत के गांवों में भी बाजार है. नायर ने बताया, ''वे रोजाना फैब्रिक कंडिशनर भले ही इस्तेमाल न करें लेकिन कुछ लोग महीने में एक या दो बार तो इस्तेमाल करते ही हैं. आकांक्षाएं बदलने के साथ ग्राहक खुद को भी बदलने लगते हैं.”
एचयूएल देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी या उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनी है और उसके एक अरब डॉलर से अधिक के डिटर्जेंट कारोबार की मुखिया के नाते नायर इस वर्ग में कारोबार और बढ़ाने के लिए प्रोडक्ट को खास बनाने पर जोर दे रही हैं.
उनका कहना है, ''मैं प्रोडक्ट को खास बनाने के सफर में इस कारोबार को आगे बढ़ते देख रही हूं, लेकिन हमें सपनों और सच्चाई के बीच संतुलन भी रखना होगा.” अभी हाल ही में उन्होंने कंफर्ट वन रिन्स नाम से एक फैब्रिक कंडिशनर बाजार में उतारा है. कंपनी का दावा है कि इस प्रोडक्ट से कपड़ों की धुलाई में पानी कम खर्च होता है.
वास्तव में नायर लीक से हटकर ऐसी नई बातें सोचने के लिए जानी जाती हैं. एचयूएल में नायर के साथ एक दशक से ज्यादा समय तक काम कर चुकीं अनुराधा अग्रवाल उन्हें चैंपियन ऑफ इनोवेशंस कहती हैं. अनुराधा इस समय वोडाफोन में सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (ब्रांड कम्युनिकेशंस, इनसाइड्स ऐंड ऑनलाइन) हैं.
नायर ने एचयूएल में निचले पायदान से शुरुआत की. उन्होंने पुणे के सिम्बायसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस से 1995 में एमबीए करने के बाद मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर शुरुआत की. उन्होंने कंज्यूमर रिसर्च, सेल्स और मार्केटिंग विभागों में डव, ऐक्स, रेक्सोना, क्लोज-अप और पेप्सोडेंट के ब्रांड मैनेजर के तौर पर काम किया. फिर 2011 में कंपनी के डिटर्जेंट्स विभाग में कैटेगरी हेड बन गईं.
उनकी जिंदगी और करियर में एचयूएल का सबसे बड़ा योगदान क्या है? वे बताती हैं, ''इसने मुझे मेरे देश और मेरे उपभोक्ताओं के बारे में विनम्रता से सोचने की तमीज दी है.”

