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डार्क मोड

भरोसे का दूसरा नाम

बाजार के मुश्किल आर्थिक हालात में भी इस दिग्गज बैंकर के इरादे बुलंद हैं और इसकी वजह से उपभोक्ताओं का भरोसा बना हुआ है

अपडेटेड 10 सितंबर , 2013
शांति एकांबरम 25 साल पुराने दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि जब उन्होंने कनाडा के बैंक नोवा स्कॉटिया के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी, तब ब्याज दरों को लेकर वे अकसर उदय कोटक से उलझ जाती थीं. कोटक महिंद्रा बैंक के मौजूदा एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन उदय कोटक उस समय ब्रोकर कंपनी कोटक सिक्यूरिटीज के प्रमुख थे.

नोवा स्कॉटिया बैंक के साथ कुछ समय काम करने के बाद ही शांति के पास ड्यूश बैंक और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से ऑफर आ गए थे. वे कहती हैं, ''मैं महत्वाकांक्षी थी.” 

कोटक ने उन्हें कोटक महिंद्रा बैंक में काम करने के लिए राजी कर लिया. तब से एकांबरम इसी कंपनी के साथ हैं. उदय कोटक ने ईमेल से इंडिया टुडे ग्रुप की पत्रिका बिजनेस टुडे को बताया, ''वक्त के साथ शांति का पद और उनकी जिम्मेदारी बढ़ती गई. हमारे कॉर्पोरेट और निवेश बैंकिंग कारोबार को खड़ा करने में उन्होंने बहुत अहम भूमिका निभाई है.”
 
पचास वर्षीया शांति एकांबरम कोटक महिंद्रा बैंक में कॉर्पोरेट बैंकिंग की प्रेसिडेंट हैं और बैंक को सबसे ज्यादा मुनाफा उनके ही विभाग से होता है. वर्ष 2012-13 में कॉर्पोरेट बैंकिंग से प्रीटैक्स मुनाफा 21 फीसदी बढ़कर 1,211 करोड़ रु. पर पहुंच गया. बैंक का कुल प्रीटैक्स मुनाफा 1,972 करोड़ रु. था.

घूमने-फिरने में खासी दिलचस्पी रखने वाली एकांबरम बैंक की निवेश बैंकिंग शाखा की भी प्रमुख हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में तमाम दुश्वारियों से गुजर रहे इक्विटी और ऋण बाजार के दौर में भी इस विभाग के प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आई. वर्ष 2012-13 में इस शाखा का प्रीटैक्स मुनाफा दोगुना से भी ज्यादा बढ़कर 23.53 करोड़ रु. पर पहुंच गया था.

बैंक ऑफ अमेरिका जैसे चंद प्रतियोगी बैंकों की तरह एकांबरम सिर्फ गिने-चुने बड़े सौदों और धनी ग्राहकों पर नजर नहीं डालतीं. उनकी टीम लगातार नए क्षेत्रों से ग्राहकों को जोड़कर अपना दायरा बढ़ाने में जुटी रहती है. निवेश बैंकिंग इकाई ने 2012-13 में 16 शेयर बाजार सौदों को पूरा किया.

इनमें सार्वजनिक प्रतिष्ठानों—एनटीपीसी और स्टील अथॉरिटी ऑफ  इंडिया के शेयरों की बिक्री के साथ भारती इन्फ्राटेल, पीसी ज्वेलर, केयर रेटिंग्स और स्पेशिएलिटी रेस्टोरेंट्स के शुरुआती सार्वजनिक इश्यू (आइपीओ) शामिल हैं. ऋण बाजार में एकांबरम की सूझबूझ की बदौलत पीरामल हेल्थकेयर ने बॉन्ड के जरिए 1,800 करोड़ रु. और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी ने 1,000 करोड़ रु. जुटाए. इसके साथ ही उन्होंने विलय (मर्जर) और अधिग्रहण (एक्यूजिशन) से जुड़े 19 अहम सौदों को अंजाम तक पहुंचाया.

कौन-सी बात उन्हें दूसरों से अलग करती है? महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की स्पेन की कंपनी सीआइई ऑटोमोटिव के साथ हाल में हुए गठजोड़ के दौरान एकांबरम की कार्यशैली देख चुके महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर भारत दोशी कहते हैं, ''किसी व्यक्ति को समझा-बुझाकर राजी कर लेना एकांबरम की सबसे बड़ी ताकत है.”
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