इस वर्ष जब प्रदेश की सरकार से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक महाकुंभ के शानदार सफलतापूर्वक आयोजन के लिए अपनी पीठ थपथपाने की लगभग तैयारी कर चुके थे, तभी यह हादसा हो गया. 10 फरवरी को महाकुंभ के शाही स्नान मौनी अमावस्या के दिन इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 36 लोगों की जान चली गई और सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए. इसी के साथ लगभग 1,200 करोड़ रु. से ज्यादा के इंतजामों वाले महाकुंभ की तैयारियों की सारी पोल खुल गई.
मौनी अमावस्या के दिन भागदौड़ का सिलसिला कुंभ मेला क्षेत्र से ही शुरू हो गया था. शनिवार रात से ही मौनी अमावस्या स्नान शुरू होने पर संगम किनारे भीड़ जुटनी शुरू हो गई. आधी रात के बाद मेला पुलिस ने स्नान घाट को खाली कराने के लिए श्रद्धालुओं के बीच घोड़ा दौड़ाया, जिसके चलते कई बार भगदड़ की स्थिति बनी. कई श्रद्धालु घायल भी हो गए और एक की मौत हो गई. सेक्टर-12 में दलदल था, जिससे मौनी अमावस्या के समय नहीं ठीक कराया गया.
मौनी अमावस्या वाले दिन मेला प्रशासन इस बात से बिलकुल बेपरवाह था कि कितनी भीड़ शहर की तरफ जा रही है. इलाहाबाद जिला प्रशासन और पुलिस का पूरा ध्यान यातायात नियंत्रण में ही लगा हुआ था. इतनी भीड़ को रेलवे स्टेशन के अंदर जाने देने की बजाए कहीं और डाइवर्ट कराने के बारे में नहीं सोचा गया.
श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला अमावस्या के दो दिन पहले से ही शुरू हो गया था. मगर प्रशासन ने यह दूरदृष्टि नहीं दिखाई कि श्रद्घालु नहाने के बाद उसी दिन लौटना चाहेंगे. स्नान करने के बाद लाखों की संख्या में श्रद्घालु रेलवे स्टेशन पर जमा हो गए. कई ट्रेनें देरी से चल रही थीं. प्लेटफॉर्म खचाखच भर चुके थे. स्टेशन के भीतर भीड़ बढ़ती जा रही थी, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया कि स्टेशन के भीतर आ रहे लोगों के रेले को कुछ घंटों के लिए रोक दिया जाए. आखिरकार यह फैसला लिया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. पूरा रेलवे स्टेशन भगदड़ की चपेट में आ चुका था. लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर रहे थे.
लाशों के ऊपर से पैर रखकर भीड़ इधर-उधर भाग रही थी. लोग बदहवास अपने परिजनों को ढूंढ रहे थे. धीरे-धीरे मरने वालों की संख्या 36 और घायलों की संख्या 100 से भी ज्यादा हो गई. इस भगदड़ की वजह: रेलवे ने अचानक ट्रेन का प्लेटफॉर्म बदल दिया था. पहले उस ट्रेन को प्लेटफॉर्म नं. 2 पर आना था. ऐन वक्त पर यह बताया गया कि अब वह प्लेटफॉर्म नं. 6 पर आएगी. यात्री पुल के रास्ते भागे और पुल पर ही भगदड़ मच गई.
रेल मंत्री पवन बंसल के मुताबिक, यह दुर्घटना भारी भीड़ के कारण घटी. घटना के अगले ही दिन प्रदेश सरकार की तरफ से पंचायती राज मंत्री बलराम यादव, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने घटना स्थल का जायजा लिया और यह भरोसा दिलाया कि पीड़ितों की हर संभव मदद की जाएगी. मंगलवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घटना स्थल का दौरा किया और घायलों को देखने अस्पताल गए. उन्होंने इस घटना की जांच कराने की बात कही है.
यहां पर यह उल्लेखनीय है कि 2001 के महाकुंभ में जब श्रद्धालुओं का जन सैलाब स्नान करके रेलवे स्टेशन की टिकट खिड़की से लेकर प्लेटफॉर्म तक भरा हुआ था, तब तत्कालीन कमिश्नर सदाकांत ने उसी रात उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से बात करके यह कहा कि रेलवे स्टेशन को तत्काल यह घोषणा कर देनी चाहिए कि लोग बगैर टिकट ट्रेनों में बैठकर अपने गंतव्य को जाएं. ‘‘अगर ऐसा नहीं किया गया तो टिकट खिड़की पर जो हालत है, उससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती है. चाहे इन श्रद्धालुओं को आगे के किसी जनपद में ले जाकर इनका टिकट वगैरह बनवा लिया जाए, मगर अभी तत्काल इन्हें यहां से बाहर निकाला जाना आवश्यक है.’’ कुछ ही देर में रेलवे मंत्रालय के निर्देश जारी हो गए. उस बार भारी भीड़ के बावजूद कोई दुर्घटना नहीं हुई.
इलाहाबाद के पूर्व कमिश्नर रविंद्र नाथ त्रिपाठी, जिन्होंने 2007 में पिछले अर्द्धकुंभ का सफल आयोजन किया था, कहते हैं, ‘‘मेला क्षेत्र में बहुत भीड़ होती है. इसलिए मेला प्रशासन की प्राथमिकता यही होती है कि स्नान घाट को जल्द-से-जल्द खाली करा लिया जाए. जहां तक इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सवाल है तो समन्वय की कमी से इनकार नहीं किया जा सकता.’’
बहुजन समाज पार्टी की सरकार में मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र की तैनाती हो गई थी और सूबे में सरकार बदलने के बाद भी उनका तबादला नहीं किया गया. इस तरह से करीब वर्ष भर पहले से ही मणि प्रसाद मेले की तैयारी में जुटे थे, लेकिन यह दुर्घटना तो यही इशारा कर रही है कि पर्याप्त समय मिलने के बावजूद प्रशासन की तैयारियां एक सुरक्षित और सफल मेले के आयोजन के लिहाज से पर्याप्त नहीं थीं.

