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सूर्यनेल्ली बलात्कार: लौट आया पुराना जिन्न

नए खुलासों के साथ सूर्यनेल्ली बलात्कार मामले में घिरते नजर आ रहे राज्यसभा उपाध्यक्ष कुरियन.

कुरियन
कुरियन
अपडेटेड 11 मार्च , 2013

जब कभी भी सूर्यनेल्ली बलात्कार प्रकरण में राज्यसभा उपाध्यक्ष पी.जे. कुरियन के शामिल होने की बात गरमाई उनकी पार्टी कांग्रेस ने हमेशा उनका साथ दिया. इसलिए 31 जनवरी को जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े आरोपियों को बरी करने के फैसले को निरस्त किया तो पार्टी फिर उनके बचाव में खड़ी नजर आई. हालांकि पार्टी इस बार खुद को अटपटी स्थिति में पा रही है क्योंकि कुरियन के पक्ष की दलीलें नए खुलासों के सामने ढहती नजर आ रही हैं.

कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि रक्षामंत्री ए.के. एंटनी, जो कुरियन के मार्गदर्शक भी रहे हैं, ने 10 फरवरी के तिरुअनंतपुरम के दौरे के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें बताया कि 16 साल की लड़की के सामूहिक बलात्कार में कुरियन के शामिल होने का मामला महज इसलिए दुबारा गरमा गया है क्योंकि केरल कांग्रेस में गुटबाजी की जड़े गहराती जा रही हैं. जब यह घटना 1996 में सामने आई थी, तब एंटनी केरल के मुख्यमंत्री थे.

उन्होंने सोनिया को बताया कि कुरियन पुलिस की पड़ताल और कोर्ट में भी बेदाग ठहराए गए थे. लेकिन कुरियन को निर्दोष मानने में कांग्रेस का आत्मविश्वास कितना भी मजबूत क्यों न हो, फिलहाल चार अभियुक्तों के बयान में उनके नाम का जिक्र होने के बाद इस कहानी पर संदेह की लकीरें उभरने लगी हैं कि क्या कुरियन 19 फरवरी,1996 को 7 बजे के करीब कुमिली गेस्टहाउस के आसपास थे जहां कथित तौर पर 16 साल की लड़की का बलात्कार किया गया था? वैसे कुरियन हमेशा अपनी बात पर डटे रहे हैं कि कथित दिन और समय पर वह तिरुवल्ला में थे जो कुमिली से दो घंटे की दूरी पर है.

8 फरवरी को बलात्कार कांड का एकमात्र आरोपी एस.एस. धर्मराजन, जिसे सजा सुनाई गई थी और जो 2010 में जमानत पर छूटने के बाद फरार है, ने मलयाली टीवी चैनल को एक संगीन कहानी सुनाई, ''मैं 19 फरवरी,1996 को अपनी एंबेसेडर कार में कुरियन को बैठाकर कुमिली गेस्ट हाउस ले गया और लड़की के कमरे तक पहुंचाया.” धर्मराजन पेशे से वकील था. उसने आगे कहा कि मामले की पड़ताल में लगे विशिष्ट जांच दल (एसआइटी) का नेतृत्व कर रहे पुलिस अधिकारी सिबी मैथ्यू ने उस पर जांच अधिकारियों या कोर्ट के सामने कुरियन का नाम न लेने का दबाव डाला था.

धर्मराजन का बयान स्थानीय भाजपा नेता के. एस.राजन की ओर से एक दिन पहले दिए गए स्पष्टीकरण के बाद आया है. राजन उन तीन नेताओं में से हैं जिन्होंने कथित तौर पर करीब 7 बजे तिरुवला में कुरियन से उस दिन मुलाकात करनी थी जिस दिन कथित बलात्कार हुआ. उन्होंने कहा कि उस दिन सच में उनकी मुलाकात कुरियन से हुई थी, लेकिन दो घंटे पहले करीब 5 बजे. ''मैंने एसआइटी को उस समय भी बताया था कि हम कुरियन से शाम को 5 बजे मिले थे. मैं तत्कालीन एसआइटी प्रमुख सिबी मैथ्यू के खिलाफ मुकदमा करने जा रहा हूं.” 

कुरियन ने तिरुवला में अपने रहने के जिस विवादित समय का हवाला दिया था, 9 फरवरी को भी वह उस पर टिके रहे. कुरियन का दावा था कि जिस दिन बलात्कार हुआ, वह के.के. इडिकुला की विधवा आई. अन्नम्मा के तिरुवला स्थित घर में ही थे. लेकिन अन्नम्मा ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि उस दिन तो कुरियन छह बजे से पहले ही वहां से चले गए थे. इस पर कुरियन ने कहा कि अन्नम्मा इतनी बुजुर्ग हैं कि 17 साल पहले क्या हुआ, ठीक से याद नहीं रख सकतीं और खुद अन्नम्मा ने भी अपने बयान के अगले दिन ही कहा, संभव है कि उन्हें घटनाक्रम सही तरह से याद न हो. कुरियन विरोधी खेमे को यह कहने का मौका मिल गया कि अन्नम्मा पर अपने बयान को बदलने के लिए दबाव डाला गया.

कांग्रेस तब और भी अजीब सी स्थिति में आ गई जब एक खबरिया चैनल ने 8 फरवरी की उस टेलीफोन बातचीत को प्रसारित कर दिया जिसमें चार्ल्स अब्राहम एक तरह से उन्हीं बातों की पुष्टि कर रहे थे. चार्ल्स उन तीन नेताओं में से एक है जिन्होंने तिरुवला में कुरियन से मुलाकात की थी. टेप में अब्राहम अपने एक दोस्त से बातचीत में यह शेखी बघारते नजर आ रहे थे कि उन्होंने ही सबूतों से छेड़छाड़ कर कुरियन को यह सिद्ध करने में मदद की कि उस दिन वह कुमिली में नहीं थे. अब्राहम कहते हैं कि टेप से छेड़छाड़ की गई है.

अब दबाव कुरियन पर है, खास तौर पर इसलिए कि जब महिलाओं के खिलाफ  यौन अपराधों के अध्यादेश पर चर्चा होगी, संभव है कि वह राज्यसभा की अध्यक्षता कर रहे हों. जिस तरह सुप्रीम कोर्ट से मामले की फिर से सुनवाई के आदेश आने के बाद ही वाम दल कुरियन के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व भी कुरियन की कुर्सी लेने की जिद कर रहा है. इस तरह के हालात में 21 फरवरी को जब संसद का बजट सत्र शुरू होगा, कांग्रेस को सदन में भारी हंगामे का सामना करना पड़ेगा. कुरियन सोनिया गांधी और उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी, दोनों को पत्र लिखकर खुद को बेगुनाह बता चुके हैं.

दूसरी ओर, संसद के बाहर एक अलग तरीके का विवाद उठ खड़ा हुआ है. केरल हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज आर. बसंत को एक खबरिया चैनल से 9 फरवरी को रेप-पीडि़ता के बारे में यह कहते हुए शूट कर लिया कि 'वह तो बाल वेश्या’ है, जिसने आरोपी के साथ सहमति से संबंध स्थापित किए. आर. बसंत वही जज हैं जिन्होंने 2005 में इस मामले में एक को छोड़कर सभी आरोपियों को बरी कर दिया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनके फैसले को खारिज कर दिया.

महिला संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए बसंत से माफी मांगने को कहा और केरल सरकार से मांग की कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के पैनल से हटाया जाए. राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष, सीपीएम के वी.एस. अच्युतानंदन ने महिलाओं से यहां तक कह दिया कि उन्हें तो इस टिप्पणी के लिए बसंत को तमाचा लगाना चाहिए. इसी तरह, प्रवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री व्यालार रवि ने भी महिलाओं को खासा नाराज कर लिया है. 11 फरवरी को जब महिला रिपोर्टर ने कुरियन पर लगे आरोपों के बारे में रवि से पूछा तो उन्होंने रिपोर्टर से सवाल कर डाला, आप उनके ''पीछे क्यों पड़ी हैं, क्या कभी उन्होंने आपको परेशान किया?’’ फिर जो हंगामा बरपा कि मंत्री महोदय को माफी मांगनी पड़ी.

केरल सरकार अब भी कुरियन का बचाव कर रही है और हाल के तमाम खुलासों को नकार रही है. राज्य के गृहमंत्री तिरुवंचुर राधाकृष्णन और अभियोजन महानिदेशक टी. आसफ अली ने कहा कि जिन आरोपों को हवा दी जा रही है, उनसे जुड़े खुलासों में कोई दम नहीं. साथ ही ये दोनों पूर्व में केरल हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से कुरियन को मिली क्लीन चिट का जिक्र करना भी नहीं भूलते. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह 2007 के अपने ही फैसले को 31 जनवरी को पलट दिया, उससे तय है कि घेरे में आए कुरियन और कांग्रेस के लिए मुश्किलें खत्म तो नहीं ही हुई हैं.

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