धर्मनगरी पुष्कर के बाजार में घूमते समय यहां दुकानों पर कोई अजनबी भाषा लिखी दिखे तो चौंकिए मत. यह हिब्रू या अरबी भाषा है. तमाम ऐसे रेस्तरां भी हैं, जहां चाय पीने जाएं तो मेन्यू कार्ड पर भी यही भाषा मिलेगी. पिछले पांच साल से पुष्कर इज्राएली पर्यटकों का मुख्य केंद्र बना हुआ है. ये पूरे साल भारत आते रहते हैं. सितंबर से अप्रैल तक तो यहां बढ़ी संख्या में इज्राएली पर्यटक रहने लगे हैं. गुप्तचर विभाग को इनका पूरा रिकॉर्ड रखना पड़ता है. 2012 में 14,300 इज्राएली पर्यटक पुष्कर आए.
इन पयर्टकों की बढ़ी संख्या को देखते हुए होटल उद्योग ने भी कमर कसी. हिब्रू और अरबी भाषा में बैनर/कार्ड तो तैयार करवाए ही, खास यîदी भोजन परोसने के लिए दिल्ली से बावर्ची तक बुलाए जाने लगे. हिब्रू बोलना सीख चुके पायल रेस्तरां के मालिक किशन शर्मा ने अपने यहां जब से यहूदी बावरची बुलाया है, वहां हर वक्त पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है. ओम शिवा रेस्तरां के मालिक रवि रावत, खुशी से चहकते हुए बताते हैं, ''इज्राएली पर्यटकों को जीना आता है. वे खर्च करने में कंजूसी नहीं करते. अपनी संस्कृति और खानपान के बीच उन्हें यहां और भी आनंद आता है.
29 वर्षीया नेहोराइ को ही लीजिए. वे हर साल पुष्कर आती हैं. उन्हीं के शब्दों में, ''यहां बड़ा सुकून मिलता है. मुझे यहां खास तौर पर डूबते सूरज को देखना अच्छा लगता है.” इज्राएल के एक और सैलानी डेनियल को वैसे यहां गर्मी लगती है पर यह जगह उन्हें पसंद है. सर्दियां यहां बिताने के बाद गर्मियों में ये पर्यटक हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला या मनाली चले जाते हैं.
इज्राएली नागरिकों के भारत आने का सबसे बड़ा कारण छुट्टिïयां बिताना ही है. पर्यटकों से बातचीत का लब्बोलुबाब यही है कि वे कड़ी मेहनत करते हैं, ऐसे में छुट्टिïयों में मौज-मस्ती जरूरी हो जाती है. डेनियल की मानें तो ''20 से 30 की उम्र के ज्यादातर इज्राएली साल में एक बार घूमने जरूर निकलते हैं. पुलिस के मुताबिक, ये अनुशासित होते हैं और कानून नहीं तोड़ते.” हाल ही में स्थानांतरित उपखंड मजिस्टे्रट निशू अग्निहोत्री के शब्दों में, ''आज की तारीख में भी पुष्कर में यही कोई 2,000 इज्राएली सैलानी हैं पर उनसे कानून-व्यवस्था की कहीं कोई समस्या खड़ी होने की कोई खबर नहीं है.” पर इन सैलानियों के नशे की लत अपनाने के वाकए जरूर देखे गए हैं.
दसेक साल पहले तक पुष्कर में इज्राएली सैलानियों की तादाद अमूमन दूसरे देशों से आने वाले पर्यटकों जितनी ही हुआ करती थी. तब इनका मुख्य आकर्षण गोवा हुआ करता था. यहां पर यîदी सामुदायिक भवन खबाद की स्थापना होने से इनकी संख्या बढऩे लगी. इसे देखते हुए बाद में खबाद को मुख्य बस स्टैंड के पास एक बड़े होटल में स्थानांतरित किया गया. वहां यहूदी धर्म गुरु रब्बी को भी बुलाया गया. खबाद में गैर-इज्राएलियों को जाने की अनुमति नहीं है. गोवा में खबाद 2009 में बंद होने और हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश वगैरह में सख्ती के बाद तो पुष्कर जैसे इज्राएली सैलानियों का मुख्य अड्डा ही बन गया. यहां का खबाद अब भारत का सबसे बड़ा खबाद बन गया है. कई बार तो एक समय पर इज्राएली सैलानियों की तादाद यहां 4,000 तक पहुंच जाती है.
यहूदी गुरु आर्यव बताते हैं कि खबाद एक सुधार केंद्र की तरह काम करता है. इज्राएल में किसी के लिए भी युवावस्था में सैन्य प्रशिक्षण लेना जरूरी है. प्रशिक्षण के बाद युवा मस्ती पर पैसे खर्च करने के लिए भारत को उपयुक्त जगह मानते हैं. इन्हीं में से नशा वगैरह करने वाले युवाओं को सुधारने के लिए खबाद खोला गया है, जिससे कि वे अपनी संस्कृति को भूल न सकें. पर इन दावों के बावजूद बहुत-से इज्राएली पर्यटक रेव पार्टियां वगैरह करते रहते हैं. इसी को देखते हुए स्थानीय पुरोहितों में इन पर अंकुश लगाने की भी मांग शुरू हो गई है.
खैर, पर्यटकों की आवक बढऩे से होटलों और दूसरे लोगों को तो फायदा हुआ है पर प्रशासन और गुप्तचर विभाग के लिए यह बढ़ती संख्या सिरदर्द बनने लगी है. पाकिस्तानी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने 2011 में अमेरिका में पकड़े जाने के बाद बताया था कि 2008 में मुंबई पर हमले से पहले उसने पुष्कर में रहकर यहां के खबाद की रेकी की थी. वह खबाद के ठीक सामने वाले होटल में ठहरा और यहां का पूरा नक्शा तैयार किया. इस खुलासे से गुप्तचर विभाग भी सकते में था क्योंकि हेडली के पुष्कर में रहने के बावजूद उसके ऐसे कोई दस्तावेज मिले ही नहीं. इसके बाद होटल मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और खबाद को उच्च श्रेणी की विशेष सुरक्षा दी गई.
खुफिया ब्यूरो, मिलिटरी इंटेलिजेंस, सीबीआइ और राजस्थान आतंक निरोधी दस्ते समेत देश की पांच विभिन्न एजेंसियों ने खबाद का मुआयना करके आपात कार्यक्रम भी बनाए. राज्य सरकार ने वहां 24 घंटे सशस्त्र पुलिस तैनात की. अग्निहोत्री ने पिछले दिनों खबाद प्रबंधकों से इसे पुष्कर से बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए. होटल मालिक को खबाद की लीज नहीं बढ़ाने को कहा गया. अग्निहोत्री के अनुसार, ''यह सुरक्षा का मसला है और खबाद की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने जरूरी हैं. पुष्कर पशु मेले के दौरान यहां भारी सुरक्षा करनी पड़ती है और उस पर खबाद की सुरक्षा हमारे लिए एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है.” दुनिया भर में यहूदियों के खिलाफ आतंकवाद की घटनाओं को देखते हुए पुष्कर में सुरक्षा जरूरी हो गई है. खबाद पर सशस्त्र पुलिस और गुप्तचरों की नियमित ड्यूटी होती है. फिर भी कोई घटना होती है तो इसका असर धार्मिक नगरी पर पड़ेगा, क्योंकि खबाद पुष्कर के बीचोबीच बना है.
पिछले दिनों खबाद के पास बने केंद्र्रीय बस अड्डे को भी दूसरी जगह ले जाया गया, जिससे कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही में थोड़ा फासला बने. इज्राएली पर्यटकों की बढ़ी आवक ने पुष्कर कस्बे को नया रोजगार दिया है पर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब उतना ही संवेदनशील भी बना दिया है.

