मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में वसंत पंचमी जैसे-तैसे गुजर ही गई. यहां शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी. उसका आमना-सामना हिंदूवादी संगठनों से था. भोजशाला में प्रवेश के मुद्दे पर हिंदू संगठनों को काबू में करने के लिए पुलिस को कई दफा बल प्रयोग के साथ आंसू गैस के गोले भी छोडऩे पड़े.
विवाद नमाज को लेकर भी खड़ा हुआ. प्रशासन का तो दावा है कि नमाज पढ़ी गई, वहीं मुसलमानों ने इससे साफ इनकार किया है. शहर काजी वकार सादिक ने इंडिया टुडे को बताया, ''हमें बस में ले जाया गया था लेकिन नमाज नहीं पढऩे दी गई. हमारे साथ धोखा किया गया. कंट्रोल रूम से 58 लोगों को बस में बिठाकर भोजशाला ले जाया गया. उस वक्त पूरी मस्जिद खाली थी. फिर भी हमें नमाज की इजाजत नहीं दी गई. प्रशासन चाहता था कि हम नमाज कमाल मौला की दरगाह के पास पढ़ें पर हमने मना कर दिया. इसके बाद हमें वापस छोड़ दिया गया. इस मसले को लेकर अब हम कोर्ट जाएंगे.”
हिंदुओं को परिसर में सामने के दरवाजे से लाया गया. मुसलमान करीब 800 की तादाद में जुटे थे, जिनमें से 58 को ले जाया गया. सुरक्षा की कमान संभालने वाली आइ.जी. अनुराधा शंकर की मानें तो, सुबह से शाम तक करीब 50,000 लोगों ने भोजशाला में पूजा की. ''स्थिति को काबू में रखने के लिए हमें हल्के बल प्रयोग की जरूरत पड़ी. कुल मिलाकर स्थिति काबू में रही. दोनों ही समुदाय के लोगों ने इसमें शिरकत की.” नमाज अदा न होने के दावे पर एसपी सुशांत सक्सेना कहते हैं, ''कई तरह के लोग हैं और वे अपने-अपने दावे कर रहे हैं.”
कुल 5,400 पुलिस जवानों के अलावा 10 कंपनी एसएएफ, दो कंपनी एसटीएफ, चार कंपनी आरएएफ, 250 प्रशिक्षु जवान और एसपी स्तर के 10 अफसर मौके पर तैनात थे. पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग के साथ सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे. प्रशासन ने पोस्टर और ऑटो वगैरह के माध्यम से लगातार शांति की अपील भी की थी. उसके बार-बार आग्रह के बावजूद भोज उत्सव समिति और दूसरे हिंदूवादी संगठन वसंत पंचमी पर सूर्यादय से सूर्यास्त तक भोजशाला के अंदर पूजा की मांग पर अड़े रहे. वे तैनाती कम किए जाने की मांग कर रहे थे. भारी तैनाती के चलते सुबह काफी देर तक हिंदू संगठनों से जुड़े लोग पूजा के लिए अंदर नहीं गए पर आमजन जाते रहे. करीब 11 बजे जुलूस की शक्ल में हजारों लोग पहुंचे और देर तक मुख्य गेट के सामने नारेबाजी करते रहे. परिसर खाली कराने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा, आंसू गैस के गोले भी छोड़े. तनाव की स्थिति बन गई. नमाज के बाद कम ही लोग पूजा के लिए अंदर गए.
भोज उत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक जैन का शिकवा है, ''पुलिस और प्रशासन ने हमारे साथ अन्याय किया. हमें पूजा, आरती कुछ भी नहीं करने दी गई. हमारे करीब 70 लोग घायल हुए हैं. हमने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया.” कुंभ के सभी अखाड़ों से प्रतिनिधि बनाकर भेजे गए काशी सुमेरु पीठ के शंकाराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती को वसंत पंचमी की रात पुलिस ने इंदौर में ही रोके रखा. शुक्रवार को धार की ओर बढऩे पर रास्ते से ही उन्हें ओंकारेश्वर की तरफ भेज दिया गया.
कोई बड़ी घटना न होने से प्रशासन ने भी अंतत राहत की सांस ली. उसका दावा था कि वह वसंत पंचमी पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के आदेश को लागू करवाने में कामयाब रहा. एएसआइ ने सरकार को भेजे दिशानिर्देश में 14 फरवरी को पूरे दिन हिंदुओं को पूजा करने की छूट दे रखी थी. प्रवेश की छूट 15 फरवरी (शुक्रवार) को भी थी. नमाज दोपहर एक से तीन बजे तक पढ़वाई जा सकती थी. हिदायत यह भी थी कि पूजा के लिए एक बार में 500 लोगों को ही परिसर में प्रवेश दिया जाए.

