प्राकृतिक आपदा के बाद अब सरकारी व्यवस्था भी बुंदेलखंड के किसानों के लिए आपदा बनकर आई है. गत दो सालों से यहां के किसानों को सरकारी बीज एजेंसियों द्वारा दिए जा रहे बीजों ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है. उड़द और चने का बीज जो खेतों में डाला गया, वह अंकुरित ही नहीं हुआ. पहले ही तंगहाली से जूझ रहे किसानों को फसल बर्बाद होने के बाद राहत के नाम पर सिवाय सरकारी वायदों के कुछ नहीं मिला.
इस साल सहकारी बीज केंद्र से खरीदे गए बीजों से फसल न उगने के कारण झंसी समेत बुंदेलखंड के करीब 10,000 किसान बर्बादी की कगार पर हैं. ललितपुर जिले के ककडारी गांव के किसान प्रीतम राजपूत ने 1,600 रु. में 40 किलो चने का बीज तालबेहट ब्लॉक से खरीदा था. लेकिन पूरे खेत की निराई-गुड़ाई के बाद जब उसे बोया गया तो वह खेत में अंकुरित ही नहीं हुआ. उन्होंने इसकी शिकायत की, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं.
ककडारी गांव के ही किसान जगत सिंह ने भी तालबेहट के एक साहूकार से 5 प्रतिशत ब्याज पर रु. लेकर 40 कुंतल चने का बीज खरीदकर खेतों में बोया, लेकिन फसल नहीं फूटी. इस नुकसान ने उनके पूरे परिवार को एक बार फिर आर्थिक तंगी के मुहाने पर लाकर खड़ा किया है. झांसी जिले के भडरा गांव के अखिलेश तिवारी ने भी दो साल पहले उड़द का बीज सहकारी बीज गोदाम से खरीदा था, जो पैदा ही नहीं हुआ. अखिलेश को इसका मुआवजा भी नहीं मिला था कि दूसरी बार चने के बीज ने धोखा दे दिया. इस बार उन्होंने साहूकार से ब्याज पर रुपए लेकर 25 कुंतल चने का बीज खरीद कर बोया है, लेकिन फिर वही आशंका सता रही है.
अब तक बुंदेलखंड में खराब सरकारी बीजों के कारण 10,000 से ज्यादा किसान बर्बाद हो चुके हैं. जब प्रदेश सरकार ने एक जांच समिति गठित कर बुंदेलखंड का दौरा किया तो समिति ने बीज एजेंसियों द्वारा घटिया बीज दिए जाने की पुष्टि की और नुकसान का आंकलन कर मुआवजा दिए जाने की बात भी कही. लेकिन किसान नेता इसे क्षतिपूर्ति के नाम पर किसानों के साथ ठगी ही बता रहे हैं. पिछले साल भी उड़द के नकली बीजों से फसल बर्बाद होने पर सरकार ने किसानों को मुआवजा देने का भरोसा दिया था.
मुआवजे की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दे रहे किसानों को अब तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला है. किसान नेता राकेश टिकैत कहते हैं, ''केंद्र और राज्य सरकार की टीमों के नकली बीज की पुष्टि करने के बाद कृषि विभाग के प्रमुख सचिव संजय अग्रवाल ने आदेश जारी कर यूपी एग्रो, पीसीएफ सहकारिता, बीज विकास निगम को नकली बीज दिए गए किसानों को 2,000 रु. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से क्षतिपूर्ति करने के लिए कहा, लेकिन किसानों को अब तक कोई मदद नहीं मिली है.''
किसानों को हुए नुकसान पर पहले केंद्र सरकार और फिर राज्य सरकार ने भी जांच कराई. जिलाधिकारियों की टीम ने राजस्व विभाग की टीम से भी जांच कराई, जिसमें पाया गया कि ललितपुर जिले में बीज विकास निगम ने गत वर्ष 4,532 किसानों को बीज दिया था, जिसका मुआवजा 73,74,000 हजार है, लेकिन किसानों को अब तक एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी गई है.
इस साल भी स्टेट फार्म कोऑपरेशन इंडिया ने जो 600 कुंतल चने का बीज वितरित किया, वह अंकुरित ही नहीं हुआ. झांसी के कृषि डायरेक्टर हरनाथ सिंह कहते हैं, ''उड़द और चने के खराब बीज देने को लेकर जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है. जांच में अमानक बीज से किसानों को हुए नुकसान की पुष्टि हुई है. किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है. ''

