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राजस्थान: जलमहल घोटाले में बचते कब तक?

जयपुर में हुए 10,000 करोड़ रु. के जलमहल घोटाले के सिलसिले में बड़े जौहरी नवरतन कोठारी को इंदौर में आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया. जयपुर के जिला मजिस्ट्रेट ने 9 जनवरी को गिरफ्तारी वारंट जारी किया था.

जौहरी नवरतन कोठारी
जौहरी नवरतन कोठारी
अपडेटेड 26 जनवरी , 2013

जयपुर में हुए 10,000 करोड़ रु. के जलमहल घोटाले के सिलसिले में बड़े जौहरी नवरतन कोठारी को इंदौर में आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया. जयपुर के जिला मजिस्ट्रेट ने 9 जनवरी को गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. इंदौर पुलिस ने शहर में कोठारी के होने की खबर मिलने के बाद 17 जनवरी को उन्हें गिरफ्तार किया. कोठारी वहां जलमहल रिसॉर्ट्स के महाप्रबंधक राजीव लुंकड़ के पिता विनय लुंकड़ की अंत्येष्टि में शामिल होने गए थे. जलमहल रिसॉर्ट्स ही वह कंपनी है जिसे राजस्थान सरकार ने ऐतिहासिक स्मारक जलमहल, मान सागर झील और उसके आसपास की 3,500 करोड़ रु. की जमीन को महज ढाई करोड़ की सालाना दर से अगले 99 साल के लिए बेच दिया है. इंडिया टुडे  ने इस घोटाले को उजागर करती कई रिपोर्ट छापी हैं.

इस प्रोजेक्ट में मुंबई स्थित कल्पतरू समूह के अरबपति मफतराज मुणोत बराबर के हिस्सेदार हैं. मुणोत के राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से करीबी रिश्ते हैं और गहलोत कोठारी के कार्यक्रमों में अकसर जाते रहे हैं. सरकार ने मुणोत और कोठारी को मान सागर झील में पानी कम करने का मौका दिया जिससे वे प्रस्तावित होटल और व्यावसायिक परिसर के लिए पर्याप्त जमीन का दावा कर सकें. टेंडर की शर्तों के खिलाफ जाकर इन दोनों को तमाम रियायतें दी गईं.

राजस्थान हाइकोर्ट ने इससे पहले कोठारी के गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने भी गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ  एक अपील खारिज कर दी थी. हाइकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झील, महल और जमीन की बिक्री और पट्टे को रद्द कर दिया था और राज्य सरकार को इस मामले में विश्वासघात का दोषी बताया था. पिछले साल भी राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट पर कार्रवाई नहीं की थी. इंदौर पुलिस ने जब कोठारी को पकड़ा तो राजस्थान पुलिस को इंदौर जाना ही पड़ा. और जयपुर लाने पर कोठारी को कोर्ट में पेश करने के जयपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को किनारे रखते हुए पुलिस ने उन्हें लेकर सीधे एसएमएस अस्पताल के आइसीयू में भर्ती करा दिया, जिससे कि उन्हें जेल न जाना पड़े.

जलमहल घोटाले को उजागर करने वाले वकील अजय जैन ने इंडिया टुडे को बताया, ''यह शर्म की बात है कि सोली सोराबजी और भारत के अटॉर्नी जनरल गुलाम वाहनवती सरीखे नामी वकीलों की सेवाएं लेकर मुख्यमंत्री गहलोत आरोपियों को बचाने की मिलीभगत कर रहे हैं. '' जैन पूछते हैं कि राजस्थान पुलिस आखिर गिरफ्तारी वारंट पर अमल क्यों नहीं कर रही?

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