scorecardresearch
डार्क मोड

मुलायम सिंह यादव: खफा-खफा से क्यों हैं सरकार

मंत्री और अफसरों की लापरवाही की शिकायत मिलने पर अपने गुस्से को रोक नहीं पा रहे नेताजी.

अपडेटेड 27 जनवरी , 2013

गत 12 जनवरी को समाजवादी पार्टी के 19, विक्रमादित्य मार्ग स्थित कार्यालय में दोपहर दो बजे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव मीटिंग  करके बाहर निकलते हैं और बाहर लॉन में बैठे फरियादियों को देख उनके बीच पहुंच जाते हैं. वे फरियादियों से पूछते हैं,  “सपा सरकार के मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों से कोई परेशानी तो नहीं?” कुछ देर के लिए सन्नाटा छा जाता है. फिर एक व्यक्ति भीड़ चीकर सामने आता है और रुंधे गले से कहता है कि सपा सरकार में मंत्री और रमाबाईनगर के रसूलाबाद से विधायक शिव कुमार बेरिया ने व्यक्तिगत रंजिश के चलते उस पर तमाम मुकदमे दर्ज कराए हैं.

मुलायम उससे पूरी बात कागज पर लिखकर देने को कहते हैं. फरियादी सकपकाता है. मुलायम उसे डांट देते हैं. फिर लिखित दरख्वास्त पढ़कर मुलायम गुस्से से कहते हैं, “बताओ, बेरिया ऐसा कर रहा है?” इसके बाद तो मंत्री, विधायकों और अधिकारियों की शिकायतों का सिलसिला ही शुरू हो जाता है.

इस घटना के दो दिन बाद 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर अपने पैतृक गांव सैफई में 225 करोड़ रु. की विकास योजनाओं के शिलान्यास के मौके पर मुलायम सिंह ने अपने साहबजादे अखिलेश यादव के कामकाज पर ऐसी चाबुक फटकारी कि सभी हक्के-बक्के रह गए. वे बोले, “प्रदेश की सरकार तो अधिकारी चला रहे हैं.” नेताजी ने सुस्त मंत्रियों को ताकीद करते हुए यहां तक कह दिया कि सुधर जाएं, नहीं तो और भी विकल्प मौजूद हैं. पिछले साल 11 नवंबर को आगरा में  मुलायम सिंह ने कहा था, “जो लोग बदलाव की बात करते हैं उन्हें लोगों की रोटी, कपड़ा, मकान की जरूरतें पूरी करनी चाहिए.” और 31 जुलाई को लखनऊ में भी सरकार के कामकाज पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,  “सरकार अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पा रही है.”

सवाल यह है कि आखिर मुलायम सिंह को अपने ही बेटे की सरकार के कान बार-बार क्यों उमेठने पड़ रहे हैं? असल में गत वर्ष मार्च में प्रदेश में सपा सरकार बनते ही मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा चुनाव में 60 सीटें जीतने का लक्ष्य तय करते हुए तैयारियों की कमान खुद संभाल ली है.

गत अप्रैल माह के अंत में सपा सरकार के मंत्रियों को संबोधित करते हुए मुलायम ने पांच साल के विकास कार्य अगले दो वर्ष में ही पूरा करने का आह्वान किया था, लेकिन हकीकत यह है कि  पहला वित्तीय वर्ष बीतने में दो माह बाकी हैं और स्वास्थ्य, परिवहन, समाज कल्याण, पंचायती राज, बेसिक शिक्षा जैसे कई विभागों ने अब तक निर्धारित बजट के आधे से कुछ ज्यादा ही खर्च किया है. पूर्व निर्धारित तमाम योजनाएं शुरू नहीं हो पाई हैं और जो शुरू हुईं, वे लोकप्रिय नहीं हो पा रहीं. नेताजी को कार्यकर्ताओं से मिल रहे फीडबैक से साफ है कि सपा कार्यकर्ता परेशान है. मंत्री और अधिकारी कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दे रहे हैं. इन वजहों ने अगले लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बनने का सपना संजोए मुलायम सिंह की नींद हराम कर रखी है.

सपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्य सभा सदस्य नरेश अग्रवाल कहते हैं, “जब नेताजी ने गलती देखी होगी, तभी ये बातें कही हैं. लेकिन मेरा मानना है कि नेताजी गलती बताने की बजाय कार्रवाई करते तो बेहतर होता.” हालांकि शहरी विकास मंत्री आजम खान की राय कुछ भिन्न है. वे कहते हैं, “विधानसभा चुनाव के बाद से नेता जी की गॉडफादर किस्म की पर्सनैलिटी उभर रही है. यह गॉडफादर की पार्टी को नसीहत है. अगर किसी को लगता है कि इससे जनता में गलत संदेश जाएगा तो मुगालता है. लोग नेताजी की इस अदा को पसंद कर रहे हैं.”

पार्टी सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल का बड़ा सिलसिला शुरू हो सकता है. हालांकि बावजूद इसके विपक्षी दल  नेताजी को बख्शने के मूड में कतई नहीं हैं. बीएसपी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अंबेट राजन सवाल करते हैं, “जो नेता अपने मंत्रियों का मन नहीं समझ पा रहा, वह जनता का मन क्या समझेगा.”

ADVERTISEMENT
Advertisement