बारह साल पुराने जूनियर बेसिक ट्रेंड शिक्षक (जेबीटी) भर्ती घोटाले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोक दल (आइएनएलडी) के अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला सहित 55 लोगों की गिरफ्तारी से हरियाणा की राजनीति में नया उबाल आ गया है. इस घटनाक्रम से पहले तक आइएनएलडी आक्रामक था और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार बैकफुट पर.
अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब हुड्डा सरकार को यह साबित करने में दांतों पसीना आ रहा था कि पूर्व राज्यमंत्री गोपाल गोयल कांडा की करतूतों से उसका कोई वास्ता नहीं है और यह उनका निजी मामला है. इससे पहले राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्र मोहन उर्फ चांद मोहम्मद की फिजा (अब दिवंगत) के साथ मुहब्बत भी हुड्डा सरकार के लिए कम सिरदर्द साबित नहीं हुई थी. लेकिन कांग्रेस के जहां मुहरे पिटे थे, वहीं दिल्ली की सीबीआइ अदालत के फैसले से आइएनएलडी के तो सीधे बादशाह और वजीर ही पिट गए.
दरअसल चौटाला परिवार के इन दुर्दिनों की नींव पड़ी थी, 1999-2000 में. तब हरियाणा में बंसीलाल की सरकार ने जेबीटी शिक्षकों की जगह निकाली. भर्र्ती करने का काम हरियाणा राज्य सेवा आयोग को सौंपा गया. लेकिन इस बीच सरकार बदल गई और चौटाला मुख्यमंत्री बन गए. चौटाला सरकार ने यह काम आयोग से लेकर प्राथमिक शिक्षा विभाग को सौंप दिया. अदालत ने पाया कि इस दौरान खुद चौटाला और उनके पुत्र अजय ने अफसरों के साथ मिलीभगत कर या उन पर दबाव बनाकर मनमाने तरीके से चयनित शिक्षकों की सूची जारी की. सीबीआइ के आरोप पत्र के मुताबिक एक शिक्षक से 2 से 4 लाख रु. तक की घूस ली गई.
दोष साबित होने के बाद अदालत ने चौटाला पिता-पुत्र को जिस तरह तिहाड़ जेल भेजा, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों को दो साल से ज्यादा की सजा हो सकती है. गिरफ्तारी के बाद पार्टी की जिम्मेदारी अचानक चौटाला के छोटे बेटे और एलनाबाद से विधायक अभय के कंधों पर आ गई. वे तुरंत चंडीगढ़ से दिल्ली पहुंचे और मीडिया से कहा, ''सीबीआइ पूरी तरह कांग्रेस के इशारे पर काम कर रही है. फैसले को ऊपरी अदालतों में चुनौती देंगे.”
उन्होंने यह भी कहा, ''पार्टी संकट की घड़ी में पूरी तरह एकजुट है.” ऐसे मौके पर पार्टी को कौन संभालेगा? इस सवाल पर थाणेसर से विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा, ''पूरा संगठन पार्टी चलाता है. फिलहाल अभय चौटाला और मैं पार्टी का कामकाज संभालेंगे.” क्या पार्टी की चुनावी तैयारियों पर इस गिरफ्तारी का असर नहीं पड़ेगा? इस सवाल पर अरोड़ा ने कहा, ''सब कांग्रेस की चाल है. ओम प्रकाश चौटाला ही पार्टी के नेता हैं और उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा.”
उधर हुड्डा ने 'कानून अपना काम कर रहा है’, वाला जुमला मीडिया के सामने उछालकर चुप्पी साध ली. कांग्रेस यह मानकर चल रही है कि चौटाला के गर्दिश में पडऩे से हुड्डा जाटों के लिए एकमात्र विकल्प बनकर उभरेंगे. वहीं भ्रष्टाचार में फंसने के कारण अब आइएनएलडी बीजेपी के लिए अछूत हो जाएगी.
कांग्रेस तीसरी विपक्षी पार्टी यानी कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों को पहले ही हड़प चुकी है. राज्य में अचानक बने इस सियासी माहौल ने पौष के महीने में ही कांग्रेस को आने वाले वसंत का एहसास करा दिया है. वैसे यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर हुड्डा जाट हैं तो चौटाला भी कोई कम जिद्दी जाट नहीं हैं. वैसे भी ताऊ देवीलाल के वारिसों से पार पाना इतना आसान नहीं है.

