अजित सिंह को वक्त के हिसाब से चलना और मौके को अपने हित में इस्तेमाल करना बखूबी आता है. यूपीए सरकार को समर्थन के बदले में उन्हें नागर विमानन मंत्रालय मिला तो 73 वर्षीय जाट नेता ने इस महकमे को ही अपने सांसद पुत्र जयंत चौधरी का लांचिग पैड बना डाला. बहाना है पश्चिमी इलाके का विकास.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में राजनैतिक रसूख रखने के साथ ही इस इलाके के जाटबहुल जिलों में जयंत की गहरी पैठ बने, इसके लिए अजित ने मेरठ में प्रतापपुर हवाई अड्डे के विकास के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) से प्रस्ताव आगे बढ़ाया और इसके लिए यूपी सरकार को वे हवाई अड्डे के विकास और रनवे के लिए 427 एकड़ अतिरिक्त भूमि का हस्तांतरण करने की बाबत कई चिट्ठियां लिख चुके हैं. इस बारे में 26 अप्रैल को पूरा मास्टर प्लान राज्य सरकार को भेजा गया था. इसके अलावा अजित के फोकस में आगरा, मथुरा भी है. मथुरा के पास वृंदावन के लिए दिल्ली से हेलिकॉप्टर सेवा 28 नवंबर को ही शुरू की गई है. इसे वृंदावन से नागर विमानन मंत्री के पुत्र जयंत चौधरी ने ही झंडी दिखाकर रवाना किया. इससे पहले आगरा हवाईअड्डे पर लगे यांत्रिक विमान अवतरण प्रणाली (आइएलएस) को शुरू करने की पहल जब आगरा के कुछ उद्यमियों ने अजित से की, तो उन्होंने छुट्टी का दिन होने के बावजूद 10 नवंबर (शनिवार) को ही डीजीसीए से कहकर इसे चालू करवा दिया. इस सिस्टम के शुरू होने से धुंध में भी विमान के उतरने में आसानी होती है, लेकिन पिछले साल लग जाने के बाद भी आइएलएस प्रणाली धूल खा रही थी.
इंडिया टुडे से बातचीत में अजित सिंह कहते हैं, ‘‘पर्यटन के लिहाज से आगरा को देश के दूसरे हिस्सों से भी जोडऩे की जरूरत है, लेकिन एयरफोर्स का हवाई अड्डा होने की वजह से विमानों की आवाजाही पर असर पड़ता है, क्योंकि वहां रात में विमान नहीं उतरने दिया जाता है और कभी भी पूर्व सूचना के बिना जहाजों को दिशा मोडऩे के लिए कह दिया जाता है. साथ ही यात्रियों को एयरफोर्स के सख्त चेक प्वाइंटस से गुजरना पड़ता है, बैठने की सुविधा नहीं होती. जिसे देखते हुए मैंने रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी से बगल में अलग स्ट्रिप बनाने की इजाजत मांगी. इसके लिए उन्होंने तो हामी भर दी, लेकिन 2-3 महीने बाद भी 60 एकड़ जमीन के लिए यूपी की अखिलेश सरकार कोई रुचि नहीं दिखा रही.’’ उनके मुताबिक एयरपोर्ट अथॉरिटी की टीम ने जगह का मुआयना भी कर लिया, जिसमें स्थानीय प्रशासन ने पूरी मदद की, लेकिन सपा सरकार के रवैये पर वे निराशा जताते हैं. वे कहते हैं कि अभी यूपी में एएआइ के सिर्फ दो हवाई अड्डे हैं और बाकी एयरफोर्स के अधीन हैं, ऐसे में राज्य सरकार सहयोग करे तो मंत्रालय मेरठ और आगरा के प्रस्ताव को अंजाम दे सकता है. अजित असल में आगरा की एयर कनेक्टिविटी मजबूत करने के साथ ही वहां रेगुलर विमान सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं. वे कहते हैं, ‘‘हम रूट डिसपर्सल पॉलिसी और प्लेन एक्वीजिशन पॉलिसी के जरिए सेवादाताओं को छोटे प्लेन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और टू-थ्री टियर शहरों के लिए भी कुछ फीसदी सेवा देना सुनिश्चित करेंगे.’’
पश्चिम यूपी में हवाई जाल बिछाने की सिंह की योजना फिलहाल परवान न चढ़ पाए, लेकिन उन्होंने रनवे के जरिए जाट राजनीति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. पिता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने वाले अजित सिंह मौके की नजाकत को भांप कई पार्टियों के साथ रहते हुए केंद्र में मंत्री पद हासिल करते रहे हैं. यूपीए के साथ अगले चुनाव में भी गठबंधन जारी रखने का दावा कर रहे सिंह 2004 का चुनाव सपा तो 2009 में बीजेपी के साथ मिलकर लड़ चुके हैं. 12 दिसंबर 2011 को उन्होंने यूपीए का दामन थाम लिया. पिता-पुत्र समेत पांच सांसदों वाली पार्टी आरएलडी के मुखिया सिंह अब पश्चिमी इलाके में जनाधार बढ़ाने की जद्दोजहद के साथ अपने पुत्र और मथुरा से सांसद जयंत को मशाल सौंपने की तैयारी कर रहे हैं, तो जयंत भी पश्चिमी यूपी में किसान रैलियां कर विरासत संभालने की कोशिशों में जुटे हैं.

