इंडिया टुडे की एक खबर ने खंडवा के आदिवासी ब्लॉक खालवा के सैकड़ों बीपीएल परिवारों को उनका स्वाभिमान वापस दिलवाया है. इन परिवारों की पहचान के लिए सरकार ने उनके घरों पर मोटे-मोटे अक्षरों में 'मैं गरीब हूं’ लिखवा दिया था. ये परिवार पिछले ढाई साल से इस इबारत का बोझ उठा रहे थे और गरीबी के साथ-साथ उसके कलंक की पीड़ा भी झेल रहे थे.
29 अगस्त, 2012 के अंक में इंडिया टुडे ने बीपीएल परिवारों की इस व्यथा को उठाया तो शासन-प्रशासन को अपनी गलती का एहसास हुआ. फौरन कार्रवाई करते हुए खंडवा के कलेक्टर नीरज दुबे ने तीन दिन के भीतर ही तमाम मकानों पर लिखी यह इबारत मिटाने के निर्देश दिए. दुबे कहते हैं, ''जब से मेरे संज्ञान में यह मामला आया तभी से मैं इसे मिटवाने का मन बना चुका था.”
जब हमने इन गांवों का दोबारा दौरा किया तो हालात बदले हुए ही नहीं बल्कि बेहद खुशनुमा लगे. बुझे हुए चेहरों पर मुस्कान खिल रही थी.
सबसे सुखद असर गांव फेफरी सरकार में देखने को मिला. यहां के सुनील सिंह का परिवार घर पर लिखी ''मैं गरीब हूं” की इबारत को देखकर इतना दुखी था कि उसने अपने नन्हे बच्चे का नाम ही मायूस रख दिया था. लेकिन इबारत के मिटते ही इस घर से मायूसी दूर हो गई और खुशियों ने दस्तक देनी शुरू कर दी. अब मायूस का नाम बदल दिया गया है. इस नन्हे बच्चे की मां बबिता कहती हैं, ''अब हम उसे आयुष कहेंगे.”
जामलीखुर्द की रुखसाना के घर की सफेद दीवार भले ही काले रंग से पोते जाने पर बदरंग हो गई हो लेकिन वे खुश हैं. खुशी है कि उनके माथे पर लगा गरीबी का कलंक आखिरकार मिट गया है. 70 साल की बस्कर बाई को तो पहले-पहल विश्वास ही नहीं हुआ कि यह इबारत खुद सरकार ने हटवाई है. लेकिन अब उनकी आंखों की चमक से पता चलता है कि वे कितनी खुश हैं. इबारत मिटते ही बीपीएल परिवारों में एक नई उम्मीद जागी है. भूरीबाई भरोसा जताती हैं, ''जिस तरह यह इबारत मिटी है उसी तरह एक दिन हमारी गरीबी भी मिट जाएगी.” समाजसेवी अभय जैन इन लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का श्रेय इंडिया टुडे को देते हैं.
बीपीएल सूची में नाम दर्ज कराने की कीमत इन परिवारों ने अपना स्वाभिमान सरकार के पास गिरवी रखकर चुकाई थी. सरकार उनकी गरीबी तो नहीं मिटा सकी लेकिन उनके घरों पर लिखी यह इबारत मिटवाकर उसने अपनी गलती जरूर सुधार ली है. जैसा कि खालवा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.के. शुक्ल कहते हैं, ''इस इबारत से गरीबों के स्वाभिमान को चोट पहुंची होगी लेकिन प्रशासन ने अपनी गलती सुधार ली है” जाहिर है, मायूसी के बादल छंटने लगे हैं.

