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डार्क मोड

अपनों के ही जाल में फंसते भुजबल

गृह मंत्री पाटील के भुजबल के खिलाफ रिश्वत के आरोपों की जांच को मंजूरी देने से एनसीपी में दरार गहराती नजर आ रही है.

अपडेटेड 30 सितंबर , 2012

महाराष्ट्र के लोक निर्माण मंत्री छगन भुजबल को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शीर्ष पर कायम रहने की जंग का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. राज्य के गृह मंत्री आर.आर.पाटील ने भुजबल के खिलाफ बीजेपी नेता किरीट सोमैया के घूस लेने के आरोपों की जांच करने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को इजाजत दे दी है.

सोमैया ने आरोप लगाया है कि नई दिल्ली में बनने वाले राज्य के गेस्ट हाउस महाराष्ट्र सदन का ठेका देने में भुजबल ने अपने पद का दुरुपयोग कर राज्य को 10,000 करोड़ रु. का चूना लगाया है.

यह ठेका 2006 में के.एस. चमनकर ऐंड कंपनी को दिया गया था और इसके तहत दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित कस्तूरबा गांधी मार्ग पर छह एकड़ जमीन में एक विशाल गॅस्ट हाउस का निर्माण हुआ. सोमैया ने आरोप लगाया कि चमनकर ने भुजबल की बहू शेफाली और विशाखा की कंपनी इदीन फर्नीचर को नए गेस्ट हाउस में फर्नीचर सप्लाई करने की जिम्मेदारी सौंपी थी.

साफ है कि भुजबल के पीडब्ल्यूडी विभाग ने चमनकर को मुंबई के पॉश इलाके अंधेरी में एक महत्वपूर्ण प्लॉट दिया था जिसकी एवज में चमनकर ने मुफ्त में महाराष्ट्र सदन बनाने और मुंबई के मालाबार हिल स्थित हाई माउंट गेस्ट हाउस की मरम्मत करना मंजूर कर लिया था.

सोमैया का कहना है कि चमनकर ने इस प्रोजेक्ट पर सिर्फ 150 करोड़ रु. खर्च किए हैं जबकि वे अंधेरी के 'उपहार' में मिले प्लॉट पर रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाकर 10,000 करोड़ रु. की कमाई कर सकती है. सोमैया का कहना है, ''अंधेरी में रेजिडेंशियल जमीन की कीमत 20,000 रु. प्रति वर्ग फुट है, जबकि कॉमर्शियल जगह की कीमत 50,000 रु. प्रति वर्ग फुट. चमनकर को मिला प्लॉट 4.5 लाख वर्ग फुट है. इस प्रकार वे इसको बेचकर 10,000 करोड़ रु. कमा सकते हैं. ''

भुजबल इन आरोपों को सिरे से नकार देते हैं. उनका कहना है, ''विलासराव देशमुख के कार्यकाल के दौरान ही तीन मंत्रियों के समूह ने चमनकर को यह ठेका दिया था. ऐसे में मैंने अपने पद का दुरुपयोग कैसे किया? एसीबी को जांच करने दें. मुझे पूरा यकीन है कि सच्चाई सामने आ जाएगी.''

इस जांच को शुरू करने के लिए एसीबी को इजाजत देने में पाटील ने जो गजब की फुर्ती दिखाई उससे कई लोगों की भौहें तन गईं हैं. भौंहें तनने की वजह यह है कि एनसीपी के मेडिकल एजुकेशन मंत्री विजय कुमार गावित के खिलाफ इसी तरह के जांच के एक अनुरोध को उन्होंने दो साल से लटकाकर रखा हुआ है. पाटील सफाई देते हैं कि एसीबी को जांच करने की इजाजत उन्होंने नहीं दी है बल्कि यह फैसला करना उसके अपने विवेक पर है.

हालांकि मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बयान दिया है, ''इसके लिए गृह मंत्री से मंजूरी आनी चाहिए'' और फाइल उनके पास नहीं आई थी. इससे ऐसा लगता है कि इसमें पूरी तरह से पाटील का ही हाथ है. एनसीपी के सूत्र बताते हैं कि असल में पाटील उप-मुख्यमंत्री अजित पवार का एक तरह से एहसान चुका रहे हैं जो 11 अगस्त की आजाद मैदान हिंसा के बाद उनके बचाव में आगे आए थे. पवार के समर्थन की वजह से ही पाटील अपनी कुर्सी बचा पाए थे. सूत्र ने कहा, ''अब मौका पाटील के हाथ में है. ''

यह बात सब जानते हैं कि पवार और भुजबल एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते. उप-मुख्यमंत्री पार्टी के वरिष्ठ नेता भुजबल को अपने अगले मुख्यमंत्री बनने की राह का रोड़ा मानते हैं.

नाम न छापने की शर्त पर पाटील के एक समर्थक दावा करते हैं कि गृह मंत्री का यह फैसला वास्तव में भुजबल को ही फायदा पहुंचाएगा क्योंकि जांच के मामले में एसीबी का रिकॉर्ड खराब रहा है. पिछले दस साल में वह सिर्फ 10 लोगों के खिलाफ ही दोष सिद्ध कर सकी है. उसे अपनी जांच खत्म करने के लिए कोई समय-सीमा भी नहीं दी गई है. उन्होंने कहा, ''एसीबी को जांच की इजाजत देकर असल में पाटील ने भुजबल के पलटवार का जोखिम ले लिया है. ''

पाटील समर्थक ने पाटील के नियंत्रण वाली मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (इओडब्ल्यू) के जुलाई में बॉम्बे हाईकोर्ट में दिए हलफनामे का उल्लेख किया. इसमें इओडब्ल्यू ने कहा कि भुजबल की अगुवाई वाले मुंबई एजुकेशन ट्रस्ट (एमईटी) के फंड या प्रॉपर्टी के दुरुपयोग के आरोप पर भुजबल और उनके परिवार के खिलाफ  संज्ञेय अपराध का मामला नहीं बनता. एमईटी के ट्रस्टी सुनील कर्वे ने शिकायत की थी कि शेफाली और विशाखा ट्रस्ट की आठ मंजिला इमारत की एक फ्लोर का इस्तेमाल पिछले आठ साल से बिना किराया दिए अपने फर्नीचर शोरूम के तौर पर कर रही हैं. इस तरह उन्होंने 117 करोड़ रु. का नुकसान पहुंचाया है. हो सकता है भाग्य एक बार फिर भुजबल का साथ दे.

एनसीपी के सूत्र का कहना है कि पाटील असल में अजित पवार का एहसान चुका रहे हैं जो आजाद मैदान हिंसा के बाद उनके बचाव में आए थे.

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