मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में 14 सितंबर को हुए विस्तार के नाम पर केवल अनूप मिश्र को ही मंत्री बनाया गया, उन्हें चिकित्सा शिक्षा विभाग मिला है.
ग्वालियर से विधायक 56 वर्षीय अनूप मिश्र के रिश्तेदारों का नाम एक हत्याकांड में आने से और खुद उन पर भी उंगलियां उठने के कारण साल 2010 में उन्हें स्वास्थ्य मंत्री का पद गंवाना पड़ा था. केवल एक मंत्री को शपथ दिलवाने के लिए इतना तामझाम करने पर सवाल न उठे इसलिए उन तीन राज्यमंत्रियों को भी कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलवाई गई जो पहले से ही स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री के रूप में काम कर रहे थे.
अब शिवराज सरकार में मंत्रियों की संख्या 33 हो गई है. मुख्यमंत्री चाहते तो नियमानुसार दो और मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल कर सकते थे लेकिन उन्होंने साफ कर दिया लिए ‘‘मंत्रिमंडल की अधिकतम सीमा निर्धारित है लेकिन न्यूनतम सीमा तय नहीं.’’ उन्होंने मिश्र को वापस लेने के फैसले का बचाव करते हुए कहा, ‘‘ मिश्र ने जिन आरोपों के चलते इस्तीफा दिया था. अब वे हट गए हैं. हमने उन्हें ससम्मान वापस लिया है.’’
लेकिन चौहान के इस फैसले से उनके अपने ही खफा हैं. सूत्रों की मानें तो प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भोपाल से सांसद कैलाश जोशी व्यक्ति विशेष के लिए समारोह आयोजित करने से नाराज हैं. कांग्रेस ने स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री बनाने पर सवाल उठाए हैं.
मुख्यमंत्री को निशाने पर लेते हुए विपक्ष के नेता अजय सिंह कहते हैं, ‘‘खनिज घोटालों के जिम्मेदार ऊर्जा और खनिज राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह, ‘‘ गो माफियाओं के संरक्षक खाद्य और नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री पारस जैन और कुपोषण में प्रदेश को अव्वल लाने वाली महिला-बाल विकास मंत्री रंजना बघेल को इनाम मिला है. ’’
विस्तार के नाम पर अगर मुख्यमंत्री कुछ जातियों के प्रतिनिधियों को कैबिनेट में शामिल करते तो यह 2013 में उनके लिए ही फायदेमंद साबित होता. प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की कुल आबादी 20×3 फीसदी है, इसमें 21 फीसदी गोंड, भील और भिलाला समुदाय के लोग हैं लेकिन उनका कोई प्रतिनिधि मंत्रिमंडल में शामिल नहीं है. यादव समाज भी महत्वपूर्ण मतदाता है लेकिन मंत्रिमंडल में इस समुदाय से बाबूलाल गौर के अलावा और कोई मंत्री शामिल नहीं है.

