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''संस्थाओं पर लोगों को भरोसा खत्म हो गया''

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने धवल एस. कुलकर्णी को दिए इंटरव्यू के दौरान राजनैतिक पार्टी बनाने की संभावनाओं पर खुलकर बातचीत की

interview
धवल एस. कुलकर्णी
अपडेटेड 17 अगस्त , 2026

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने गृह नगर संभाजीनगर में धवल एस. कुलकर्णी से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार के नकल विरोधी विधेयक और जंतर मंतर प्रदर्शन के मुख्य निष्कर्षों जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. बातचीक के मुख्य अंश ः

● सीजेपी की भविष्य की योजनाएं क्या हैं?

बेरोजगारी का मुद्दा मुंह बाए खड़ा है. जंतर मंतर पर सिर्फ छात्रों की भीड़ नहीं थी, बल्कि 25 से 35 साल के उम्र के लोग भी थे. कई प्रदर्शनकारी ऐसे थे जिनके पास डिग्रियां तो हैं लेकिन नौकरी नहीं है.

जंतर मंतर पर मौजूद ज्यादातर लोग बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर प्रदेश से थे, क्योंकि वहां युवा सामाजिक उत्थान के लिए लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षाओं पर निर्भर हैं. इन छात्रों में बहुत ज्यादा हताशा है.

उन्होंने हमसे पूछा कि हम सिर्फ नीट के बारे में ही क्यों बात कर रहे हैं, पीएससी परीक्षाओं के बारे में क्यों नहीं. इन परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों में धांधली की शिकायतें देश के कई राज्यों से आई हैं. शिक्षा की गुणवत्ता और इसके महंगे होने से भी लोगों में गुस्सा है.

सीजेपी गिग वर्कर से जुड़े मुद्दे भी उठाएगी. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्विगी और जोमैटो के कर्मचारी पहुंचे थे. गिग वर्क की अवधारणा पश्चिमी देशों के लिए अच्छी है; भारत में गिग वर्किंग श्रम के शोषण के अलावा कुछ नहीं है.

उन्हें सुरक्षा कवच की जरूरत है. हम ई-20 मिश्रित पेट्रोल को लेकर आ रही शिकायतों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे. सबसे पहले, हम हर राज्य और जिले में जाएंगे, जनसभाएं करेंगे और लोगों की चिंताओं तथा हमसे उनकी उम्मीदों के बारे में जानेंगे.

जंतर मंतर पर युवाओं से संवाद के दौरान मुझे एहसास हुआ कि उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता और अगंभीर पीढ़ी कहकर खारिज कर दिया जाता है. उन्हें सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके संवाद का तरीका और जीवनशैली अलग है.

● क्या सीजेपी की कोई राजनैतिक योजना है?

अगर जनता चाहेगी तो हमें इस पर विचार करना होगा, लेकिन अभी हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है. सीजेपी एक सामाजिक आंदोलन है. लोगों का सभी संस्थाओं से भरोसा उठ गया है. जनप्रतिनिधि चुने जाने के तुरंत बाद अपनी निष्ठा बदल लेते हैं.

अदालतें सत्ताधारी दल का पक्ष लेती हैं और लोग प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) और यहां तक कि मीडिया से भी आजिज आ चुके हैं. देश को ऐसे सामाजिक आंदोलन की जरूरत है जिसमें लोग राजनैतिक संबद्धताओं से ऊपर उठ सकें. 

इन आरोपों पर आपका क्या कहना है कि वामपंथी दल प्रदर्शन की अगुआई कर रहे थे?

आंदोलन में सभी दलों के छात्र संगठन शामिल थे-नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआइ), आम आदमी पार्टी (आप) का एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (एएसएपी) और वामपंथी छात्र संगठन.

वामपंथी समूहों का नाम जानबूझकर उछाला जा रहा है. कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी और आप जैसे विपक्षी दलों ने समर्थन किया.

● जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की ओर से कथित हिंसा पर क्या कहेंगे?

प्रदर्शन में बाहरी लोग घुस आए थे. हमारे मुद्दे के प्रति सहानुभूति रखने वाले दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कांस्टेबलों ने भी बताया कि कार्रवाई का बहाना बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा था.

19 जुलाई को सीजेपी समर्थकों की ओर पथराव का सबूत बताने के लिए दिल्ली पुलिस ने पत्थरों से भरा एक ट्रक और एक खराब वैन खड़ी की थी. पुलिस ने दावा किया कि जंतर मंतर पर 2,100 अपराधी मौजूद थे. प्रवेश करते समय हमारी तलाशी ली गई; उनके साथ ऐसा क्यों नहीं किया गया? यह पूर्व-नियोजित था.

● सोनम वांगचुक के अनशन वापस लेने के कदम को आप कैसे देखते हैं?

हमने हमेशा सोनम सर से कहा कि अपना आंदोलन जारी रखेंगे, आप अनशन तोड़ दें. जब उन्होंने अनशन तोड़ा तो हमें खुशी और राहत मिली. जंतर मंतर से तो उन्हें एक तरह से बंधक बनाकर ले जाया गया था. हमारी टीम को उनसे मिलने नहीं दिया गया. हम उनसे कोई बातचीत नहीं कर सके.

सीजेपी के शिक्षा सुधार कौन से हैं?

प्राथमिक स्कूली शिक्षा में सुधार होना चाहिए. पिछले एक दशक में लगभग 94,000 सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं, जिसका सीधा मतलब है कि यह निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाने के मकसद से किया गया. अमेरिका में मुझे एक भी कोचिंग क्लास नहीं दिखी. यहां कोचिंग उद्योग और निजी स्कूलों/कॉलेजों के बीच साठगांठ साफ नजर आती है.

आप केंद्र सरकार के लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के बारे में क्या सोचते हैं?

हम इससे संतुष्ट नहीं हैं. जोर इस पर है कि पेपर लीक के बाद क्या किया जाए, जिसका मतलब है कि सरकार मानकर चल रही है कि पेपर लीक होगा. ध्यान इसे रोकने पर होना चाहिए.

आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक करोड़ रुपए के मुआवजे की हमारी मांग कायम है. सरकार कहती है कि इसके िलए नियमों की जांच करनी होगी. यही सरकार दूसरी सरकारों को अस्थिर करने के लिए सांसदों/विधायकों को करोड़ों रुपए देते समय नियमों की धज्जियां उड़ाती है. मांग पूरी नहीं हुई तो फिर आंदोलन करेंगे.

● सीजेपी के प्रदर्शन का सबसे बड़ा निष्कर्ष क्या है?

सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अब तक दबी रही आवाजों ने डर पर काबू पाया, खुद को व्यक्त करने का साहस जुटाया और केंद्र सरकार से सवाल पूछना शुरू किया. 

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