सवाल+जवाब
● निर्देशन के कीड़े ने राष्ट्रीय फिल्म और प्रशिक्षण संस्थान (एफटीआइआइ) में अभिनय की पढ़ाई के दौरान ही आपको काटा था क्या?
फिल्में कैसे बनती हैं, उसमें दिलचस्पी की वजह से मैं एफटीआइआइ में पढ़ने गई थी. मैं वहां ऐक्टिंग की स्टुडेंट भर नहीं थी, कई सारे सीनियर्स को मैंने डायरेक्शन, प्रोडक्शन डिजाइन, एडिटिंग वगैरह में असिस्ट किया. फिल्म बनाना मेरी उसी ख्वाहिश का हिस्सा था, जिसे मैं पूरी करना चाहती थी. 17 साल से यह बात मेरे जेहन में बैठी हुई थी.
● फिल्मों और वेब सीरीज में ऐक्टिंग के दौरान भी क्या डायरेक्शन वाली बात आपके जेहन में बनी रहती थी?
इतने सालों के दौरान मैं एक तरह से अपने जेहन में नोट्स बनाती रही हूं: क्या करना है, क्या नहीं करना है, किसके साथ काम करना है. फोर मोर शॉट्स प्लीज! का तीसरा सीजन खत्म होने के बाद मैंने रंगीता नंदी को अप्रोच किया और कुछ एपिसोड्स डायरेक्ट करने की मंशा जाहिर की. वे बोलीं, ''शाइ, तुम पर मुझे पूरा यकीन है पर पहले मैं तुम्हारा बनाया कुछ देखना चाहूंगी.’’ आसमानी मैंने इसीलिए बनाई है जिससे लोगों के सामने अपनी काबिलियत साबित कर सकूं.
● शॉर्ट फिल्म को फिल्मकारों के लिए ड्योढ़ी पर पहले कदम के रूप में देखा जाता है? अब और निर्देशन करना है?
शॉर्ट फिल्में देखना, उनमें ऐक्टिंग करना और कहानियां पढ़ना मुझे पसंद है. आसमानी मेरी पहली संतान है. बनाते वक्त रोज कुछ न कुछ सबक मिले. मैंने एक सहज सुलभ फिल्म बनाई. सोच यही है कि ज्यादा किस्से सुनाए जाएं और हरेक के दौरान कुछ न कुछ सीखा जाए.
● फिल्म को रिलीज करने की बात सोची है क्या?
आप फिल्म बनाते हैं तो जाहिर है आप उसे लोगों को दिखाना और उसमें लगा पैसा रिकवर करना चाहेंगे. शार्ट्स को मैं बस हाथ साफ करने के औजार के रूप में नहीं देखती. मैं सारे ओटीटी प्लेटफार्म को अप्रोच करूंगी. सिनेमाघरों में भी यह किसी फिल्म के साथ या फिर कई शार्ट्स की एक प्रस्तुति के रूप में रिलीज हो सके तो अच्छा ही रहेगा.

