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बातचीतः चुनाव और चार नजरिये

पंजाब के इस चुनाव में व्यस्त चार बड़े नेताओं ने प्रचार अभियान के दौरान ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और सीनियर एडिटर अनिलेश एस. महाजन के साथ अलग-अलग एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कुछ प्रमुख सवालों के जवाब दिए. अंश:

अमरिंदर सिंह
अमरिंदर सिंह
अपडेटेड 15 फ़रवरी , 2022

प्र. इस चुनाव के मुख्य मुद्दे क्या हैं?

चरणजीत चन्नी: मैं गरीब परिवार का हूं. मैं जानता हूं कि गरीब के लिए दाल-रोटी जुटाना कितना मुश्किल होता है. अगर सरकार आटा-दाल देती रहे तो वे गरीब बने रहेंगे. उन्हें अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की जरूरत है. यह मैं सुनिश्चित करूंगा. दो किस्म के समाज बन रहे हैं. एक वे जो सरकारी स्कूलों में जाते हैं और पंजाबी माध्यम में पढ़ते हैं. दूसरे वे जिन्हें निजी स्कूल सुलभ हैं और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते हैं. मेरा ध्यान अच्छी शिक्षा देने पर है. इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है. हमें कृषि आधारित उद्योगों की भी जरूरत है. गरीबी को जड़ से खत्म करने के लिए आपको युवाओं पर ध्यान देना होगा और उन्हें अच्छी शिक्षा देनी होगी. साथ ही, ऐसा ईकोसिस्टम बनाना होगा जिससे युवा स्टार्ट-अप लॉन्च कर पाएं. अगर वे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय, कुटीर उद्योग लगाना चाहें...तो सरकार को इसे आसान बनाना चाहिए. 

भगवंत मान: बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है. यह हमारे राज्य की कई समस्याओं की जड़ है. यहां तक कि वे बेरोजगार भी जिनके पास एमएससी, एमबीबीएस या इंजीनियरिंग की डिग्रियां हैं, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जाने की खातिर आइईएलटीएस (अंग्रेजी भाषा का टेस्ट) के लिए कतार में खड़े हो जाते हैं. यह प्रतिभा पलायन है. विदेश जाने वाले हर छात्र के साथ 25 लाख रुपए का पलायन होता है. कुछ साल बीतते-बीतते उनका परिवार भी चला जाता है. जो लोग आइईएलटीएस पास नहीं कर पाते या नहीं जा पाते, वे बुरी संगत या अवसाद में पड़ जाते हैं. कई को नशे की लत लग जाती है. हम चाहते हैं कि हमारे छात्रों को यहीं रोजगार मिले. मैंने कभी नहीं सुना कि कोई रोजगारशुदा नशा करता हो. लोगों को उनकी शैक्षणिक डिग्री और कौशल के मुताबिक नौकरी देना मुख्य मुद्दा है.

सुखबीर बादल: हमें पंजाब को अगले पड़ाव पर ले जाना होगा. लोग विकास और खुशहाली की उम्मीद लगाए हैं. इसे हासिल करने के लिए पंजाब को मजबूत, निर्णायक और जोशीले नेतृत्व की जरूरत है. हमें कॉमेडियन नहीं बल्कि ऐसे लोग चाहिए जिनके पास राज्य के निर्माण का एक विजन हो.
अमरिंदर सिंह: लोगों का ध्यान अपने पेट और नौकरियों पर है. सभी पैसा चाहते हैं और किसान तो निश्चित रूप से ज्यादा चाहते हैं, उद्योगपति ज्यादा चाहते हैं. औद्योगिक और कृषि विकास दोनों ही जरूरी है और इसके लिए हमें नए विचार लेकर आना होगा. हमें नौकरियों के लिए प्रतिबद्धताएं जाहिर करनी होंगी—यह हमारा बड़ा मुद्दा होने जा रहा है.

प्र. लोग आपको वोट क्यों दें?

चन्नी: मैं लोगों को मेरी सरकार की तरफ से बिजली, पानी, पेट्रोल व डीजल और रेत की कीमतें कम करने के बारे में, साथ ही नए कारोबार शुरू करने में मदद के लिए लॉन्च की गई योजनाओं और महिलाओं तथा विद्यार्थियों को दी गई बसों में मुफ्त यात्रा (की सुविधा) के बारे में बता रहा हूं. 111 दिनों में इतना सारा काम करके मैं लोकप्रिय हो गया हूं. अगर मुझे काम करने के लिए पांच साल का कार्यकाल मिले तो कल्पना कीजिए मैं कितना कुछ कर सकता हूं. सत्ता विरोधी भावना अगर है, तो वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ है, कांग्रेस के खिलाफ नहीं है. हम खुशकिस्मत हैं कि वे खुद ही कांग्रेस छोड़कर चले गए. कांग्रेस की परेशानी उन्हीं की वजह से थी. उन्हें अपने पाले में स्वीकार करके वह भावना भारतीय जनता पार्टी ने विरासत में ले ली है. 

मान: मैं लोगों के बीच से हूं. मैं महल से नहीं हूं. लोगों के लिए मैं उनके बेटे या भतीजे की तरह हूं—उनका अपना. बादलों के महल में बड़ी-बड़ी दीवारें हैं; वहां एक पंछी तक बैठकर चहचहा नहीं सकता. मेरे विरोधी मुझे महज कॉमेडियन कहते हैं. वे गलत हैं—मैं व्यंगकार हूं, सामाजिक आलोचक. मैं कैंसर से होने वाली मौतों, किसानों की मौतों या भ्रष्टाचार के बारे में बोलता हूं तो क्या ये सब मजाक है? इन राजनैतिक पार्टियों ने हमारे देश का मखौल उड़ाया है. हम पंजाब के लोगों को ईमानदार, पारदर्शी और नेकनीयत सरकार देंगे.

बादल: जब हम सत्ता में थे तो हमने विकास किया और इसी वजह से पंजाब का हर जिला अच्छी सड़कों से जुड़ा है. राज्य में सभी नए पावर प्लांट अकाली हुकूमत में बने. पंजाब को निर्णायक नेता चाहिए. मुख्यमंत्री राज्य के सीईओ की तरह होता है. तेज विकास के लिए लोग मुझ पर भरोसा कर सकते हैं. हमारी पार्टी अकेली पंजाबी पार्टी है—बाकी राष्ट्रीय पार्टियां हैं और पंजाब को उस तरह नहीं समझतीं जैसे हम समझते हैं. मसलन, अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा कि पंजाब के ताप बिजलीघर बंद कर दिए जाएं क्योंकि ये प्रदूषण पैदा करते हैं. राष्ट्रीय पार्टी का राज्य के साथ हमेशा हितों का टकराव होगा.

अमरिंदर: मेरे पास अनुभव है, जो मैं दे रहा हूं. मैं इस खेल में 50 साल से हूं और जानता हूं कि मेरे राज्य को क्या चाहिए. मैं हरेक को मुफ्त रेवड़ियां नहीं बांटूंगा जैसा चन्नी और दूसरे कर रहे हैं. यह बिल्कुल बकवास है क्योंकि इन खैरातों के लिए पैसा कहां से लाएंगे? मेरी सरकार ने जब कुछ दिया तो उसका एक उद्देश्य था, जैसे मुफ्त स्वास्थ्य बीमा. मैं औद्योगिक और कृषि विकास दोनों सुनिश्चित करूंगा.
प्र. राज्य के कृषि संकट का क्या समाधान आपके पास है?

चन्नी: हमें जैविक खेती की तरफ जाने की और पेस्टीसाइड तथा यूरिया से निजात पाने की जरूरत है. ये खामोश हत्यारे हैं. हमें जैविक फसलों के लिए अलग एमएसपी तय करने की जरूरत है. फिर सभी किसान जैविक खेती अपना लेंगे और हमारे देश की सेहत सुधरेगी. हमें धान से हटकर दूसरी फसलों की तरफ जाना होगा, क्योंकि पंजाब में भूमिगत जल चिंताजनक हद तक कम हो रहा है. हम पूरा पानी उलीचकर भावी पीढ़ियों के लिए बंजर जमीन छोड़ देंगे, तो वे जिंदा कैसे रहेंगे? स्थिति में सुधार के लिए हमें दलहन, मक्का वगैरह सरीखी फसलें उगाने की जरूरत है. इसके लिए सरकार को ज्यादा एमएसपी सुनिश्चित करने की जरूरत है.

मान: गुरु नानक साहब ने कहा था उत्तम खेती, मध्यम व्यापार, नीच नौकरी. उन्होंने खेती को सबसे अव्वल रखा था पर अब उलटा हो रहा है. खेती मुफीद नहीं रही. केंद्रीय कृषि कानून रद्द हो गए. यह लड़ाई हमने जीत ली. मगर किसान इन कानूनों के आने से पहले भी आत्महत्या करते रहे हैं. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) योजना के केंद्र में होना चाहिए. हम इसे मजबूत करेंगे. हमारा इरादा हरेक गांव में जरूरी जानकारियां देने के लिए दो ग्रेजुएट भर्ती करके किसानों के बीच ज्यादा जागरूकता पैदा करने का है. इससे कम से कम 40,000 नौकरियां पैदा होंगी. दूसरी समस्या धान है. एक किलो धान उगाने के लिए 3,800 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है. इसने पंजाब में पानी का संकट पैदा कर दिया है. हम मक्का, बाजरा, मोटा अनाज और दूसरी फसलें उगा सकते हैं. हमारी जमीन उपजाऊ है, पर हमारे यहां न तो मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है और न ही निश्चित एमएसपी पर खरीद. हम सहकारी संस्थाएं बनाएंगे और उत्पादन लागत कम करेंगे.

बादल: किसानों को गारंटीशुदा बाजार और दाम मिलना चाहिए. जब तक केंद्र, फर्ज कीजिए, मक्का की खरीद पर एमएसपी की गारंटी नहीं देता, किसान दूसरी फसलें नहीं अपनाएंगे. उन्हें बड़े पैमाने पर एथेनॉल की इजाजत देनी चाहिए. इन कार्यक्रमों और योजनाओं में मददगार होने के लिए राज्यों के पास पर्याप्त वित्तीय शक्ति होनी चाहिए.

अमरिंदर: कृषि में पंजाब का मुख्य आधार धान है, जिसकी भारत को ज्यादा जरूरत नहीं रही, क्योंकि हमारे गोदाम भरे पड़े हैं. भारत हर साल 1.5 लाख करोड़ रुपए के दलहन आयात कर रहा है. इसमें से मुझे 25,000 करोड़ रुपए दे दो और मैं किसानों को धान छोड़कर दलहन अपनाने के लिए राजी कर लूंगा. हम धान को रास्ते से हटाएंगे और पानी भी बचाएंगे.

प्र. औद्योगिक विकास के लिए क्या करने की जरूरत है?

चन्नी: कृषि पैदावार पंजाब में चरम पर है. हम जो कर सकते थे, कर चुके हैं. अब हमें गियर बदलकर कृषि उद्योगों की तरफ जाने और औद्योगिकीकरण पर ध्यान देने की जरूरत है. हमें कुटीर से लेकर बड़े उद्योगों तक में नई जान फूंकने की जरूरत है. हमें केंद्र की सहायता चाहिए. हमारा राज्य सरहदी है. हमें प्रोत्साहन लाभों की जरूरत है और केंद्र को इस पर गौर करना चाहिए.

मान: व्यापारी राजनेताओं के लिए धन से भरे बोरे लेकर घूम रहे हैं. वे सम्मान की वजह से ऐसा नहीं कर रहे हैं. व्यापारी विभिन्न दलों के राजनेताओं को खुश करने के लिए ऐसा कर रहे हैं और यह पक्का करने के लिए कि सत्ता में आने पर वे उनके पीछे न आएं. सरकारें लोगों को तंग करने के लिए नहीं बनाई जातीं. मगर इन दिनों व्यापारी अपनी कामयाबी को लेकर सशंकित हैं. मंडी गोबिंदगढ़ स्टील का केंद्र हुआ करता था. अब नहीं रहा. हम इसे बदलेंगे. हम राजस्थान, मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों से उद्योगों को रिझाकर लाएंगे.

बादल: हम प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान देंगे. आइटी ऐसा ही क्षेत्र है, क्योंकि दक्षिण भारत में इसकी संभावनाएं खत्म हैं. आइटी फर्म उत्तर में आती हैं, तो हम उन्हें बेहतरीन जगहें, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, अच्छे होटल दे सकते हैं. पर्यटन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की जरूरत है. हम खाद्य प्रसंस्करण विकसित करने के लिए दो या तीन बड़ी परियोजनाएं शुरू करेंगे. सत्ता में आने के एक साल के भीतर मैं कारोबार करने में आसानी की दिशा में कागजहीन सरकार सुनिश्चित करूंगा. आप प्रक्रिया को कागजहीन बना देते हैं, तो 99 फीसद भ्रष्टाचार और अड़चनें खत्म हो जाएंगी. औद्योगिक नीतियां अफसरशाहों को नहीं, उद्योगपतियों को बनानी चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें जवाबदेह बनाया जा सकेगा.

अमरिंदर: मुख्य बात यह है कि हमें पैसा चाहिए और ऐसी नीतियां जो उद्योगों को पंजाब आने के लिए प्रोत्साहित करें.

प्र. अपने विरोधियों के बारे में आप क्या सोचते हैं?

चन्नी: सुखबीर बादल घमंडी हैं और बाहुबल पर भरोसा करते हैं. उनके परिवार के सभी सदस्य राजनीति में हैं. वे अच्छे कारोबारी हैं. भगवंत मान चुनौती ही नहीं हैं. वे महज रबड़ स्टांप हैं. आप के पोस्टर तक लोगों से केजरीवाल को मौका देने के लिए कह रहे हैं. कैप्टन साहिब को अपना चेहरा चुनकर भाजपा ने अपनी प्रतिष्ठा धूमिल कर ली है. उन्हें इस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलेगी.

मान: पंजाब में माफिया बादलों ने पैदा किया. अमरिंदर सिंह इसे एक कदम आगे ले गए. साफ है कि वे आपसी साठगांठ से काम करते हैं. कैप्टन साहिब ने जनादेश का मजाक बना दिया. चरणजीत चन्नी दावा करते हैं कि वे आम आदमी हैं, पर 110 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की है. वे नकली आम आदमी हैं.

बादल: चरणजीत चन्नी तो कुछ हैं ही नहीं. वे न तो करिश्माई हैं और न उनकी पूरे राज्य में अपील है. सबसे ज्यादा भ्रष्ट वही हैं. चन्नी जिन दो सीटों से लड़ रहे हैं, दोनों हार सकते हैं. भाजपा के साथ कैप्टन साहिब का गठबंधन जीरो प्लस जीरो बराबर जीरो है. भगवंत मान के बारे में मैं उस दिन का सोचकर कांप जाता हूं जब उस जैसे लोग राज्य की अगुआई करने के लिए चुने जाएंगे. वह नशेड़ी के अलावा कुछ नहीं है.

अमरिंदर: इसमें कोई शक नहीं कि लोग बदलाव की जरूरत महसूस कर रहे हैं, पर बदलाव लाने के लिए आपको काबिल शख्स चाहिए. भगवंत मान राज्य को चलाने के काबिल नहीं हैं. बस बैठकर लतीफे सुनाने के अलावा उन्होंने कुछ नहीं किया. सुखबीर बादल के बारे में लोग बेअदबी का मुद्दा और नशे की समस्या भूले नहीं हैं. चरणजीत चन्नी की काबिलियत सीमित है. उसके पास मुख्यमंत्री होने लायक बैंडविड्थ नहीं है.

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