अपने दोबारा चुने जाने की संभावनाओं पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और विशेष संवाददाता प्रशांत श्रीवास्तव से अपने लखनऊ स्थित आवास पर बेबाकी से बात की. इस खास बातचीत के अंश.
प्र. आप पांच साल से मुख्यमंत्री हैं. लोग आपको दोबारा वोट क्यों दें?
हमने—यानी भारतीय जनता पार्टी ने—जो भी वादे किए, पूरे किए. दूसरे, डबल इंजन की सरकार के फायदे राज्य के लिए डबल डोज की तरह आए हैं, चाहे वैक्सीन हो या अनाज, जीवन और आजीविका बचाना हो या सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करना हो.
केवल भाजपा ही यह कर सकती है और यह सब (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी जी के नेतृत्व में हासिल किया गया है. एक के बाद एक गांवों से आवाजें आ रही हैं, जो बता रही हैं कि 10 मार्च, 2022 को भाजपा भारी बहुमत से फिर सरकार बनाएगी.
आपके इस आत्मविश्वास की क्या वजह है?
उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था बेहतर है. पिछले पांच साल में कोई दंगा नहीं हुआ. माफियाओं के खिलाफ, जो पहले सरकार को नियंत्रित करते थे, कठोर सरकारी कार्रवाई की गई. हमने अपनी बेटियों की सुरक्षा के सख्त बंदोबस्त किए. निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाए गए. बुनियादी ढांचा विकसित किया गया.
पिछले 70 साल में, 1947 से 2017 तक राज्य में केवल डेढ़ एक्सप्रेस-वे बनाया गया था जबकि हम फिलहाल छह पर काम कर रहे हैं. जहां तक एयरपोर्ट कनेक्टिवटी का मसला है, जब हम सत्ता में आए तब उत्तर प्रदेश में मात्र दो हवाई अड्डे काम कर रहे थे—लखनऊ और वाराणसी. गोरखपुर में कभी-कभार उड़ानें दिखाई देती थीं. आज उत्तर प्रदेश में नौ हवाई अड्डे काम कर रहे हैं. एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा जेवर में बन रहा है. एक और हवाई अड्डे का निर्माण अयोध्या में चल रहा है.
गरीबों की कल्याण योजनाओं के बारे में क्या कहेंगे?
जहां तक गरीबों के लिए कल्याण योजनाओं की बात है, तो 2017 से पहले के पांच साल में अखिलेश यादव ने मात्र 18,000 मकानों की मंजूरी दी थी और सौंपा एक भी नहीं था. हमारी सरकार ने 43 लाख गरीब परिवारों को मकान दिए हैं. हमने राज्य के 2.61 करोड़ गरीब परिवारों को शौचालय मुहैया कराए हैं.
2017 में जब हम सत्ता में आए, 1,21,000 टोलों ने कभी बिजली नहीं देखी थी. हमने वहां बिजली पहुंचाने का काम शुरू किया और फिर 1.47 करोड़ परिवारों को मुफ्त कनेक्शन दिए. हमने 1.56 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए. हम जब सत्ता में आए, तब राज्य में लोग भूख से मर रहे थे. आज हम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के मामले से अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं.
पंद्रह करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है. हम सत्ता में आए तो किसानों का कर्ज माफ किया. सपा-बसपा ने 14 साल राज किया और वे इतने समय में गन्ना किसानों को जो बकाया अदा नहीं कर सके, हमने पांच साल में कर दिखाया. हमारी सरकार ने अभी तक गन्ना किसानों का 1.55 लाख करोड़ रुपए का बकाया चुकाया है.
लेकिन फिर किसान यहां विरोध प्रदर्शन के लिए क्यों उतर पड़े?
यहां कोई किसान नहीं आया, यहां कोई प्रदर्शन नहीं हुआ. यहां वे तीन कृषि कानूनों के समर्थन में आए. भारतीय किसान यूनियन ने शुरुआत में तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया था, मगर जब संयुक्त किसान मोर्चा बना और पंजाब और हरियाणा के किसान धरने पर बैठे, तो वे भी उनके साथ शामिल हो गए.
अन्यथा उन्होंने तो कानूनों का समर्थन किया था. यही कारण है कि पड़ोसी राज्यों में पूरी अराजकता होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था की कोई समस्या नहीं थी. इसीलिए भारतीय जनता पार्टी उपचुनावों और पंचायत चुनावों में भारी बहुमत से जीती.
लखीमपुर खीरी की घटना के बारे में क्या...
वह किसानों का आंदोलन नहीं था. वह दो पक्षों के बीच टकराव और दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी... और सरकार ने कानून के अनुसार सभी जरूरी कार्रवाइयां कीं. अब सुप्रीम कोर्ट सभी कार्यवाहियों की निगरानी कर रहा है. मामले की जांच के लिए एसआइटी और न्यायिक आयोग बनाया गया है. सरकार को जो भी करना पड़ा, उसने मामले के गुण-दोषों के आधार पर और कानून के अनुसार किया.
उत्तर प्रदेश की प्रभारी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने 40 प्रतिशत सीटें महिलाओं को दी हैं. भाजपा ऐसा क्यों नहीं कर रही है?
भाजपा योग्यता के आधार पर टिकट दे रही है. अधिकतम संख्या में महिला विधायक और सांसद भाजपा के हैं. हम महज टिकट देने में नहीं बल्कि उनकी सफलता सुनिश्चित करने और उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाने में विश्वास करते हैं.
हमारे लिए मिशन शक्ति कार्यक्रम महिलाओं के सम्मान, उनकी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ा है. यह राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है. यह उनकी इज्जत और उन्हें शक्तिशाली बनाने से जुड़ा है.
हाल में दो-एक ओबीसी मंत्री आपका मंत्रिमंडल छोड़कर चले गए. उनमें से एक ने आरोप लगाया कि आपने उन्हें फाइलें तक देखने नहीं दीं.
अगर कोई चालाकी पर उतर आए, तो यह उसके छोड़कर चले जाने का समय है, अध्याय समाप्त! मैं कह यह रहा हूं कि जनता सच्चाई जानती है. हमने बिल्कुल पहले ही दिन तय कर लिया था कि अपराध और अपराधियों के प्रति और साथ ही भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के प्रति शून्य सहिष्णुता रहेगी.
अगर यह नीति हमारे सारे कार्यों में नहीं झलकती, तो हम इस छवि और उत्साह से जनता का सामना नहीं कर पाते. हम उत्तर प्रदेश के बारे में धारणा बदलने का अपना वादा पूरा नहीं कर पाते. ये सब चीजें वंशवादी और जातिवादी राजनीति के जरिए नहीं आ सकतीं.
तो फिर ओबीसी नेताओं का एक तबका यह क्यों कह रहा है कि पार्टी उनके हितों के बारे में केवल जुबानी जमा-खर्च करती है?
मैं यह कहूंगा कि हमारी योजनाएं खुद बोलती हैं. जो 43 लाख मकान दिए गए हैं, वे मेरे रिश्तेदारों को तो नहीं दिए गए हैं, मैं तो खैर अकेला हूं. ये राज्य के दलितों, पिछड़ों और गरीबों को दिए गए हैं. ये मुद्दे वे लोग उठा रहे हैं जिन्हें लगता है कि उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है और वे लोग जिन्हें जनता ने पूरी तरह धूल-धूसरित कर दिया है.
जातिवाद लगता है, राजनीति में लौट आया है. हिंदुत्व एक बात है पर जातिवाद टिकट वितरण में निर्णायक कारक बनता दिखाई दे रहा है. क्या भाजपा भी यही नहीं कर रही है?
चुनाव जीतने में जाति एक कारक है, लेकिन भाजपा ने राष्ट्रवाद, विकास और अच्छे राजकाज के मुद्दों पर चुनाव लड़े और वह आगे भी ऐसा ही करती रहेगी.
लेकिन आपने अपना दल, निषाद पार्टी वगैरह को अपने साथ जोड़ा है.
वे पहले भी हमारे सहयोगी दल रहे हैं और हमारे मन में उनके साथ संबंधों के प्रति जो सम्मान है, उसके चलते वे आगे भी साथ रहेंगे.
आपने हाल के इंटरव्यू में 80 बनाम 20 की बात कही. क्या यह समुदायों के ध्रुवीकरण की कोशिश है?
इसका संबंध ध्रुवीकरण से नहीं है. यह रचनात्मक राजनीति की बात है—चुनाव 80 बनाम 20 का होगा. आप देखेंगे कि भाजपा 80 प्रतिशत सीटें हासिल करेगी, हमें 80 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलेगा, चाहे गांव हों या गरीब, किसान, युवा, महिलाएं, बुद्धिजीवी, वे जो रचनात्मक राजनीति के साथ आगे बढ़ते हैं.
वे जो राज्य को समृद्ध और सुरक्षित चाहते हैं, वे जिनकी युवाओं के विकास में, महिलाओं की सुरक्षा में, बुनियादी ढांचे के विकास में रुचि है. ऐसे सारे लोग भाजपा को वोट देंगे. वे लोग जो माफिया के पक्ष में, गुंडावाद का समर्थन करते हैं, दंगे और अराजकता भड़काते हैं, दूसरी तरफ जाएंगे.
आपके बयान को मुसलमानों की तरफ इशारे के रूप में देखा गया...
यह भाजपा ही थी जिसने तीन तलाक की बुराई को खत्म किया. क्या मुस्लिम महिलाएं न्याय की हकदार नहीं हैं? जब हमने मकान आवंटित किए, क्या हमने यह देखा कि लाभार्थी हिंदू है या मुसलमान? सभी को हमारी योजनाओं का बराबर फायदा मिला.
लेकिन वे आबादी के 22 फीसद हैं. आप मुसलमानों को कितने टिकट देंगे?
हमने जाति या वोटबैंक की तो बात ही नहीं की. हमारे लिए व्यक्ति की योग्यता उसके चुनाव जीतने की क्षमता में है, फिर उसकी जाति, धर्म, समुदाय चाहे जो हो. जो भी टिकट के लिए आवेदन करता है, उसका आकलन योग्यता के आधार पर किया जाता है. अगर उनमें जीतने की संभावनाएं दिखाई देती हैं, तो उन्हें टिकट दिया जाएगा. चुनाव आखिरकार जीतने के लिए लड़े जाते हैं. वे महज औपचारिकता नहीं हैं.
लोग कहते हैं कि आपकी निगहबानी में राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति सुधरी है. कानून और व्यवस्था का योगी मॉडल क्या है?
योगी मॉडल वह है जो उपद्रवियों और जनता को लूटने वालों की तस्वीरें पब्लिक में टांगने में हिचकिचाता नहीं है; वह है जो आदेश देता है कि अगर आप सार्वजनिक संपत्ति जलाओगे, तो आपको नुक्सान की भरपाई भी करनी पड़ेगी; वह जो सुनिश्चित करता है कि अगर आप निर्दोषों को सताओगे तो पुलिस किसी भी कीमत पर आपका पीछा करके धर-दबोचेगी.
वह जो सुनिश्चित करता है कि अगर आपने सार्वजनिक संपत्ति पर, गरीबों की या व्यवयासियों की संपत्ति पर अतिक्रमण किया, तो आपका साम्राज्य बुलडोजर चलाकर ढहा दिया जाएगा.
क्या इसमें जरूरत पड़ने पर पुलिस को अपराधियों को मार गिराने की 'खुली छूट’ भी है?
राज्य में 'अच्छा राजकाज’ स्थापित करने लिए हमने प्रशासनिक मशीनरी को स्वतंत्रता दी. हमने उन्हें राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना कानून के तहत खुलकर काम करने के लिए जरूरी अवसर दिया है और राज्य में हमारी सफलता का यही मुख्य कारण है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का डेटा आपको पूरी कहानी बताएगा, यह सारा ऑनलाइन है.
लेकिन इसकी वजह यह बताई जाती है कि उत्तर प्रदेश में अपराधों की रिपोर्टिंग नहीं होती, मामले रजिस्टर नहीं किए जाते.
ऐसा अब नहीं होता. यह पहले हुआ करता था जब प्रक्रियाएं भौतिक थीं. इन दिनों सब कुछ ऑनलाइन है. राज्य में 1,535 पुलिस थाने हैं जहां आप या तो डिजिटल माध्यमों से या ऑनलाइन अपनी एफआइआर दर्ज कर सकते हैं. मामले रिपोर्ट नहीं होने का तो सवाल ही नहीं है.
राज्य में कोविड से हुई मौतों के मामले में भी यही आरोप लगे. बड़ी तादाद में मौतें हिसाब में ही नहीं ली गईं, गंगा के किनारे शवों की अंत्येष्टि कर दी गई...
जो भी ऐसा कहता है, उससे बड़ा फ्रॉड कोई नहीं होगा. दुनिया ने उत्तर प्रदेश के कोविड मॉडल की सराहना की है. यह वैश्विक उदाहरण होने योग्य है और हमने ऐसा प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में किया. हमारी सारी सेवाएं—जांच की संख्या, कितने अस्पतालों में भर्ती हुए, कितने आइसोलेशन में हैं—हमारे ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाई देते हैं. पोर्टल पर यह जानकारी कोई भी देख सकता है.
ऐसी गलत सूचनाएं वे लोग फैला रहे हैं, जिनके पास कोई विकल्प नहीं है, वे लोग जो पहले सत्ता के दलाल थे और अब उनके पास कोई काम नहीं रह गया है.
आपकी सरकार कहती है कि आपके कार्यकाल में 4 लाख करोड़ रु. के निवेश हुआ. क्या ये अभी महज प्रस्ताव भर हैं?
4 लाख करोड़ रुपए की योजनाएं जमीन पर लागू हो गई हैं. इनमें से आधी इकाइयों में उत्पादन शुरू भी हो गया है. हमने राज्य में 1.61 करोड़ युवाओं को रोजगार दिया है. उत्तर प्रदेश में बेहतर कानून और व्यवस्था के साथ सुधारों और हर क्षेत्र की नीतियों से भी मदद मिली.
2016 में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में उत्तर प्रदेश 14वें स्थान पर था. अब यह दूसरे स्थान पर है. ये उपलब्धियां सुधारों का नतीजा हैं. इस तरह उत्तर प्रदेश औद्योगिक केंद्र की तरह उभर रहा है. राज्य अब देश के तीन शीर्ष निवेश गंतव्यों में है.
क्या आप इसे 'योगीनॉमिक्स’ कहेंगे?
यह योगीनॉमिक्स नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की इकोनॉमिक्स है. यह केवल निवेश ही नहीं है, यह रोजगार से जुड़ा है.
बेरोजगारी के इस चुनाव में बड़ा मुद्दा होने की उम्मीद है?
उत्तर प्रदेश में 2015-16 की बेरोजगारी दर और आज की बेरोजगारी दर देखनी चाहिए. सीएमआइई डेटा उत्तर प्रदेश की मौजूदा बेरोजगारी दर 4.9 फीसद बताता है जबकि 2016-17 में यह 18 फीसद थी.
आवारा मवेशियों का संकट चुनाव में मुद्दा बन गया मालूम पड़ता है.
यह चुनावी मुद्दा नहीं है. इसे वे लोग उठा रहे हैं जो अवैध पशुसंहार में लिप्त हैं. हमने उनके गैरकानूनी कत्लेआम और मवेशियों की तस्करी को खत्म कर दिया. और हम गोवंश योजना भी लेकर आए ताकि मवेशियों को संरक्षण और इस योजना में भाग लेने वाले किसानों को प्रोत्साहन लाभ दे सकें.
अगर आप दोबारा चुने जाते हैं, तो अगले पांच साल में क्या करना प्रस्तावित करते हैं?
हमने अगले पांच साल का रोडमैप तैयार कर लिया है. उत्तर प्रदेश एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा. हमारी समितियां इस दिशा में पहले ही काम कर रही हैं. एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का मतलब है प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना. इससे आम आदमी की जिंदगी में खुशी आएगी, उनका जीवन स्तर ऊंचा उठेगा. उत्तर प्रदेश मॉडल बाकी देश के लिए उदाहरण बनेगा.
अगर आप हार जाते हैं, तो उस स्थिति में राजनीति करते रहेंगे या फिर लौटकर मंहत बन जाएंगे?
मैंने कभी हार स्वीकार नहीं की और न मैं कभी हारा.
आप अखिलेश यादव को क्या संदेश देना चाहेंगे?
राजनैतिक दल का नेता होने के नाते अखिलेश जी को चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है. लेकिन उन्हें 10 मार्च, 2022 को जबरदस्त हार के लिए तैयार रहना चाहिए.
—साथ में प्रशांत श्रीवास्तव
पिछले 70 साल में राज्य में केवल डेढ़ एक्सप्रेसवे का निर्माण हुआ था. फिलहाल हम छह पर काम कर रहे हैं. 2016 में उत्तर प्रदेश में दो एयरपोर्ट थे, अब नौ एयरपोर्ट काम कर रहे हैं
यह भाजपा ही थी जिसने तीन तलाक की बुराई को खत्म किया. क्या मुस्लिम महिलाएं न्याय की हकदार नहीं हैं? जब हमने मकान आवंटित किए, क्या हमने यह देखा कि लाभार्थी हिंदू है या मुसलमान? सभी को हमारी योजनाओं का बराबर फायदा मिला
महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने के बजाए हम उनको सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. हमारा मिशन शक्ति कार्यक्रम उनके सम्मान, सुरक्षा और उनकी आत्मनिर्भरता से जुड़ा है.

