एक मंत्री ट्वीट के कारण अपना पद गंवा देता है, सुषमा स्वराज आपके मेल के चलते अपना पद गंवा सकती हैं, जबकि आप इस सबको लेकर बिल्कुल शांत और आराम से लगते हैं.
मैं बिल्कुल शांत और आराम से नहीं रहूंगा, अगर ईमानदारी से अपना काम करने वाले किसी शख्स को नुक्सान हो जाता है. शशि थरूर ने अपना पद इसलिए गंवाया क्योंकि उन्होंने झूठ बोला. उन्होंने संसद में झूठ बोला. उन्होंने सबसे झूठ बोला कि कोच्चि टीम से उनका कोई लेना-देना नहीं था. फिर क्या हुआ? शशि थरूर दोषी साबित हुए. उन्होंने संसद में इसे स्वीकारा. इसीलिए उनका पद गया. और आखिर में क्या हुआ? उनकी पत्नी की दुर्भाग्यवश मौत हो गई. इस समस्या पर कोई बात ही नहीं करना चाहता है. आज जब सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे का नाम बाहर आ रहा है, तो वे और किसी वजह से नहीं बल्कि इसलिए खुलकर सामने आ रही हैं क्योंकि उन्होंने ऐसा व्यक्ति समझकर मेरी मदद की है जिसके साथ तमाम दूसरे लोगों ने बहुत गलत किया है.
मतलब आप यह मान रहे हैं कि सुषमा और वसुंधरा ने अलग-अलग मौकों पर आपकी मदद की है?
हां, मैं इसे तथ्य को खुलकर स्वीकार करता हूं. मैंने सुषमाजी को फोन किया था. एक ऐसे वक्त में फोन किया था जब ब्रिटेन की अदालतों में यह साबित हो चुका था कि मेरे खिलाफ जो कुछ भी किया गया, वह पिछली सरकार द्वारा राजनैतिक रूप से प्रेरित था और ब्रिटेन में मुझे रहने का अधिकार ब्रिटेन की अदालत दे चुकी थी. इसमें कांग्रेस की सरकार के कारण देरी हुई थी. मैं यह कैसे जानता हूं? सूचना के अधिकार के तहत आपके पास जितने भी दस्तावेज उपलब्ध हैं, वे बताते हैं कि मुझे मई 2012 में ही रहने का अधिकार मिल गया होता लेकिन ब्रिटेन सरकार और भारत सरकार के प्राइवेट ऑफिस की मिलीभगत से यह तय किया गया कि मुझे यह न मिले और इसमें देरी हुई.....सवाल है कि आखिर भारत सरकार का वह कौन-सा गुप्त, निजी अधिकारी है?
कौन है?
मैं अभी बताए देता हूं. वो पी. चिदंबरम हैं.
पी. चिदंबरम ने ही आपका भारत प्रत्यर्पण कराने की कोशिश की थी. वे चाहते थे कि आप भारतीय अदालतों में मुकदमों का सामना करें.
वे ऐसा नहीं कर सकते थे क्योंकि इसका कोई कानूनी आधार नहीं था. चिदंबरम ने ऐसा करने की सिर्फ इसलिए कोशिश की क्योंकि वे मंत्री की कुर्सी पर बैठे थे, क्योंकि मेरे कारण शशि थरूर को जाना पड़ा था. वह सिर्फ एक राजनैतिक प्रतिशोध था, और कुछ नहीं.
आइए, सुषमा स्वराज के मसले को निबटाते हैं. आपने कहा कि उनसे आपके बेहद करीबी रिश्ते हैं-वित्तीय, कानूनी और पारिवारिक.
वित्तीय नहीं. वे मुझसे अपनी सेवाओं के लिए पैसे नहीं लेते.
वे आपसे सेवाओं के लिए पैसे नहीं लेते? क्या वे निःशुल्क सेवाएं आपको देते हैं? क्या स्वराज परिवार ने आपको निःशुल्क कानूनी सेवाएं दीं?
बेशक, क्योंकि हमारे रिश्ते बहुत प्रगाढ़ हैं. वे मुझे सलाह देते हैं और मैं उसे मानता हूं.
तो, इसमें आपको कोई हितों का टकराव नजर नहीं आता कि उन्होंने आपको उपकृत करने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर लिखा...
उन्होंने मुझ पर एहसान किया, और बेशक विदेश मंत्री के बतौर ऐसा किया. कोई भी उस वक्त विदेश मंत्री होता तो मैं उससे मदद करने को कहता क्योंकि यह भारत सरकार और ब्रिटेन सरकार के प्राइवेट अफसर के गोपनीय दस्तावेजों में रिकॉर्ड पर था.
सरकार बदलने पर ही आपको अचानक मानवीय आधार की याद क्यों आई? क्या ऐसा इसलिए कि कीथ वाज ने आपसे कहा था कि आपको किसी तरह की आपात स्थिति दिखानी होगी?
वास्तव में आपात स्थिति ही थी. मैंने दूसरी सरकार के साथ ऐसा क्यों नहीं किया? कई बार किया. मैंने 2012 और 2013 में भी कहा था कि मेरी पत्नी बीमार है और उसे इलाज की जरूरत है. उस वक्त मेरी पत्नी को पुर्तगाल कौन ले गया था? वसुंधरा राजे. यह कोई नहीं जानता लेकिन मैं आज इसे सार्वजनिक रूप से कह रहा हूं. मैं उस वक्त नहीं जा सकता था इसलिए वे ले गईं. वह बहुत बीमार थी.
आपकी पत्नी को कैंसर के इलाज के लिए 2012 और 2013 में वसुंधरा राजे पुर्तगाल ले गई थीं?
हां, लेकिन 2014 में उन्हें लिवर कैंसर निकला. वह बहुत भयावह था.
क्या यह सच है कि उसके तीन दिन बाद ही आप इबिजा में सैर-सपाटा कर रहे थे?
कैंसर का यह उपचार इंकलाबी है. अगर यह कामयाब रहा तो आप सीधे अपने बिस्तर से उठकर टहलते हुए डिनर करने जा सकते हैं. इसे समझना बेहद जरूरी है क्योंकि बहुत से लोग यह नहीं समझते. हमने जब ऐसा करने का जोखिम उठाया और करवाया, तो कैंसर को निकाल दिया गया और हमारा जीवन बेहतर हो गया. हम बहुत खुश थे. तीन दिन बाद ही हम जश्न मनाने के लिए इबिजा में थे. हां, हम वहां थे क्योंकि हम इस बात से खुश थे कि एक जानलेवा बीमारी को खत्म कर दिया गया है और अब हमारी जिंदगी में कुछ चैन आ गया है.
आपने कहा कि वसुंधरा राजे 2012 और 2013 में आपकी पत्नी को लेकर कैंसर का इलाज कराने गई थीं. वसुंधरा राजे से आपका क्या रिश्ता है? अभी जो दस्तावेज सामने आए हैं, उनके मुताबिक जब आप 2011-12 में ब्रिटेन में आवास चाहते थे तो वे उस वक्त गवाह थीं?
वसुंधरा राजे से मेरा रिश्ता आज का नहीं, 30 साल पुराना है. उनसे मेरा पारिवारिक रिश्ता है. हर कोई इसके बारे में जानता है. इस बारे में अटकलबाजी करने का कोई मतलब नहीं है. हमारी शादी के वक्त से ही वे हमारे परिवार और मेरी पत्नी की करीबी दोस्त रही हैं. वे हमारे बहुत करीब हैं. मीडिया इस बात को जानता है. हर कहीं मेरी उनके साथ तस्वीरें हैं.
आइए, तथ्यों पर बात करते हैं. तथ्य यह है कि संडे टाइम्स... तथ्य यह भी है कि भारत में आपके खिलाफ कई आरोप लंबित हैं. ईडी का नोटिस है.
एक सेकंड, पहले संडे टाइम्स वाला मसला देख लें. आखिर द संडे टाइम्स मेरे पीछे क्यों पड़ा है? मैं बताता हूं. यह बड़ा मसला है. द संडे टाइम्स का मालिक कौन है?
रूपर्ट मर्डोक
आइपीएल और बीसीसीआइ के साथ रूपर्ट मर्डोक का संबंध क्या है?
क्या आप अब बीसीसीआइ और आइपीएल का एंगल ला रहे हैं?
मैं आपको वह एंगल बताता हूं. चैंपियंस लीग टी-20, जिसके अनुबंध पर मैंने बीसीसीआइ के साथ दस्तखत किए थे, वह कई अरब डॉलर का अनुबंध है जिसमें दस साल तक बाहर निकलने का कोई प्रावधान नहीं है. मर्डोक ने मुझसे निजी तौर पर पहले कहा है कि अनुबंध से बाहर निकलने का मैं कोई तरीका खोजूं. अभी से लेकर अगले तीन साल तक भुगतान कोई 80 करोड़ डॉलर के आसपास होगा. इससे बाहर निकलने का कोई प्रावधान नहीं है और ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जो इस अनुबंध को रद्द होने देगा, लेकिन अचानक इसे रद्द किया जा रहा है. असली सवाल यही है और वे चाहते हैं कि मैं इसके बारे में खुलकर बात न करूं.
सुषमा जी ने मेरी मदद करके ठीक किया: ललित मोदी
आइपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने इंडिया टुडे टीवी के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को मोंटीनीग्रो में एक विशेष साक्षात्कार दिया है. भारत सरकार उनके मामले पर जब घिरी हुई थी, तब वे एड्रियाटिक सागर के किनारे छुट्टियां मना रहे थे. कुछ अंशः

अपडेटेड 22 जून , 2015
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