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‘‘मंदिर बनाना हिंदुस्तान का एजेंडा है’’

एनडीए के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आजतक चैनल के सीधी बात कार्यक्रम में हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल से बातचीत की. वे कहते हैं कि राम मंदिर बीजेपी और एनडीए के एजेंडे में हमेशा रहा है. पेश हैं, बातचीत के प्रमुख अंश:

अपडेटेड 5 अगस्त , 2013
 लगता है लालकृष्ण आडवाणी की भविष्यवाणी सही साबित हो रही है. सभी लोग यूपीए के भ्रष्टाचार, घोटाले भूल यह पूछ रहे हैं कि मोदी आपको पसंद हैं कि नहीं?
आडवाणी जी की जो शंकाए थीं वे दूर हुई हैं या नहीं, इस पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता. पर मोदी के साथ उनकी मीटिंग हुई थी और उन्होंने अपना इस्तीफा भी वापस ले लिया था. जहां तक मोदी का सवाल है तो जिन विवादों की चर्चा हो रही है वे सब धीरे-धीरे ठीक हो जाएंगे.

अमित शाह अयोध्या जाकर कहते हैं कि राम मंदिर यहीं बनेगा, वहीं राजनाथ बचाव में बयान देते हैं. आपके चुनावी एजेंडे में लिखा क्या है?
राम मंदिर बीजेपी और एनडीए के एजेंडे में हमेशा से रहा है. बीजेपी और एनडीए में कोई फर्क नहीं है. मंदिर तो बनना ही है. मैं तो कहता हूं कि यह हिंदुस्तान का एजेंडा है.

यानी आप कह रहे हैं कि अगर 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो बीजेपी अयोध्या में राम मंदिर बनवाएगी.
बिलकुल बनवाएगी, और बनवाना भी चाहिए.

मोदी बयान देते हैं कि कुत्ते का पिल्ला गाड़ी के नीचे आ जाए तो दर्द होता है. इसका क्या अर्थ है?
गांव के लोगों को यह बात समझ आती है.

पर दंगों के वक्त मोदी ही इंचार्ज थे.
1984 के दंगों के वक्त कौन इंचार्ज था? भागलपुर के दंगों में कौन इंचार्ज था?

आप सवाल का जवाब नहीं दे रहे.
गुजरात दंगों में एक भी एफआइआर मोदी के नाम पर नहीं है. और ये केस बनावटी लगते हैं.

आप राहुल गांधी को बुद्धू कहते हैं लेकिन ये बुद्धू तो बड़ा होशियार निकला. जब से वे उपाध्यक्ष बने हैं, पार्टी को कर्नाटक में जीत मिली और वे कांग्रेस की छवि बदलने में काफी हद तक सफल रहे हैं.
बीजेपी का वोट 9 फीसदी घटा है लेकिन कांग्रेस का वोट 1 फीसदी भी नहीं बढ़ा. कर्नाटक में वोट का विश्लेषण करना चाहिए.

ट्विटर पर आप राहुल पर सवाल उठाते रहते हैं पर हकीकत है कि जब से राहुल वाइस प्रेसिडेंट बने हैं, नई-नई रणनीति बना रहे हैं.
कांग्रेस अभी यह तक तो तय नहीं कर पाई है कि चुनाव अगले साल करवाने हैं या अक्तूबर में.

अक्तूबर में चुनाव के सपने तो आप ही देख रहे हैं क्योंकि कांग्रेस तो पहले ही कह चुकी है कि चुनाव 2014 में ही होंगे.
वे आखिरी वक्त तक नहीं बताएंगे कि चुनाव अक्तूबर में करवाना चाहते हैं.

मोदी ने खुद को हिंदू राष्ट्रवादी क्यों कहा? वे भारतीय राष्ट्रवादी भी कह सकते थे.
मोदी से किसी ने सवाल पूछा था कि वे हिंदू राष्ट्रवादी हैं? उन्होंने कहा कि हां, हिंदू भी हूं और राष्ट्रवादी भी. उन्होंने केवल बयान दिया था.

आपकी नीति यह है कि हिंदू वोट बैंक एक हो जाए और मुस्लिम वोट बैंक बंट जाए?
बिलकुल. मेरा तो मानना है कि हिंदू वोट बैंक इकट्ठा करो, मुसलमान वोट बैंक को बांटो.

धर्म के नाम पर राजनीति देश के लिए खतरनाक है?
ऐसी राजनीति क्यों नहीं होनी चाहिए? हम 80 फीसदी हिंदू हैं और अगर 14 प्रतिशत मुसलमानों में से 7 प्रतिशत हमारे साथ आ भी जाएंगे तो यह खतरनाक कैसे हो जाएगा. आज शिया और कई मुसलमान हमारे साथ हैं.
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