केंद्रीय रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने आजतक चैनल के सीधी बात कार्यक्रम में हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल से बातचीत की. पेश हैं, बातचीत के प्रमुख अंशः
जनता जानना चाहती है कि रेल किराया क्यों बढ़ाया गया? आखिर जनता पर बोझ क्यों बढ़ाया जा रहा है?
जब भी बाजार में किसी चीज की कीमत बढ़ती है तो उपभोक्ता को तकलीफ होती है. रेलवे का नेटवर्क बड़ा है, जिस पर 2.30 करोड़ लोग रोजाना सफर करते हैं. दस साल में किराए नहीं बढ़े. और अगर किराए नहीं बढ़े तो नया रेलवे स्टॉक बढ़ाने, रेलवे के नवीनीकरण, सुरक्षा की बातें, जितना एलोकेशन की बातें हम करते हैं वह नहीं कर पाएंगे. दस साल में बस का किराया, और बाकी चीजों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं.
उसी से तो जनता त्रस्त है.
इसे एक्स्ट्रा बोझ नहीं माना जाना चाहिए. किसी चीज में ज्यादा सब्सिडी देते हैं तो वित्तीय घाटा बढ़ता है.
पर किराया बजट में क्यों नहीं बढ़ाया?
पार्लियामेंट ने सरकार को अधिकार दिया हुआ है कि आप जब चाहें, किराया बढ़ा सकते हैं.
बजट अगले महीने आने वाला है. आप इंतजार कर सकते थे.
मैं लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं. किराया 2 पैसे से 10 पैसे बढ़ गया है लेकिन हम लोगों को वे सेवाएं दे सकेंगे जो हमारी जिम्मेदारी है. मुझे विश्वास है कि लोग इस बात को समझेंगे क्योंकि एक अनुमान के अनुसार ढाई महीने में हमारे पास 1,200 करोड़ रु. आएंगे.
पर कहीं-न-कहीं सरकार को टेंशन थी कि बजट सत्र में किराया बढ़ा तो बवाल होगा.
संसद तो हर वक्त फेस करनी है. उसके बिना लोकतंत्र में काम नहीं होता. पर शीतकालीन सत्र के कुछ दिन पहले ही मुझे विभाग मिला था, नया था इसीलिए किराया नहीं बढ़ा सकता था.
जनता को लगता है कि आपको किराया बढ़वाने के लिए ही लाया गया है.
मेरा कार्यकाल पूरा होने पर लोग रियलाइज करेंगे कि पवन बंसल ने किराए बढ़ाए तो उन्होंने अच्छी सेवाएं भी प्रदान की हैं.
सेवाएं कहां हैं? स्टेशनों, डिब्बों की हालत देखिए, चारों ओर गंदगी और बदबू. खाने का वही हाल.
सही कह रहे हैं. कई स्टेशनों पर जाकर देखा है, टॉयलट भी देखे हैं. सोनिया गांधी ने एक चीज मुझसे कही थी, बायो-टॉयलेट लगवाने को. इस साल 2,500 टॉयलेट का प्रावधान कर रहे हैं, जिसको धीरे-धीरे बढ़ाएंगे. एक ही दिन में सब बदल सकता है? किराए बढ़ाए हैं, उसका पैसा आएगा, उसी से कुछ हो पाएगा.
चीन में ट्रेनें 200-250 किमी की रफ्तार से दौड़ती हैं. यहां 60-70 से आगे सुई नहीं बढ़ती.
चीन को हमें उदाहरण के तौर पर लेना चाहिए. उसने तरक्की की है. पर वहां रात में फैसला किया, सुबह लागू. क्या यहां ऐसा हो सकता है?
कीजिए ना, आपको कौन रोक रहा है?
लोकतंत्र और उनके सिस्टम में यही अंतर है.
बीजेपी का कहना है कि यह तो पहली किस्त है. बजट में और बोझ डाला जाएगा.
मैं वादा करता हूं कि बजट में किराया नहीं बढ़ेगा. मैंने यह साल भर के लिए प्लान किया है. लागत लगातार बढ़ रही है, डीजल के दाम ही इतने ऊंचे हो गए. अगर (बढ़े हुए) 6,000 करोड़ रु. डीजल में ही निकल गए तो फिर मैं लोगों के सामने यह बात रखूंगा. पर आज के दिन वह संभावना नहीं है. मैं समझता हूं, 6,600 करोड़ रु. अगले वर्ष मिलेंगे और हम बेहतर सेवाएं दे सकेंगे.
सीधी बात कार्यक्रम आजतक चैनल पर हर रविवार रात 8.30 बजे प्रसारित होता है.

