दो हिंदुस्तानी सैनिकों का सिर कलम करने पर पाकिस्तान को आक्रामक चेतावनी देने के दो दिन बाद सेना प्रमुख बिक्रम सिंह ने प्रधान संपादक अरुण पुरी और डिप्टी एडिटर संदीप उन्नीथन से बातचीत की. मई, 2012 में सेना प्रमुख का पदभार संभालने वाले जनरल ने बताया कि पाकिस्तानी घुसपैठ पूर्वनियोजित थी. उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह न सिर्फ नियंत्रण रेखा, बल्कि संघर्षविराम का भी उल्लंघन कर रहा है.
• दो हिंदुस्तानी सैनिकों का सिर कलम करना क्या पाकिस्तान की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है?
यह सोचा-समझा और पूर्वनियोजित कदम था. 6 जनवरी को उन्होंने आरोप लगाया कि 5 जनवरी की रात उनके यहां घुसपैठ की गई, जो सरासर झूठ था और फिर उन्होंने सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) की मुलाकात कराने की बात की. जिस पर हमने सहमति दे दी थी. उसके बाद 7 जनवरी को उन्होंने हमारे राजनयिक को शिकायत पत्र जारी किया और 8 जनवरी को उन्होंने इस काम को अंजाम दे दिया. इस तरह के काम करने के लिए पहले से योजना बनानी होती है. मैं खुद तीन वर्षों तक कमांडो प्रशिक्षक रहा हूं. आप हडबड़ी में ऐसी कार्रवाई नहीं कर सकते. इसकी योजना पहले बनाई गई होगी, उसके बाद वे ऐसे मौके की तलाश में होंगे जिसमें अपनी इस हरकत को जायज ठहरा सकें. यह सब उनकी चालें हैं जो झूठ की बुनियाद पर खड़ी हैं.
• यह घटना उनके अनुमान से ज्यादा बिगड़ गई, ऐसा सोचने की वजह?
यह टैक्टिकल ऑपरेशन था, चूंकि उन्होंने जेनेवा समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया था इसलिए इसके कूटनीतिक परिणाम तो सामने आते ही. नियंत्रण रेखा का अतिक्रमण और हमारे सैनिकों का सिर काटकर उसे अपने साथ ले जाना और उनके शरीर को क्षत-विक्षत करना बहुत गलत था जिसे सही स्तर पर उठाना जरूरी था. हमें पाकिस्तान को बताना था कि ये सब युद्ध और सेना की आचार संहिता के विरुद्ध है और आप ऐसा काम करके बच नहीं सकते.
• पाकिस्तान ने अंदाजा तो लगाया ही होगा कि कैसी प्रतिक्रिया होगी? क्या आपको लगता है कि घुसपैठ जान-बूझकर की गई?
वह नियंत्रण रेखा के आसपास हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहा है. उल्लंघन की ज्यादातर घटनाएं उड़ी और मेंढर के आम घुसपैठ वाले इलाके में होती रही हैं. वे इन इलाकों में घुसपैठ की गतिविधियों में इजाफा कर संघर्षविराम का उल्लंघन करते हैं.
• ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि भारतीय सेना ने पाकिस्तानियों के साथ ऐसा ही काम किया है.
नहीं, हमने ऐसा कुछ नहीं किया. हम जेनेवा समझौते का सम्मान करते हैं.
• आपने यह भी कहा कि सही वक्त और सही मौके पर आप जवाब देंगे. क्या यह उचित विकल्प है जबकि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार मौजूद है?
परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का सवाल ही नहीं उठता. लड़ाई एक टकराव से शुरू होती हुई झड़प, मुठभेड़, अभियान और युद्ध तक पहुंचती है. आज की स्थिति में एक टकराव को युद्ध में तब्दील करने की कल्पना भी बेमानी है.
• यह कैसे संभव है कि आप प्रतिक्रिया जताएं और यह उम्मीद भी करें कि स्थिति नहीं बिगड़ेगी?
मैंने नियंत्रण रेखा पर टुकड़ी, बटालियन और सैन्य कोर की कमान संभाली है. इस तरह की बातें नियंत्रण रेखा पर होती रहती हैं, पर चिंता का विषय है सिर काटने जैसी घटना और नियंत्रण रेखा को पार करना. आप हम पर गोली दागें, हम भी वापस गोली चला देंगे. हम इसे संभाल लेंगे. ये सामान्य कार्रवाई है.
• पर तय है कि स्थिति भड़केगी...
इसका यह मतलब तो नहीं कि वे आपको मारते रहें और आप पलटवार न करें? ऐसी गतिविधियां पूरी नियंत्रण रेखा पर नहीं चल रहीं. कुछ खास इलाके में ही ऐसा होता रहता है. हम एलओसी को पार नहीं कर रहे. हम अपने अधिकार के अंदर ही काम कर रहे हैं कि जब दुश्मन वार करें तो करारा जवाब दो.
• सिर कलम करने के मामले में आपको पाकिस्तान से कैसे जवाब की उम्मीद है?
इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानून है और उपयुक्त राजनैतिक और कूटनीतिक स्तरों पर इसका समाधान होना चाहिए. पाकिस्तानी फौज को जवाबदेह बनाना होगा.
• आप कैसे संतुष्ट होंगे?
परिवार की भावनाओं को निश्चित रूप से सम्मान मिले. हम सैनिक का सिर वापस चाहते हैं. पाकिस्तान को फिर से कह दिया गया है कि बिना किसी शर्त हमें हमारे सैनिक का सिर वापस चाहिए.
• अस्त्र-शस्त्र इकट्ठा करने में हो रही देरी के मद्देनजर हम कितने तैयार हैं?
हमारे पास सब कुछ है. सेना के पास पर्याप्त संसाधन हैं. कुछ खास घटकों या गोला-बारूद की कमी का युद्ध के दौरान असर पड़ता है, पर यह स्थिति सिर्फ भारतीय सेना की नहीं है, बल्कि सभी सेनाओं के साथ होती है. इस धरती पर कोई सेना ऐसी नहीं जिसके पास 100 फीसदी साजो-सामान मौजूद हो.
• भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के संबंध में आप क्या कर रहे हैं?
मैंने एक ऐसी व्यवस्था शुरू की है जिसमें हर 15 दिनों पर उप-प्रमुख एक बार सभी मुख्य स्टाफ अधिकारियों से मिलते हैं और अहम बिंदुओं पर विचार कर उसे आगे बढ़ाते हैं. मैंने यह सुनिश्चित किया है कि सामान्य स्टाफ की जरूरतों को (साजो-सामान खरीदने में गुणवत्ता का ध्यान रखने के संदर्भ में) पूरा करने में पारदर्शिता बरती जाए. मैंने इस पर भी खास ध्यान दिया है कि अस्त्र-शस्त्र खरीदते समय उनका परीक्षण सही तरीके से हो और उन्हें वक्त पर उपलब्ध कराया जाए.
• क्या अब सियाचिन के मसले पर पाकिस्तानी सेना पर भरोसा नहीं रहा?
यह हमारा इलाका है. कूटनीतिक तौर पर भी यह बेहद अहम है और हम इस पर अपना अधिकार बनाए रखेंगे. अगर हम सियाचिन खाली कर देते हैं तो पाकिस्तान का क्या भरोसा कि वह इस पर कब्जा नहीं करेगा? उन्होंने हमारे साथ संघर्षविराम के लिए समझौता किया था, पर वे लगातार इसका उल्लंघन करते रहे हैं. आप उन पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? उन्होंने हमारे सैनिक का सिर काट डाला और उस सिर को अपने साथ ले गए.
• सेना को आप अपनी कौन-सी विरासत सौंपना चाहेंगे?
मैं अपने पीछे एक ऐसी सेना छोड़कर जाना चाहता हूं जो सशक्त, प्रभावी और राष्ट्रीय आकांक्षाओं के अनुकूल काम करने वाली हो. मेरा सपना है कि भारतीय सेना की संचालन क्षमता को और मजबूत बनाया जाए जिससे यह किसी भी लड़ाई के लिए हमेशा तैयार रहे.
• हाल में मीडिया में सेना की नकारात्मक छवि पर आप क्या कहना चाहेंगे?
मैं खुश हूं कि मीडिया ने हमारे बारे में नकारात्मक रिपोर्ट पेश की, क्योंकि उससे हमें खुद को बेहतर करने में मदद मिलती है. लेकिन कुछ सकारात्मक तस्वीरें भी पेश करें. कृपया मेरे जवानों के बारे में बताएं. वे आपके सम्मान के हकदार हैं.

