जसपाल भट्टी
(3 मार्च 1955-25 अक्तूबर, 2012)
बीजेपी ऐसे दिखा रही है जैसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रही है: सोनिया गांधी...और कांग्रेस ईमानदार दिखने की कोशिश कर रही है!?!
यह जसपाल भट्टी का 18 अक्तूबर का ट्वीट है. अपने सीरियल्स, नुक्कड़ नाटकों और फिल्मों के जरिए हमेशा व्यवस्था की खबर लेने वाले जसपाल भट्टी के तीखे व्यंग्य अब और देखने-सुनने को नहीं मिलेंगे. जिस जसपाल भट्टी का नाम सुनने और उनके काम को याद करते लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो जाया करते थे, गुरुवार की सुबह उनके असमय इस दुनिया से जाने की खबर सुनकर उन्हीं लोगों की आंखें नम हो गईं. आम आदमी की मुश्किलों को कॉमेडी की लड़ी में पिरोकर पेश करने वाले भट्टी का 25 अक्तूबर को एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया.
अमृतसर में जन्मे भट्टी ने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. कॉलेज के दिनों में भी वे कॉमेडी के लिए जाने जाते थे और उन्होंने नॉनसेंस क्लब बना डाला था. टीवी की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने द ट्रिब्यून अखबार में कार्टूनिस्ट के तौर पर भी काम किया था. उनके कार्टून लोगों को खूब गुदगुदाते रहे.
1980 और ’90 के दौर में टेलीविजन पर प्रसारित उनके कई शो काफी लोकप्रिय हुए, जिनमें फ्लॉप शो और उल्टा-पुल्टा शामिल हैं. खास बात यह है कि उनके अधिकतर सीरियल्स और फिल्मों में उनकी पत्नी सविता भट्टी भी उनके साथ अकसर नजर आती थीं. हाल ही में उन्होंने पॉवर कट नाम की फिल्म बनाई और वे इसी के प्रचार में लगे हुए थे.
कुछ समय पहले ही भट्टी ने मोहाली में ट्रेनिंग स्कूल और एक स्टुडियो भी स्थापित किया था. सच तो यह है कि वे अपने बात ही सहज और सरल अंदाज से लोगों को हंसने के लिए मजबूर कर देते थे. उनमें एक ताजगी थी जो दर्शकों को अपने साथ बहा ले जाती थी. उनकी भाव-भंगिमाओं का इसमें बड़ा हाथ था. सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन भट्टी लगातार आम आदमी के पक्ष में विपक्ष की भूमिका निभाते रहे. अलविदा भट्टी साहब.

