पटना
हम से 2010 कहा गया था कि यह अपने समय से आगे की हाउसिंग सोसाइटी होगी. यहां बड़ा सा पार्क होगा, किड्स प्लेइंग जोन होगा, कम्युनिटी हॉल होगा, जॉगिंग ट्रैक होगा, एक कस्टमर केयर सेंटर होगा जिसमें लोग अपनी शिकायत कर सकेंगे.
मगर हमें यहां रहते हुए आज आठ साल हो गए हैं, सुविधाओं की तो बात दूर है, अभी सभी ब्लॉक में लिफ्ट भी ठीक से काम नहीं कर रहे. पावर बैकअप नहीं है. फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं, बाउंड्री पूरी नहीं बनी है. ये है वर्ल्ड क्लास सोसाइटी का हाल.’ पाटलिग्राम हाउसिंग सोसाइटी के प्रेसिडेंट रविभूषण यह सब कहते-कहते फट पड़ते हैं.
यह सोसाइटी पटना के कुम्हरार मोहल्ले के बजरंगपुरी में है. रविभूषण बताते हैं, ''सोसाइटी में 24-24 फ्लैट वाले 11 ब्लॉक हैं, यानी कुल 264 फ्लैट हैं. 2012 में हमें फ्लैट देने का वादा किया गया था, मगर मिला 2014 में. आए तो पता चला कि 11 ब्लॉक में से सिर्फ तीन में लिफ्ट लगी थी, ये भी चालू नहीं है.
दो ब्लॉक के लोगों ने चंदा करके लिफ्ट लगवाई. ट्रांसफॉर्मर तक हम लोगों को खुद लगवाना पड़ा, जबकि इसके लिए हर फ्लैट से 50-50 हजार रुपए वह पहले ले चुके थे. हम बिल्डर से शिकायत करते तो वह टालमटोल करता. मजबूरन हमने 2015-16 में स्टेट कंजूमर कोर्ट में मुकदमा कर दिया.’’
सोसाइटी के सेक्रेटरी लक्ष्मण कहते हैं, जब हमने मुकदमा किया तो बिल्डर कंपनी पाटलीपुत्रा बिल्डर्स के मालिक अनिल सिंह ने आकर हम लोगों को मारपीट की धमकी दी.’’ वे बताते हैं, '' मगर मुकदमा करने से हमें फायदा हुआ. उस वन्न्त कंज्यूमर कोर्ट ने आकलन किया तो पता चला कि इस सोसाइटी का एक करोड़ से अधिक का काम अभी नहीं हुआ है.
ऐसे में हमें सेंट्रल कंज्यूमर कोर्ट में जाने की सलाह दी गई. हमने 2018-19 में वहां मुकदमा कर दिया. वहां मुकदमा करने के बाद यहां बिल्डर मजबूरी में काम करने लगा. अब सभी ब्लॉक में लिफ्ट लग गई हैं.’’ बिल्डर ने एक छोटा जेनरेटर रख दिया है पर अभी कनेक्शन नहीं दिया है. पिछले हिस्से में किसी से जमीन का विवाद है सो बाउंड्री भी नहीं बनी है. अक्सर चोर आ जाते हैं.’’
सोसाइटी के कई सदस्यों ने कमियां होने के कारण अलग से भी बिल्डर पर मुकदमा किया है. सोसाइटी के सदस्य कहते हैं कि यह प्रोजेक्ट आज भी अधूरा है. हमने पैसा लगा दिया सो हमें यहां मजबूर होकर रहना पड़ रहा है. कई सदस्य बिल्डर पर रजिस्ट्री के वक्त एक से चार लाख रुपए तक अधिक राशि लेने का भी आरोप लगाते हैं. प्रेसिडेंट रवि भूषण कहते हैं कि खुद उनसे 4.6 लाख रुपए अधिक लिए गए और पैसे न देने पर रजिस्ट्री नहीं करने की धमकी दी गई.
बिहार में भी बिल्डरों की मनमानी से जुड़ी खबरें अक्सर सामने आती हैं. 2016 में पटना के एक व्यवसायी ने इसलिए खुदकुशी कर ली थी, क्योंकि एक बिल्डर ने उससे पैसे लेने के बावजूद फ्लैट का पजेशन उसे नहीं दिया था. यह 2016 का मामला है. इसमें निशा रिएलिटी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर बिल्डर प्रभात वर्मा का नाम सामने आया था. संजय अग्रवाल खरीदार थे, फ्लैट नहीं मिलने पर उन्होंने अपनी पत्नी शैला अग्रवाल के साथ जहर खाकर जान देने की कोशिश की थी. संजय अग्रवाल की मौत हो गई, शैला अग्रवाल को बचा लिया गया.
इसी तरह 2018 में रियलाइज रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड नाम कंपनी पर दानापुर के इलाके में सिग्नेचर सिटी नाम के तीन प्रोजेक्ट के जरिये ग्राहकों से 40 करोड़ से अधिक राशि वसूल ली. एक प्रोजेक्ट पर तो थोड़ा बहुत काम हुआ, बाकी दो प्रोजेक्ट पर काम ही नहीं हुआ. 2021 में बिल्डर दफ्तर बंद करके फरार हो गया.
ग्राहकों ने पटना हाइकोर्ट में बिल्डर के खिलाफ केस किया है. रेरा के आने के बाद से मामलों में थोड़ी कमी आयी है. रेरा ने अब तक बिहार के 224 प्रोजेक्ट को अनियमितता की वजह से रिजेक्ट किया है. इसके साथ-साथ शिकायत करने वाले ग्राहकों को मुआवजा भी दिलवाया है.
1453 -प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हुए रेरा के पास बिहार में अगस्त 2022 तक.
—पुष्यमित्र

