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डार्क मोड

आवरण कथाः उम्मीद की डोर

यह 2024 के आम चुनाव का ट्रेलर बन सकता है. सच तो यह है कि हमारे लेखक ज्यादातर दूसरों के मुकाबले महामारी से कम मायूस मालूम देते हैं.

भविष्य के रुझान 2022
भविष्य के रुझान 2022
अपडेटेड 14 जनवरी , 2022

एक महीना कितना उलटफेर कर देता है. अप्रैल में इसके दिखाए बदतरीन वक्त को पीछे छोड़कर नवंबर 2021 की शुरुआत में हम भूलने और मौज-मस्ती के साथ छुट्टियां मनाने के मौसम की तरफ बढ़ रहे थे. सामन्य हालात नहीं भी तो कम से कम 'न्यू नॉर्मल’ (नया सामान्य) आने वाले साल का सूत्रवाक्य लगता था. वह और 'मकामी खूबी’. तभी 26 नवंबर को हमें ज्यादा बड़ा सूत्र मिला: ओमिक्रॉन.

हमारे नववर्ष विशेषांक के चौदह निबंध उम्मीद और सतर्कता का संतुलन होने जा रहे थे, लेकिन आप देखेंगे कि वे दिसंबर की संततियां हैं—गंभीर, अगर निराशाजनक न भी हों, उनका आशावाद सतर्कता से सहेजी गई स्मृति है. हमारे अर्थशास्त्री रुकावटों और नई चुनौतियों से आगाह कर रहे हैं, हमारे प्रतिष्ठित महामारी विशेषज्ञ शाश्वत सतर्कता की सलाह दे रहे हैं और हमारे भूराजनैतिक विशेषज्ञ दुनिया के अनिश्चितताओं से भरा होने का वायदा कर रहे हैं.

भारतीय राजनीति बेशक अपने आप में एक दुनिया है, ऐसी दुनिया, जिसमें इस साल हम उम्मीद कर सकते हैं कि एकाधिक राज्यों के चुनावों में मौजूदा संकट के कांटे में चुनावी अवसरों को फंसाया जाएगा. यह 2024 के आम चुनाव का ट्रेलर बन सकता है. सच तो यह है कि हमारे लेखक ज्यादातर दूसरों के मुकाबले महामारी से कम मायूस मालूम देते हैं.

उनकी नजरें वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय के दीर्घकालिक उभार पर टिकी हैं या वे तेजी से नए डिजिटल मोड़ की तरफ ले जाने वाली हमारी कामकाजी दिनचर्या में उथल-पुथल का स्वागत कर रहे हैं.

हमारी जलवायु परिवर्तन भविष्यवक्ता तो कोविड संकट का कतई जिक्र ही नहीं करतीं, बल्कि अपने 'सामान्य कामकाज’ के आह्वान में वे यह सुझाव देती हैं कि अगर महामारी 'पर्यावरण के लिए अच्छी’ वाकई नहीं रही तो भी इसने हमें अपनी प्राथमिकताओं के बारे में ठहरकर सोचने का वक्त दिया है, जिसके बारे में नए साल में जरूर सोचा जाएगा.

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