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सुर्खियों के सरताजः बेमेल साथी

उन्होंने सत्ता में भागीदारी के अपने साझा लक्ष्य के लिए पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को किनारे रखा और महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू किया.

साझा मकसद सरकार बनाने का फैसला लेने के तुरंत बाद शरद पवार और उद्धव ठाकरे
साझा मकसद सरकार बनाने का फैसला लेने के तुरंत बाद शरद पवार और उद्धव ठाकरे
अपडेटेड 1 जनवरी , 2020

शरद पवार, 79 वर्ष, एनसीपीउद्धव ठाकरे, 59 वर्ष, शिवसेना

राजनीति धुर विरोधियों को भी एक कर देती है. हाल ही तक अलग-अलग ध्रुवों पर खड़े उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने बेहद नाटकीय घटनाक्रम में कांग्रेस के साथ मिलकर नवंबर में असमान्य गठबंधन बनाया. वह भी तब जब ठाकरे कहा करते थे कि पवार भरोसेमंद नहीं हैं. वहीं पवार ने ठाकरे को एक 'नौसिखिया' कहा था जो अर्थव्यवस्था और खेती को नहीं समझता.

नागपुर में 19 दिसंबर को पत्रकारों से बातचीत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनके लिए यह स्वीकार करना मुश्किल रहा कि उनकी पार्टी शिवसेना ने लंबे वक्त तक अपनी सहयोगी भाजपा से रास्ते अलग कर लिए हैं. वैसे भाजपा लगातार उनकी पार्टी को दरकिनार कर रही थी. अक्तूबर में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ठाकरे को माकूल मौका मिल गया, जब भाजपा (105 सीटों के साथ) अपने बूते साधारण बहुमत पाने में नाकाम रह गई. उसे कुल 288 विधानसभा सीटों में सिर्फ 105 सीटें मिलीं. अपने 56 विधायकों के साथ, ठाकरे ने पहली बार ठाकरे परिवार के किसी शक्चस को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने के लिए एनसीपी और कांग्रेस की मदद लेने का फैसला लिया.

एक हिंदुत्व एजेंडे को समर्थन देने वाली पार्टी को लेकर शुरुआती संदेहों के बावजूद भाजपा को सत्ता के दूर रखने के साझे मकसद ने इस गठबंधन को जमीन पर उतारा. एनसीपी प्रमुख पवार भाजपा और शिवसेना के घटनाक्रमों पर निगाह रख रहे थे. उन्होंने राज्य का नेतृत्व करने की ठाकरे की महत्वाकांक्षा का फायदा उठाया, उन्हें हिंदुत्व के मुद्दे पर नरम होने को कहा ताकि कांग्रेस गठबंधन में शामिल हो. हिंदुत्व कांग्रेस और शिवसेना के बीच मुख्य वैचारिक विरोध का मुद्दा था.

क्या यह असंगत राजनीतिक गठजोड़ चलेगा? पवार को प्रशासन और विधायी कामकाज का लगभग 50 वर्षों का अनुभव है. वहीं ठाकरे इस मामले में नवागंतुक हैं. पवार राजनीतिक वफादारी के मामले में अस्थिर रहे हैं, जबकि ठाकरे ने पहली बार अपने राजनीतिक सहयोगियों को गच्चा दिया है. हालांकि उनमें कई समानताएं हैं. दोनों का अपनी पार्टियों पर पूरा नियंत्रण है. उनके लक्ष्य स्पष्ट हैं. उनके अच्छे पारिवारिक संबंध भी हैं. पवार ने इस गठबंधन के निर्माण की अगुआई की है. ऐसे में वे इस गठबंधन को छोडऩे वाले नहीं हैं. पवार आशान्वित हैं. वे कहते हैं कि सेना, कांग्रेस और एनसीपी कार्यकर्ताओं ने स्वीकार कर लिया है कि उन्हें सरकार का अस्तित्व बचाए रखने के लिए एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.

ठाकरे का भी कहना है कि कार्यकर्ता जमीनी स्थिति को चतुराई से संभाल रहे हैं. उन्होंने अपने मतभेदों को खत्म कर दिया है, यह इससे भी पता चलता है कि उन्होंने आपसी बैठकों का सिलसिला बढ़ा दिया है. 12 दिसंबर को पवार के जन्मदिन के मौके पर पहली बार ठाकरे अपने परिवार के साथ उन्हें शुभकामना देने उनके घर गए. बदले में पवार ने भी ठाकरे को एक गंभीर राजनेता करार दिया. अगर उनकी सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करती है, तो वे दोनों निस्संदेह महाराष्ट्र की राजनीति को हमेशा के लिए बदल देंगे.

सुर्खियों की वजह

उद्धव ठाकरे ने तीनों सहयोगियों के लिए समन्वय समिति के गठन का फैसला लिया है ताकि सरकार सुचारु तरीके से चलती रहे

इसके बावजूद कि शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने एनसीपी को तोडऩे और भाजपा के साथ सरकार बनाने की कोशिश की, ठाकरे उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह देने को राजी हुए

शरद पवार ने एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता को निर्देश दिया है कि वे प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने में ठाकरे की मदद करें.

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