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डार्क मोड

मोदी के बोलते ही एक्टिव हो जाती है ये कांग्रेसी टीम...

बीजेपी और नरेंद्र मोदी को जवाब देने के लिए कांग्रेस ने नेताओं और रिसर्चरों की समूची ताकत झोंक दी है. बीजेपी और मोदी जैसे ही कोई दावा करते हैं कांग्रेसी निशानेबाज उसकी काट ढूंढकर जवाबी हमला ठोंक देते हैं.

अपडेटेड 31 जुलाई , 2013

बीजेपी के चुनाव प्रचार की कमान नरेंद्र मोदी के हाथ में आने के बाद कांग्रेस की चिंताएं अचानक बढ़ गई हैं. कांग्रेस पूरी तरह से मोदी लहर की काट में जुट गई है. बीजेपी और मोदी को जवाब देने के लिए कांग्रेस ने चुनिंदा नेताओं और रिसर्चरों की पूरी ताकत झोंक दी है. सियासत में एक-दूसरे पर बढ़त हासिल करने की कवायद को उजागर कर रही है ये स्‍टोरी...

नरेंद्र मोदी 14 जुलाई को पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज के खचाखच भरे सभागार में भाषण दे रहे थे. आधा घंटा बोलने के बाद वे हमलावर मुद्रा में आ गए और कांग्रेस की 'छद्म धर्मनिरपेक्षता’ पर इन शब्दों में वार किया, ''जैसे ही कांग्रेस पर कोई संकट आ जाता है, वह सेकुलरिज्म का बुर्का पहन लेती है और बंकर में छुप जाती है. अब इसे बरदाश्त नहीं किया जाएगा.” बयान आते ही उधर कोई 1,400 किमी दूर दिल्ली के पंडित पंत मार्ग की 9 नंबर कोठी में बैठे चार रिसर्चर अचानक सक्रिय हो उठे, जो कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के प्रभारी दीपेंदर सिंह हुड्डा का आवास है.

सोशल मीडिया पर सक्रिय कांग्रेसी नेताओं दिग्विजय सिंह, शशि थरूर, मनीष तिवारी और अजय माकन को फोन घुमाए जाने लगे ताकि मोदी का सटीक जवाब उन्हें बताया जा सके. इसके बाद सोशल मीडिया रिसर्च टीम ने सारे नेताओं को एक एसएमएस भेजा, ''हमें खाकी शॉर्ट्स का इस्तेमाल करते हुए मोदी पर हमला बोलना चाहिए.” शाम तक थरूर ने इसके लिए एक जवाब तैयार कर लिया जो सबको भेजा गया. चूंकि उस दिन इतवार था, सो उन्होंने यह ट्वीट सोमवार की सुबह साढ़े नौ बजे के लिए सेव कर लिया, ''मोदी कहते हैं कि 'हम धर्मनिरपेक्षता के बुर्के में छुप जाते हैं.’ जाहिर है, असहिष्णुता और विद्वेष की उस खाकी निक्कर के सामने यह बात सही भी है, जिसे वे अब छुपाने की कोशिश कर रहे हैं?”

दिन बीतते-बीतते हमला तीखा होता गया. सवेरे 10.30 पर दिग्विजय सिंह ने बुंदेलखंड के कवि अखिल अरजारिया की हिंदी कविता मोदी के बयान को निशाना बनाते हुए ट्वीट की. साढ़े बारह बजे कांग्रेस के संचार प्रकोष्ठ के प्रभारी अजय माकन ने पुणे में मोदी के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डाली. कांग्रेस ने इस अभियान को नाम दिया था 'फैक्ट अटैक’, जो अब पूरे शबाब पर आ चुका था.

राहुल गांधी ने 22 जुलाई को एक शिष्ट बयान दिया. देश भर से आए 240 कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की दो दिवसीय कार्यशाला को दिल्ली में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ''एक स्वर में बोलें. एकजुट रहें और सकारात्मक राजनीति पर ध्यान लगाएं.” यह बयान पहले किए गए उनके फैसले के अनुकूल ही रहा जिसमें कांग्रेस ने मोदी को किसी चिंता या खतरे के तौर पर नजरअंदाज करने की बात कही थी. कांग्रेस के प्रवक्ता और पार्टी की रिसर्च टीम के प्रमुख संदीप दीक्षित इसे कुछ यूं सही ठहराते हैं, ''हम तो सिर्फ उनके झूठे दावों को तथ्यों से चुनौती दे रहे हैं. राहुलजी ने भी हमें तथ्य सामने रखने और सच बोलने को कहा है.”

बीजेपी के चुनाव प्रचार की कमान 8 जून को मोदी के हाथ में आने के बाद से ही कांग्रेस की चिंताएं कई गुना बढ़ गई हैं. कांग्रेस के आकलन के मुताबिक 2014 में यदि 70 फीसदी मतदाता वोट देते हैं, तो इनमें 11 करोड़ नए मतदाता होंगे और करीब 8.8 करोड़ मतदाता 18-25 साल के बीच के होंगे जो पहली बार वोट दे रहे होंगे. मोदी का प्रचार इसी समूह को निशाना बना रहा है. कांग्रेस को लगता है कि मोदी को नुकसान पहुंचा कर ही वह अपनी बढ़त बना सकती है और इस तरह भ्रष्टाचार व कुशासन के आरोपों को भी धुंधला कर सकती है. माकन कहते हैं, ''यदि बीजेपी की चुनाव प्रचार समिति के मुखिया दुष्प्रचार अभियान चलाएंगे तो हमें जवाब तो देना ही पड़ेगा.”

तथ्यों पर ध्यान
मोदी को निशाना बनाने का 'टार्गेट मोदी’ अभियान तीन स्तरों पर चलाया जा रहा है. संदीप दीक्षित के नेतृत्व में उनके दिल्ली स्थित आवास सी-1/16, पंडारा पार्क में बैठने वाली पांच रिसर्चरों की एक टीम मोदी के बताए हर आंकड़े और आर्थिक तथ्य को दर्ज करती है. बयान आने के तत्काल बाद तथ्यों की जांच शुरू हो जाती है और एक रिपोर्ट तैयार कर माकन और हुड्डा की टीम से साझ की जाती है.

हर सुबह दस बजे के आसपास माकन इसे पार्टी के हर नेता और प्रवक्ता से साझ करते हैं और इस पर चर्चा करते हैं कि टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर पार्टी की लाइन क्या रहेगी. मोदी ने 14 जुलाई को पुणे में जब अपने भाषण में रुपये की गिरावट की बात कही, तो दीक्षित की टीम ने इसके खिलाफ एक दलील तैयार की जिसे सुबह नेताओं से साझा किया गया. थरूर ने 16 जुलाई को ट्वीट किया, ''मोदी ने कल कहा: 'आजादी के वक्त 1 रुपया एक डॉलर के बराबर था. अब रुपया गिर रहा है.’ सोवियत रूस के दिनों में एक रूबल बराबर एक डॉलर था. आज 3 सेंट है. तो?”

मोदी के किले में सेंध
कांग्रेस को सबसे ज्यादा चिंता सोशल मीडिया पर मोदी को टक्कर देने की है जहां उनका जबरदस्त समर्थन मौजूद है. कांग्रेस के एक महासचिव कहते हैं, ''हम वहां नहीं हैं. पहली प्राथमिकता इन मंचों पर अपनी उपस्थिति को बढ़ाना है.” 'मोदी फॉर पीएम’ और 'फ्रेंड्स ऑफ  बीजेपी’ की तर्ज पर कांग्रेस ने भी फेसबुक पर 'विद कांग्रेस’ नाम की कम्युनिटी शुरू की है. इस कम्युनिटी के संयोजक सुरेश कलमाडी के करीबी तहसीन पूनावाला हैं.

वे बताते हैं, ''देश में आठ करोड़ लोग फेसबुक पर और तीन करोड़ से ज्यादा ट्विटर पर हैं. आठ करोड़ बड़ी संख्या है. अगर इसके आधे भी वोट देते हों, तो हम इसकी उपेक्षा नहीं कर सकते.” पूनावाला जल्द ही हुड्डा की टीम में राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक का प्रभार संभालने वाले हैं.

कांग्रेस की सोशल मीडिया संबंधी रणनीति से जुड़े एक नेता बताते हैं, ''हम एक साप्ताहिक योजना पर काम कर रहे हैं जिसे क्षेत्र में हर सांसद अपनाएगा. राष्ट्रीय स्तर के नेता मोदी विरोधी रणनीति की दिशा तय करते हुए हमले करेंगे तो बाकी सांसद अपने इलाकों में उनके संदर्भ और टिप्पणियों का इस्तेमाल प्रचार के लिए करेंगे.”

यह साप्ताहिक योजना उत्तरी मुंबई के सांसद संजय निरुपम ने बनाई है और महीनेभर में इसे लागू कर दिया जाएगा. इसके मुताबिक शुरू के दो दिन सोशल मीडिया टीम फेकू बनाम तथ्यों पर काम करेगी. अगले दो दिन वे सोशल मीडिया पर यूपीए सरकार की उपलब्धियों पर बात करेंगे. पांचवें और छठवें दिन वे अपने इलाकों में स्थानीय मसलों पर बात करेंगे.

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मोदी पर हमले की जिम्मेदारी माकन और उनकी टीम संभालेगी. हुड्डा सोशल मीडिया पर हेट मोदी (मोदी से नफरत) अभियान चलाएंगे. दोनों में दीक्षित और उनकी टीम का रिसर्च सहयोग रहेगा. इन टीमों के बीच बेहतर समन्वय के लिए खिड़की नाम के एक नए सोशल मीडिया मंच को लाया गया है जो पार्टी लाइन के हिसाब से विचारों और दिशानिर्देशों को साझ करेगा. हाल में दो दिन की कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले सारे नेताओं को 'खिड़की’ (कांग्रेस ने वेबसाइट लॉन्च की है) के यूजर आइडी और पासवर्ड दे दिए गए हैं. बाकी के लिए सदस्यता सिर्फ इनविटेशन से संभव होगी.

हेट मोदी अभियान में तब अचानक एक दिलचस्प मोड़ आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को लिखा एक पत्र 24 जुलाई को दोबारा सार्वजनिक हुआ जिसमें मोदी को वीजा न दिए जाने का अनुरोध किया गया था. इसे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने लिखा था और इस पर 40 राज्यसभा सांसदों और 25 लोकसभा सांसदों के दस्तखत थे. अदीब के मुताबिक यह पत्र ओबामा को पहली बार 26 नवंबर और फिर 5 दिसंबर को पिछले साल भेजा गया था. अदीब का दावा है कि बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अमेरिका में वीजा का मुद्दा उठाया, इसलिए उन्होंने दोबारा इसे फैक्स किया.

इस घटना के बाद कांग्रेस अचानक नुकसान को थामने में जुट गई है. दिग्विजय ने कहा, ''हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. मोदी को वीजा देना अमेरिकी सरकार का अपना मामला है.” विदेश राज्यमंत्री परणीत कौर ने कहा, ''इस तरह की मांग करना किसी के लिए भी सही नहीं है. यह अमेरिका को ही तय करना है.” इस पूरे विवाद का लाभ आखिरकार मोदी को ही मिला है क्योंकि यह घटना उन्हें विद्वेषपूर्ण दुष्प्रचार के शिकार के तौर पर पेश करती है.

कांग्रेसी नेता मानते हैं कि सोशल मीडिया पर उपस्थिति और युवाओं से जुड़ाव के मामले में वे मोदी के मुकाबले बहुत पीछे हैं. एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कहते हैं, ''वहां कुछ मोदी के चाहने वाले होंगे तो कुछ दूसरे कांग्रेस के समर्थक भी, लेकिन तमाम लोग ऐसे होंगे जिनका पक्ष तय नहीं है. हम उन्हें टार्गेट कर रहे हैं.”

कुछ बड़े कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि हेट मोदी अभियान के साथ सबसे बड़ी समस्या यही है कि वह उल्टा असर कर सकती है. एक केंद्रीय मंत्री कहते हैं, ''अभियान बड़े मुद्दों पर होना चाहिए, व्यक्तियों पर नहीं. मोदी पर ज्यादा ध्यान देने से उन्हें ही फायदा होगा.”

मोदी से निपटने के लिए कांग्रेस के पास जितने तीर हैं, मोदी इन सबका लंबे समय से इस्तेमाल करते रहे हैं. इन्हें सिर्फ पैना करने से कुछ नहीं होने वाला, कांग्रेस को नए औजार जुटाने ही होंगे. लेकिन पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि मोदी के विरोध में आडवाणी धड़ा मुखर है और इस खेमे के वरिष्ठ नेता शायद ही मोदी के बचाव में सामने आएं.

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