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बहुतेरे हैं सरबजीत, पर सरकार को फिक्र नहीं

भारतीय मछुआरों के हत्यारे अपने दो नौसैनिकों को हाल ही में इटली ने जिस तरह पहले जमानत पर रिहा कराया और फिर अपनी शर्तों पर भारत को सौंपा. क्या ऐसा साहस भारत अपने नागरिकों के मामले में दूसरे देशों के साथ दिखा सकता है? इस सवाल का जवाब लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद में हुई बहस में बेहद सहजता से मिल जाता है.

अपडेटेड 11 मई , 2013

भारतीय मछुआरों के हत्यारे अपने दो नौसैनिकों को हाल ही में इटली ने जिस तरह पहले जमानत पर रिहा कराया और फिर अपनी शर्तों पर भारत को सौंपा. क्या ऐसा साहस भारत अपने नागरिकों के मामले में दूसरे देशों के साथ दिखा सकता है? इस सवाल का जवाब लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद में हुई बहस में बेहद सहजता से मिल जाता है.

सरकार संसद में पिछले कई साल से सांसदों की ओर से विदेश की जेलों में बंद भारतीय नागरिकों के बारे में पूछे जा रहे सवाल का सिर्फ इतना जवाब देती आ रही है, ‘‘आंकड़े जुटाए जा रहे हैं.’’ लेकिन अब सूचना के अधिकार के तहत विदेश मंत्रालय ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक दुनिया के करीब 71 देशों में 6,569 भारतीय नागरिक बंद हैं. इनमें सर्वाधिक यानी आधे से ज्यादा तीन खाड़ी देशों सऊदी अरब (1691), कुवैत (1161)और यूएई (1012) की जेलों में बंद हैं. पाकिस्तान की जेलों में 254 तो चीन में 157, बांग्लादेश में 167, ब्रिटेन में 426, इटली में 121 भारतीय जेल में बंद हैं.

इतना ही नहीं, बहुत से भारतीय विदेश जाकर कहां गुम हो जाते हैं, सरकार यह भी पता नहीं कर पाती. संसद के चालू बजट सत्र में प्रवासी मामलों के मंत्री वायलार रवि ने माना है कि पिछले तीन साल में विदेश गए लोगों में 141 का पता नहीं चल पाया है.

स्पष्ट है कि सरबजीत सिंह की तरह ही दुनिया के कई देशों में ऐसे भारतीय नागरिक हैं जिन्हें सरकार से उम्मीद हो सकती है. लेकिन सरकार की अपने नागरिकों के प्रति संवेदना की हकीकत सरबजीत मामले में उजागर हो चुकी है. भारतीय संसद के दोनों सदनों में 22 अगस्त, 2005 को सरबजीत का मसला जोर-शोर से उठा था. तब सरकार ने ठोस कदम उठाने का आश्वासन भी दिया, लेकिन 8 साल बाद पाकिस्तान से सरबजीत का शव ही लौटा. राज्यसभा में 24 अगस्त, 2006 को हुई बहस में तत्कालीन कांग्रेस सांसद संतोष बागड़ोदिया और पार्टी के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने ही सरकार की पोल खोल दी थी.

बागड़ोदिया ने आरोप लगाया था, ‘‘विदेशों में स्थित भारतीय राजदूत, उच्चायुक्त जब देश के  टूरिस्ट और एनआरआई की फिक्र नहीं करते, तो वे विदेश की जेलों में बंद अपने नागरिकों की क्या परवाह करते होंगे.’’ दोनों सांसदों ने सदन में कहा था कि ज्यादातर भीरतीय नागरिक इमिग्रेशन जैसे मामलों में बंद हैं और सरकार को उनकी फिक्र करनी चाहिए.

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