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एलओसी: सबक सिखाने को तैयार बंदूकें

सेना गुस्से में है और पाकिस्तान को अपने जवानों का सिर कलम करने की हरकत का बदला लेने की चेतावनी दे रही है, लेकिन सारा दारोमदार नेताओं पर.

अपडेटेड 26 जनवरी , 2013

जम्मू और कश्मीर में पुंछ जिले के मेंढर में प्वाइंट जीरो पर कंक्रीट के बंकरों में सेना के जवान निर्विकार भाव से खड़े हैं, उनकी उंगलियां मशीनगनों के घोड़ों पर टिकी हुई हैं और नजरें उस लकीर पर गड़ी हुई हैं, जो दुनिया की दूसरी ओर पांचवीं सबसे बड़ी सेनाओं को एक-दूसरे से बांटती है. पहाड़ों की घाटी में 12 फुट ऊंची
स्टील की भूरे रंग की बाड़ और घुमावदार कंटीले तारों की बाड़ एक नदी के साथ-साथ चली गई है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से घुसपैठिए जम्मू-कश्मीर में घुसने के लिए जिन रास्तों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, यह उनमें से एक है. करीब 800 जवानों की बटालियन 10 किमी लंबी इस बाड़ की दिन-रात रखवाली करती है.यह चौकी उस जगह से कुछ किमी ही दूर है, जहां 8 जनवरी को पाकिस्तानी फौज के लोगों ने लांस नायक हेमराज का सिर धड़ से अलग कर दिया था. 13 वर्षों में जवानों का सिर कलम करने की ऐसी तीन वारदातें हो चुकी हैं. लेकिन इस बार यह अलग किस्म की थी. इस जघन्य और घिनौनी हरकत की खबर राष्ट्रीय मीडिया में पहुंच गई. एक नागरिक ने बताया कि किस तरह सेना के जवान लांस नायक हेमराज और लांस नायक सुधाकर सिंह के क्षत-विक्षत शवों के पास सदमे में खड़े थे और उनके सिर झुके हुए थे. ''वे सिर्फ नीचे देख रहे थे और कोई कुछ भी नहीं बोल रहा था.” उस दुख और सदमे ने जल्दी ही सेना में गुस्से की लहर पैदा कर दी, चाहे वह साधारण जवान हो या ऊपर के बड़े अधिकारी. नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल के.टी. पटनायक ने 9 जनवरी को जब अपने शहीद जवानों का शव देखा तो वे गुस्से से उबल पड़े. उनके कमांड में इस तरह की यह दूसरी वारदात थी. भारतीय सेना की चौकियों ने इस घटना के फौरन बाद पाकिस्तानी सेना के ठिकानों पर गोलीबारी शुरू कर दी. मोर्टारों के धमाकों की गूंज दिन में भी पुंछ जिले में सुनी जा सकती थी.
बिना सिर वाले शव के साथ एक भड़काने वाली ई-मेल देखते ही देखते सेना में हर तरफ घूमने लगी. इसमें तल्ख शब्दों में  लिखा हुआ था, ''हमारा नेतृत्व आज सिरविहीन हो चुका है.” बरेली के कैंटोनमेंट में नियुक्ïत एक जवान निशांत सिंह (परिवर्तित नाम) ने कहा, ''पाकिस्तान को लेकर सरकार की चुप्पी से हम दुखी हैं.” हेमराज और सुधाकर राजपूताना राइफल्स का हिस्सा थे. राजपूताना राइफल्स के जवानों के अनिश्चितकालीन अनशन की खबरों ने सेना के उच्च अधिकारियों को चिंता में डाल दिया है. 14 जनवरी को सेना प्रमुख जनरल विक्रम सिंह ने इस हमले को 'अक्षम्य’ बताया. सेना प्रमुख ने कहा, ''भारत अपने अनुकूल समय और जगह पर पाकिस्तान को इसका सही जवाब देने का अधिकार रखता है.” वे दोनों जवानों के परिवारों से भी मिलने गए.
सेना में पनपते गुस्से की एक वजह शायद यह भी थी कि पाकिस्तान ने इस दुस्साहसपूर्ण कार्रवाई का जिम्मा लेने से इनकार कर दिया. पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने इस्लामाबाद में कहा कि ये आरोप ऐसे नहीं हैं, जिनका जवाब दिया जाए और बाद में उन्होंने साफ इनकार कर दिया कि इस तरह का कोई हमला हुआ है. भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने करीब चार दिन बाद 12 जनवरी को इस घटना पर अपना मुंह खोला. उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि हम ''बदले और प्रतिक्रिया के बेबुनियाद आह्वान” के सामने नहीं झुकेंगे. नई दिल्ली में खुर्शीद ने कहा, ''इस बात को ध्यान में रखते हुए कि हमारा बहुत कुछ दांव पर लगा है, हम वही करेंगे जो देश और शांति के हित में होगा.”
लेकिन तीन दिन बाद खुर्शीद को तब अपनी लाइन बदलनी पड़ी जब जनरल विक्रम सिंह के कड़े रुख ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी सख्त जवाब देने को मजबूर कर दिया. 15 जनवरी को सेना प्रमुख के निवास पर उन्होंने रिपोर्टरों को बताया, ''इस बर्बरतापूर्ण हरकत के बाद पाकिस्तान के साथ सब कुछ पहले की तरह नहीं चल सकता.” उन्होंने कहा, ''इस वारदात के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए.” पाकिस्तान के साथ दोस्ताना संबंध के कायल प्रधानमंत्री के लिए ऐसे तेवर दिखाना महत्वपूर्ण है. लेकिन पाकिस्तान में चल रही उलट-पलट से यह नहीं पता चल रहा है कि किससे बातचीत की जाए.
पाकिस्तानी सेना का मिशन कश्मीर 2
भारतीय सेना के अधिकारी इस नए खेल के पीछे पाकिस्तानी सेना का हाथ देख रहे हैं. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया, ''अब पाकिस्तान की योजना का खुलासा कश्मीर में होने लगा है. यह साल काफी नाजुक होने वाला है.” सेना के अधिकारियों का कहना है कि कश्मीर में कम होते उग्रवाद को फिर से जीवित करने की कोशिश की जा रही है. सेना के एक अधिकारी का कहना है कि 2013 में अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी की शुरुआत का अंजाम 1988 में सोवियत फौज की वापसी जैसा होगा. यह बÞत बड़ा बदलाव होगा जिससे पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर दबाव कम हो जाएगा, जिसके बाद वह पूरब में कश्मीर में अपना एजेंडा फिर से चलाएगा.
भारतीय सेना के अधिकारियों का मानना है कि 2012 में युद्धविराम के उल्लंघन की घटनाओं में आई तेजी और कश्मीर में उग्रवाद को पुनर्जीवित करने की योजना में जरूर कोई संबंध है. 2012 में आधिकारिक रूप से 120 उल्लंघन हो चुके थे. 2003 के बाद उल्लंघन की यह सबसे अधिक संख्या है. एलओसी पर तैनात सेना के अधिकारी पाकिस्तान की ओर से फायरिंग की घटनाओं की गैर-आधिकारिक संख्या 200 बताते हैं.
सेना की एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, 8 जनवरी को सिर कलम करने की घटना नवंबर 2012 से एलओसी पर हो रही हलचल का नतीजा थी. नियंत्रण रेखा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की चौकियों को निशाना बनाया जा रहा था और भारतीय सीमा के अंदर सेना के जवानों पर हमला करने के लिए बारूदी सुरंगें बिछाई गई थीं. 1989 में उग्रवाद शुरू होने के बाद कश्मीर में पिछले दो साल अपेक्षाकृत सबसे ज्यादा शांति थी. उदाहरण के लिए 2012 में राज्य में इससे पहले वाले साल के मुकाबले उग्रवाद में 45 फीसदी की कमी दर्ज की गई. 14 आम नागरिक मारे गए और 55 उग्रवादियों को खत्म किया गया. शांति की इस बहाली को राज्य में पर्यटकों की बढ़ती संख्या से भी आंका जा सकता था. पिछले साल राज्य में 95 लाख सैलानी घूमने के लिए गए, जो कि अब तक की सबसे अधिक संख्या थी. सेना के अधिकारियों का कहना है कि घाटी में 2003 में कट्टर उग्रवादियों की संख्या करीब 2,500 थी, जो अब घटकर 110 तक पहुंच गई थी. उग्रवाद अंतिम सांसें गिन रहा है, जिसे अब नई ताकत की जरूरत महसूस हो रही है.
इस साल 6 जनवरी को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी के वरिष्ठ नेता वली-उर-रहमान ने एक गंभीर धमकी दी. उसने कहा, ''टीटीपी कश्मीर में जाएगी और इस्लामी शरीयत के मुताबिक कश्मीरियों को उनका हक दिलाने व कश्मीर को हिंदुस्तान से आजाद कराने में मदद करेगी.” टीटीपी या पाकिस्तानी तालिबान विभिन्न इस्लामवादी उग्रवादी समूहों का संगठन है, जो मुख्यत: अफगानिस्तान सीमा से सटे पाकिस्तान के फेडरी एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज (फाटा) में सक्रिय है. वे दिसंबर 2007 में बैतुल्लाह महसूद के नेतृत्व में एकजुट हुए और उनका उद्देश्य पाकिस्तान हुकूमत के खिलाफ जंग करना, अपनी तरह की शरीयत लागू करना और अफगानिस्तान में नैटो के नेतृत्व वाली फौज के के खिलाफ संघर्ष करना है. पाकिस्तान के भीतर टीटीपी सबसे खतरनाक उग्रवादी संगठन है. वे पाकिस्तानी सेना के ठिकानों पर कमांडो हमले कर चुके हैं और उन्होंने सरकारी फौज के काफी नुकसान पहुंचाया है. हालांकि अभी तक टीटीपी के किसी भी मुजाहिदीन के कश्मीर में पहुंचने की खबर नहीं है, लेकिन वे सचमुच यहां आए तो पाकिस्तानी सेना के लिए यह बड़े राहत की बात होगी, क्योंकि 2007 के बाद से उसे लगातार पाकिस्तानी तालिबान के हमलों को झेलना पड़ रहा है.

हमले के लिए पूरी तैयारी का अभाव
सेना प्रमुख की ओर से दंडात्मक कार्रवाई के तहत ज्यादा से ज्यादा यही हो सकता है कि भारतीय सेना पाकिस्तानी चौकियों पर गोलीबारी करे. सेना के अधिकारियों को संदेह है कि हम 1971 की तरह दो हफ्ते तक चलने वाली कोई जंग लड़ पाएंगे. 1999 के करगिल युद्ध और ऑपरेशन पराक्रम में 10 महीने की तैनाती ने सीमित समय की जंग छेडऩे में भारतीय सेना के खोखलेपन को उजागर कर दिया था. उसके बाद से ज्यादा कुछ नहीं बदला है. नौसेना और वायु सेना को जहां अपनी ताकत बढ़ाने के लिए अमेरिका से लंबी दूरी के निगरानी और हमलावर पी81 विमान और भारी माल उठाने वाले विमान मिलने वाले हैं, वहीं थल सेना तीनों सेवाओं में सबसे पीछे रही है. करगिल युद्ध के बाद से उसने केवल तीन बड़े हथियार हासिल किए हैं—600 से ज्यादा टी-90 टैंक, 120 ब्रह्मोस मिसाइलें और लंबी दूरी का 28 स्मर्क रॉकेट सिस्टम. उसे अभी पहले के ऑर्डर के तहत 20 अरब डॉलर (1.1 लाख करोड़ रु.) के हथियार मिलने बाकी हैं. इन हथियारों में हल्के हेलीकॉप्टर, तोपें, टैंकभेदी मिसाइलें और आधुनिक राइफलें शामिल हैं. उसके युद्धक टैंकों में हर चार में से एक से भी कम टैंक ही रात में युद्ध कर सकता है.
सेना की आपूर्ति नीति में भारी खामियों और ऊपर से कमजोर तरह से तैयार किए मसौदों के कारण बुलेटप्रूफ कवच, बूट, हेलमेट और चाकुओं जैसे छोटी चीजों को तवज्जो ही नहीं दी गई है. जनरल बिक्रम सिंह ने जरूरी उपकरणों की आपूर्ति में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की है. वे कहते हैं, ''मैंने एक ऐसी व्यवस्था शुरू की है जिसमें हर 15 दिनों पर उप-प्रमुख एक बार सभी मुख्य स्टाफ अधिकारियों से मिलते हैं और अहम बिंदुओं पर विचार कर उसे आगे बढ़ाते हैं.” (देखें बातचीत) लेकिन इन कदमों के फलीभूत होने में अभी कई साल लगेंगे. पिछले कुछ वर्षों में जो उपेक्षा हुई है, उसकी वजह से 12 लाख की भारी-भरकम फौज की जरूरत पूरी होने में समय तो लगेगा ही. इस निराशाजनक परिदृश्य में सेना यही उम्मीद कर सकती है कि जंग की लकीर नियंत्रण रेखा से आगे न जाने पाए.


रूबेन सिंह/ www.indiatodayimages.com

चीन
पीओके
गिलगित
स्कर्दू
नियंत्रण रेखा
श्रीनगर
करगिल
करगिल
अनंतनाग
डोडा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू व कश्मीर
लेहअक्साई
चीन
अग्रिम मोर्चे को बेधने की कोशिश
भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा पर 540 किमी लंबी बाड़ का मकसद है कश्मीर में गड़बड़ी फैलाने की पाकिस्तान की मंशा को नाकाम करना
उत्तरी-पश्चिमी युद्ध क्षेत्र
पाकिस्तान
घुसपैठ के प्रमुख रास्ते, जहां भारतीय सेना 8 जनवरी की घटना का बदला ले सकती है

1 डिवीजन = 9 बटालियन या  12,000 सैनिक

पाकिस्तानी डिवीजन
झेलम
खरियन
मरी
भारतीय डिवीजन
लेह
बारामुला
अखनूर
राजौरी
कुपवाड़ा
द्रास
नियंत्रण रेखा
भारतीय सैनिक
पाकिस्तानी सैनिक
आतंकी
हर मौसम में चौकस
सीमा पर सैनिकों का जीवन कठिन होता है
 और एक सामान्य शिफ्ट 12 घंटे की होती है.
 और एक सैनिक को दो से चार घंटे की नींद नसीब होती है.
 एक सैनिक की शिफ्ट बढ़कर 20 घंटे तक की हो सकती है.
 चौकी पर डटे फौजी युद्धह्नेत्र निगरानी प्रणाली,
हैंड-हेल्ड थर्मल इमेजर तथा इन्फ्रा-रेड सेंसर्स से
लैस होते हैं.

नियंत्रण रेखा की बाड़ के बारे में पांच बातें जो आप नहीं जानते
1 72,000 से अधिक सैनिकों की 6 डिवीजन इस पर निगाह रखती हैं. 
2सेना की टुकडिय़ां इससे 200 मीटर परे होती हैं. बाड़ को कोई भेदने न पाए, यह सुनिश्चित करने के लिए उसकी लगातार गश्त की जाती है.  
3 कहीं-कहीं बाड़ भारतीय सीमाक्षेत्र के 2 किमी अंदर है. सेना की कई चौकियां ऐसी बाड़ के आगे स्थित हैं.
4बाड़ पर मानवरहित ग्राउंड सेंसर लगे हैं.
5बाड़ को फांदने के लिए आतंकी मोटे कंबल और प्लास्टिक की पाइप का इस्तेमाल करते हैं.


फौज का मुकाबला
   पाकिस्तान    भारत
सैन्य खर्चे  3.3 अरब डॉलर  13.6 अरब डॉलर
थल सैनिक  550,000    11 लाख
टैंक   2,285    3,454
सचल तोप  1,417    4,175
वायु सैनिक 40,000    140,000
युद्धक विमान 353     730
युद्धक हेलीकॉप्टर  0     32
नौसैनिक  22,000    55,000
विमान वाहक 0     1
पनडुब्बी  5    15
डेस्ट्रॉयर  0    8
फ्रिगेट   10    15

बिगड़ गया माहौल
सीमा की गर्मागर्मी ने सीमा पार के आदान-öदान को ठंडे बस्ते में डाला

कूटनीति
अल्पकालिक असर
• भारत 14 दिसंबर, 2012 से लागू किए गए आसान वीजा नियमों को वापस ले सकता है.
• 15 जनवरी को पाकिस्तान के वरिष्ठ नागरिकों को आगमन पर वीजा देने की घोषणा की गई और कुछ ही घंटों बाद उस पर रोक लगा दी गई.
बिजनेस
अल्पकालिक असर
• सीमा पार कारोबार रोक दिया
गया है. 11 जनवरी को पुंछ जिले में पाकिस्तानी सेना ने सब्जियों से
लदे 23 ट्रकों को नियंत्रण रेखा के ट्रेड प्वाइंट से गुजरने की इजाजत नहीं दी.

दीर्घकालिक असर
• सियाचिन ग्लेशियर के विसैन्यीकरण पर भारतीय सेना ने अपना रुख कठोर कर लिया है.
• भारत समुद्री मुठभेड़ों के जोखिम को कम करने के समझैते पर दस्तखत करना टाल सकता है.
दीर्घकालिक असर
• 1 अगस्त, 2012 से भारत ने पाकिस्तान को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत दे रखी है. इसे निशाना बनाया जा सकता है.
• सीआइआइ का यह अनुमान हकीकत में तब्दील होने से रह जाए कि 2015 तक द्विपक्षीय व्यापार 55,000 करोड़ रु. तक पहुंच सकता है.

खेलकूद

हॉकी

हॉकी इंडिया लीग (एचआइएल) की टीम में मुंबई मैजिशियंस के चार पाकिस्तानी खिलाडिय़ों को चुनने के कारण शिवसेना ने एक अभ्यास सत्र में बाधा पहुंचाई. एचआइएल के उदघाटन मैच में कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं. 15 जनवरी को सभी नौ पाकिस्तानी खिलाडिय़ों से वापस जाने को कह दिया गया. मार्च में भारत-पाक द्विपक्षीय शृंखला पर आशंका के बादल.

क्रिकेट
बीसीसीआइ आईपीएल खिलाडिय़ों की नीलामी में फ्रेंचाइजियों को पाकिस्तानी खिलाडिय़ों को चुनने से हतोत्साहित करता है. बीसीसीआइ ने महिला विश्व कप की मेजबानी करते समय पाक महिला टीम को सुरक्षा का आश्वासन प्रदान करने में अपनी असमर्थता का उल्लेख करते हुए आइसीसी को पत्र लिखा. पाकिस्तान ने मांग की कि टूर्नामेंट को दक्षिण अफ्रीका में कराया जाए.

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