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शी जिनपिंग क्यों बदल रहे चीन की सेना के टॉप कमांडर?

2022 से अब तक चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के करीब 100 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया जा चुका है और उनके खिलाफ जांच शुरू की गई है

शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
अपडेटेड 9 जुलाई , 2026

चीन की सेना इस वक्त अपने आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े बदलाव से गुजर रही है. शी जिनपिंग सरकार ने सैन्य अधिकारियों के खिलाफ एक 'साफ-सफाई’ का अभियान शुरू किया है. इससे चीनी सेना के भीतर गहरी दरारें सामने आई हैं और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में राजनीतिक स्थिरता को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं.

26 जून की देर रात जारी एक घोषणा में चीनी अधिकारियों ने बिना कोई सार्वजनिक वजह बताए 14 वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया. राजनीतिक पद गंवाने वालों में एक पूर्व प्रांतीय गवर्नर, एक बड़े शहर के मेयर, देश के वित्त विभाग से जुड़े शीर्ष अधिकारी और सेना के छह वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि यह घोषणा पिछले चार वर्षों से चल रहे उस अभूतपूर्व अभियान का एक और अध्याय है, जिसने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह बदल दिया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, 2022 से अब तक 100 से ज्यादा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को या तो हटाया गया है, उनके खिलाफ जांच शुरू हुई है या उन्हें अनुशासनात्मक जांच के दायरे में रखा गया है.

2023 के बाद से यह अभियान और तेज हो गया है. इसी अवधि में 42 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, जिनमें 19 जनरल भी शामिल हैं. इन सीनियर अधिकारियों को पद से हटाया गया, उनके खिलाफ जांच हुई या वे सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए. यह अभियान PLA के हर स्तर तक पहुंच चुका है, जिसमें क्षेत्रीय कमांडरों से लेकर चीन के सबसे ऊंचे सैन्य नेतृत्व तक शामिल हैं.

इस अभियान का सबसे बड़ा निशाना सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) रहा है. सात सदस्यों वाला यह शक्तिशाली आयोग चीन की सेना की कमान संभालता है. जब शी जिनपिंग ने 2022 में मौजूदा CMC का गठन किया था, तब माना जा रहा था कि अगली कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस तक इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. हालांकि अब सात मूल सदस्यों में सिर्फ दो ही बचे हैं. खुद शी जिनपिंग और सेना के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की निगरानी करने वाले अधिकारी.

बाकी सदस्यों को या तो हटा दिया गया, उनके खिलाफ जांच शुरू हुई या उनकी जगह नए लोगों को नियुक्त कर दिया गया. इसे आयोग के इतिहास के सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जा रहा है. इस अभियान का सबसे बड़ा असर चीन की प्रतिष्ठित रॉकेट फोर्स पर भी पड़ा है जो देश की पारंपरिक और परमाणु मिसाइलों का संचालन करती है.

2023 से भ्रष्टाचार और रक्षा खरीद में गड़बड़ी के आरोपों के बाद रॉकेट फोर्स के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए. इसके शीर्ष कमांडरों को हटा दिया गया, कई वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए और पूरी नेतृत्व व्यवस्था को नए सिरे से बनाया गया.

चीन ने दो साल से भी कम समय में दो बार अपना रक्षा मंत्री भी बदला है. पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए थे और बाद में उन्हें आधिकारिक तौर पर पद से हटा दिया गया. उनसे पहले वाले रक्षा मंत्री भी शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में पद से बाहर हो गए थे. रक्षा मंत्री के पद पर इतनी तेजी से बदलाव ने चीन की सैन्य व्यवस्था की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

आधिकारिक तौर पर बीजिंग का कहना है कि यह अभियान सिर्फ भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए चलाया जा रहा है. चीन लंबे समय से मानता रहा है कि PLA में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या है, खासकर रक्षा खरीद, पदोन्नति और निर्माण ठेकों में. हालांकि, कई विश्लेषकों का कहना है कि भ्रष्टाचार की जांच अब राजनीतिक वफादारी सुनिश्चित करने का भी माध्यम बन गई है.

2026 की शुरुआत में जब चीन के दो सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के खिलाफ जांच शुरू हुई, तब PLA के आधिकारिक अखबार ने उन पर सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष शी जिनपिंग के 'पूर्ण अधिकार' का सम्मान नहीं करने का भी आरोप लगाया.

विश्लेषकों के मुताबिक, इस तरह की भाषा से साफ संकेत मिलता है कि अब सेना में बने रहने के लिए सिर्फ आर्थिक ईमानदारी नहीं, बल्कि राजनीतिक वफादारी भी सबसे महत्वपूर्ण कसौटी बन गई है. इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि हटाए गए कई अधिकारियों को खुद शी जिनपिंग ने ही पदोन्नत किया था.

चीन पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, 2022 के बाद वरिष्ठ सैन्य पदों पर नियुक्त किए गए 47 अधिकारियों में से करीब 87 फीसद या तो हटाए जा चुके हैं या उनके खिलाफ जांच चल रही है अथवा वे संदेह के घेरे में हैं. इससे संकेत मिलता है कि शी जिनपिंग द्वारा चुनी गई नेतृत्व टीम भी उनका स्थायी भरोसा नहीं जीत सकी.

सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि एक ऐसे नेता के लिए, जिसने एक दशक से ज्यादा समय तक सत्ता को अपने हाथों में केंद्रित किया और पूर्ण राजनीतिक वफादारी पर जोर दिया. अपने ही नियुक्त अधिकारियों को बार-बार हटाना चीन की शासन व्यवस्था के भीतर बढ़ते अविश्वास को दिखाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान ऐसे समय चल रहा है, जब चीन अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर तेजी से काम कर रहा है. शी जिनपिंग कई बार PLA को 2027 तक युद्ध लड़ने और जीतने में सक्षम बनाने का लक्ष्य दे चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इसे ताइवान को लेकर संभावित संघर्ष की स्थिति में सैन्य तैयारी का अहम लक्ष्य मानते हैं.

हालांकि लगातार चल रही जांचों ने सेना की कई शाखाओं की कमान व्यवस्था को प्रभावित किया है. कई शीर्ष पद खाली हैं, उनकी जगह अनुभवहीन अधिकारियों की नियुक्ति हुई है और पूरे सैन्य तंत्र में राजनीतिक डर का माहौल बन गया है. इससे लंबे समय की सैन्य योजना बनाना मुश्किल हो गया है.

सैन्य विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अब अधिकारी सैन्य क्षमता दिखाने के बजाय राजनीतिक सावधानी बरतने को ज्यादा महत्व दे सकते हैं. इससे फैसले लेने की गति धीमी हो सकती है और पूरी कमान व्यवस्था में पहल करने की क्षमता कम हो सकती है. हालांक,  PLA लगातार आधुनिक हथियारों और भव्य सैन्य परेड का प्रदर्शन करती रही है लेकिन आलोचकों का कहना है कि संगठन के भीतर की अस्थिरता किसी वास्तविक युद्ध की स्थिति में उसकी लड़ाकू क्षमता को कमजोर कर सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में वरिष्ठ अधिकारी शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देते हैं या अपने पद छोड़ने की वजह बताते हैं. आमतौर पर वे पहले सार्वजनिक जीवन से गायब हो जाते हैं और कई महीने बाद एक संक्षिप्त आधिकारिक सूचना के जरिए उनके हटाए जाने की पुष्टि की जाती है.

2023 में पूर्व विदेश मंत्री छिन गांग का अचानक गायब होना इसका सबसे चर्चित उदाहरण था. जिन अधिकारियों के खिलाफ जांच होती है, वे अक्सर लंबे समय तक राजनीतिक अनिश्चितता में रहते हैं, जबकि अनुशासनात्मक एजेंसियां बंद कमरे में जांच करती रहती हैं.

2027 में होने वाली अगली कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के करीब आते-आते पार्टी के भीतर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है. जांच के दायरे में आए अधिकारियों से दूरी बनाते हुए अपनी वफादारी साबित करने की कोशिश में गुटबाजी और बढ़ सकती है.

सेना में जारी यह शुद्धिकरण अभियान शी जिनपिंग की केंद्रीकृत शासन व्यवस्था की चुनौतियों को भी दिखाता है. इस अभियान ने जहां प्रमुख संस्थानों पर उनकी सीधी पकड़ मजबूत की है, वहीं दूसरी ओर उसी नेतृत्व व्यवस्था के भीतर लगातार बनी अस्थिरता को भी उजागर किया है, जिसे उन्होंने खुद तैयार किया था.

कुल मिलाकर, 2022 से अब तक 100 से ज्यादा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच हो चुकी है. 2023 से अब तक 42 वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया है और 19 पूर्ण जनरल इस अभियान की चपेट में आ चुके हैं. इसके साथ ही चीन के शीर्ष सैन्य नेतृत्व में लगभग पूरी तरह बदलाव हो चुका है. यह सब मिलकर PLA के भीतर पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा आंतरिक बदलाव माना जा रहा है.

शी जिनपिंग लगातार चीन की सेना को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं. ऐसे में अब सवाल यह नहीं है कि PLA में भ्रष्टाचार है या नहीं. असली सवाल यह है कि चीन ने अपने ही सर्वोच्च सैन्य कमांडर में बड़े स्तर का बदलाव किया है. ऐसे में चीनी सैन्य नेतृत्व क्या वह स्थिरता और तैयारी हासिल कर पाएगा जिसकी जरूरत बीजिंग भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बता रहा है.

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