
‘गॉड्स ओन कंट्री’ कहे जाने वाले केरल के तिरुवनंतपुरम में यह प्रार्थना खामोशी से होने वाली नहीं थी. विराट कोहली ने बल्ले से अपनी प्रार्थना की और केरल की भीड़ इस इंतजार में थी कि किंग की इस प्रार्थना का जवाब क्या मिलता है.
27 सितंबर को भारत वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले मैच में 296 रन के लक्ष्य का पीछा कर रहा था. विराट कोहली जब बल्लेबाजी के लिए उतरे तो उन्हें वनडे में 15,000 रन पूरे करने के लिए 59 रन चाहिए थे.
वे 88 गेंदों पर 139 रन बनाकर नाबाद लौटे और भारत ने 50 गेंद बाकी रहते आठ विकेट से मैच जीत लिया. अब वनडे रनों की इस सूची में कोहली से आगे सिर्फ सचिन तेंदुलकर हैं, जिनके नाम 18,426 रन हैं.
कोहली 37 साल के हैं. वे अब टेस्ट नहीं खेलते. पिछले एक साल से उनसे लगातार पूछा जा रहा था कि क्या उनका शरीर अब भी पहले जैसी रन बनाने की भूख का साथ देगा. केरल की उस एक शाम को इसका जवाब उन्होंने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ दिया.
उन्होंने नौ छक्के और 10 चौके लगाए, 40 गेंदों पर अर्धशतक और 74 गेंदों पर शतक पूरा किया. वनडे में यह उनका तीसरा सबसे तेज शतक था. 15,000 रन पूरे करने वाला शॉट उन्होंने अल्जारी जोसेफ की गेंद पर पुल करके लगाया.

फिर कोहली ने दोनों हाथ ऊपर उठाए. यह ऐसा जश्न नहीं था जैसे वे इस आंकड़े से खुद हैरान हों, बल्कि मानो वे अब भी मानते हों कि दर्शक उनके सफर का अहम हिस्सा हैं.
एकमात्र तुलना जो मायने रखती है
तेंदुलकर अब भी वह पहाड़ हैं जिसे पार करना है. लेकिन क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाले आंकड़ों के हिसाब से 15,000 रन तक पहुंचने वाले कोहली सबसे तेज बल्लेबाज हैं. 15,000 रन तक पहुंचने के लिए उन्हें 303 पारियां लगीं जबकि तेंदुलकर ने 377 पारियां खेली थीं. कोहली ने 15,950 गेंदों का सामना किया, जबकि तेंदुलकर ने 17,528 गेंदें खेली थीं.
हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण से 15,000 रन तक पहुंचने के मामले में तेंदुलकर अब भी कोहली से 212 दिन आगे थे. अपने शानदार दौर में भारत ने बस ज्यादा वनडे खेले थे. इस पारी के बाद वनडे में कोहली का औसत करीब 60 है, सटीक आंकड़ा 59.13 है. इसी पड़ाव पर तेंदुलकर का औसत 44.83 था.
अपने घरेलू मैदान पर खेलते हुए कोहली ने इस उपलब्धि को और खास बना दिया. भारत में उनके वनडे रनों की संख्या अब 7,006 हो गई है. उन्होंने तेंदुलकर के 6,976 रन के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है. वेस्टइंडीज के खिलाफ यह उनका 10वां शतक था.
श्रीलंका के खिलाफ भी उनके नाम 10 शतक हैं. वे ऐसे इकलौते बल्लेबाज हैं जिन्होंने दो टीमों के खिलाफ दोहरे अंकों में शतक लगाए हैं. यह लिस्ट ए क्रिकेट में उनका 60वां शतक भी था.
तेंदुलकर ने भी 60 शतक लगाए थे लेकिन इसके लिए उन्हें 538 पारियां खेलनी पड़ीं. कोहली ने यह आंकड़ा 338 पारियों में हासिल किया है. इन 60 शतकों में 55 भारत के लिए आए हैं. बाकी पांच दिल्ली के लिए.
लेकिन सबसे दिलचस्प आंकड़ा 14,000 और 15,000 रन के बीच का है. इस सफर में कोहली को सिर्फ 16 पारियां लगीं. इस दौरान उन्होंने 50 या उससे ज्यादा रन की 11 पारियां खेलीं, जिनमें पांच शतक थे.
वनडे करियर में 1,000 रनों का यह उनका सबसे शानदार दौर रहा है. 14,000 रन पूरे करने के बाद वनडे में उनका स्ट्राइक रेट 107.93 रहा है जो उनके अब तक के हर 1,000 रन के पड़ाव में सबसे ज्यादा है. इससे पहले के 1,000 रन उन्होंने 87.96 के स्ट्राइक रेट से बनाए थे. यानी वे अपने बल्लेबाजी के अंदाज में जानबूझकर ज्यादा खुलापन लाए.
उम्र के हिसाब से साज-संभाल
कई बड़े खिलाड़ी 30 की उम्र के मध्य में पहुंचते-पहुंचते अपने खेल में आने वाली गिरावट को स्वीकार करते हुए धीरे-धीरे समझौता करने लगते हैं. अभ्यास के सत्र कम हो जाते हैं, भाषा भी नरम पड़ जाती है.

कोहली ने ऐसा समझौता करने से इनकार किया है. हालांकि वे यह कहते हुए अपनी उम्र को स्वीकार करते है, “मुझे अपनी रिकवरी का ध्यान रखना है” लेकिन उम्र को अपने करियर पर लगने वाली सीमा नहीं, बल्कि अपने तरीके से संभाली जाने वाली चुनौती मानते हैं.
कोहली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के एक ही फॉर्मेट पर ध्यान केंद्रित किया है. आराम के दौर भी अपनी जरूरत के हिसाब से चुनते हैं. लंबे नेट सत्र उनके लिए सामान्य काम का हिस्सा हैं. उनके लिए फिटनेस सिर्फ क्रिकेट की जरूरत नहीं बल्कि मानसिक रूप से स्पष्ट रहने की शर्त भी है.
मैच के बाद कोहली ने भी यही बात कही. अपने दो दशक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के इस दौर में उन्हें स्कोरिंग की रफ्तार बढ़ाने की चुनौती मिली थी. यह काम उन्हें इसलिए उत्साहित कर रहा था क्योंकि इसमें उन्हें अपने खेल का नया रूप तैयार करना था, सिर्फ पुराने अंदाज को दोहराना नहीं.
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके लिए मील के पत्थर कभी लक्ष्य नहीं रहे. टीम के लिए अपना काम करना ही असली मकसद था. बाकी सबके लिए उन्होंने आभार जताया. उनका एक व्यक्तिगत लेकिन बिल्कुल स्पष्ट लक्ष्य अब भी है: 2027 विश्व कप में जब भारत लक्ष्य का पीछा करे, तब वे टीम के लिए मौजूद रहें और रन बनाते रहें.
कोहली का तरीका साफ है. लय में आने के बाद वह हर गेंद से ज्यादा से ज्यादा रन निकालना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरत से ज्यादा आक्रामक शॉट खेलने से बचना चाहते हैं. कोहली कह चुके हैं कि अपने फैसलों पर भरोसा होने के कारण वे बेझिझक आक्रामक क्रिकेट खेल सकते हैं.
इस साल अब तक उनके नाम 523 वनडे रन हैं जो 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में ऊंचे आंकड़ों में शामिल हैं. इस सूची में उनसे ऊपर मौजूद लगभग कोई भी बल्लेबाज उनके स्ट्राइक रेट की बराबरी नहीं कर सकता.
कोहली ने अपने आसपास क्या बदला
आंकड़ों में हमेशा रन और लक्ष्य का पीछा दर्ज होगा. लेकिन कोहली की ज्यादा स्थाई छाप भारतीय क्रिकेट की संस्कृति पर है. भारतीय ड्रेसिंग रूम में हाई-परफॉर्मेंस की भाषा आम होने से पहले ही कोहली ने फिटनेस को लेकर खुलकर बात शुरू कर दी थी- डाइट, अतिरिक्त स्प्रिंट, सिंगल लेकर आराम से रुकने के बजाय दो रन लेने की कोशिश.
उनके साथी वर्षों से कहते आए हैं कि टीम का फिटनेस स्तर और काम करने का माहौल इसलिए बदला क्योंकि कोहली अभ्यास में भी मैच जैसी गंभीरता रखते थे. कोहली सिर्फ बल्लेबाज नहीं थे. वे एक ऐसा मानक बन गए, जिसके बगल में दूसरे खिलाड़ियों को खुद को खड़ा करना पड़ा.
27 सितंबर को दूसरे छोर पर शुभमन गिल की 110 रन की पारी इस विरासत की मौजूदा तस्वीर थी. दोनों ने 151 रन की साझेदारी की. एक बार मजबूत आधार तैयार हो जाने के बाद भारत ने बिना जल्दबाजी के लक्ष्य हासिल किया. इससे पहले कुलदीप यादव के चार विकेट ने लक्ष्य को भारत की पहुंच के भीतर रखा था.
रनों का अगला पहाड़
तिरुवनंतपुरम में तीन पारियों में कोहली के नाम 338 वनडे रन हैं और उन्हें वहां अब तक आउट नहीं किया गया है. तेंदुलकर और कोहली, दोनों के नाम 15,000 से ज्यादा वनडे रन हैं. तेंदुलकर का सफर पूरा हो चुका है. कोहली अगले रन के पहाड़ की तैयारी कर रहे हैं.
कोहली के लिए उम्र के साथ कुछ चीजें जरूर मुश्किल होंगी, मसलन रिकवरी के लिए मिलने वाला समय और शरीर जितना क्रिकेट खेलने की इजाजत देगा, उसकी सीमा. लेकिन एक ऐसे खिलाड़ी के लिए कुछ नए रास्ते भी खुलते हैं जो अपने खेल में नए तरीके आजमाकर बदलाव के लिए तैयार हो.
2027 के लिए उनका खाका साफ है: फिटनेस पर लगातार काम करना, अपनी उपलब्धता और आराम का सही तालमेल रखना और स्ट्राइक रेट को मूड नहीं, सोच-समझकर तय करना. केरल का यह स्कोरबोर्ड पुराना पड़ जाएगा और उसकी जगह नया स्कोरबोर्ड आ जाएगा. लेकिन इस पारी ने जो बहस शुरू की है, वह बनी रहेगी.
करियर का आखिरी दौर सिर्फ विदाई का वक्त नहीं होता. यह नए प्रयोग करने और खेल को नए तरीके से ढालने का दौर भी हो सकता है. 15,000 रन पूरे करने के बाद भी कोहली अभी अपने खेल में बदलाव की गुंजाइश देख रहे हैं.

