इस बार संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक पर क्यों है सबकी नजर?

हरियाणा के समालखा में 13 मार्च से शुरू हो रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शीर्ष संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सांगठनिक बदलाव को लेकर भी कोई फैसला हो सकता है

उम्र से जुड़े सवाल पर क्या बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत. (Photo- PTI)
RSS प्रमुख मोहन भागवत (फाइल फोटो)

कल यानी 13 मार्च से तीन दिनों की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की शुरुआत हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा में होगी. प्रतिनिधि सभा संघ के संबं​ध में रणनीतिक निर्णय के लिहाज से सर्वोच्च बॉडी है. 

संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन के सभी अनुषंगिक संगठनों यानी सहयोगी इकाइयों के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं. ये सभी लोग अपने-अपने संगठनों में साल भर में हुए कार्यों का लेखा-जोखा देते हैं.

संघ के अनुषंगिक संगठन भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पहली बार संघ की प्रतिनिधि सभा में शामिल होंगे और पार्टी के कामों का लेखा-जोखा प्रतिनिधि सभा के सामने रखेंगे.

संघ की तरफ से पूरे साल की गतिविधियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पूरी सभा के सामने प्रस्तुत की जाती है. साथ ही अगले एक साल तक संघ और उसके अनुषंगिक संगठन किन विषयों पर किस तरह से काम करेंगे, इस बारे में भी इस सभा में निर्णय होता है. इसके अलावा अगर कोई सांगठनिक बदलाव होना हो तो उस बारे में भी प्रतिनिधि सभा में निर्णय होता है.

13 से 15 मार्च तक चलने वाली इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों समेत संघ के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. आयोजन से जुड़े संघ के एक पदाधिकारी के मुताबिक इस बैठक में कुल 1,489 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. संघ के शताब्दी वर्ष के बीच में हो रही यह सभा विशेष महत्व रखती है. संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस बैठक में संगठन की विस्तार योजनाओं, सामाजिक परिवर्तन अभियानों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी. इस बैठक में न सिर्फ संघ की आंतरिक संरचना और कामकाज पर चर्चा होगी बल्कि अन्य सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर भी विमर्श होगा. इनमें से कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर संघ की प्रतिनिधि सभा प्रस्ताव भी पारित करेगी.

इस बार की प्रतिनिधि सभा इस नाते भी महत्वपूर्ण है कि इसका आयोजन संघ की शताब्दी वर्ष में हो रहा है. मालूम हो कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में हुई थी. संघ के एक पदाधिकारी इस संदर्भ में बताते हैं, ''संघ की शताब्दी वर्ष को लेकर संपर्क विस्तार और संगठन विस्तार के लिहाज से कई योजनाएं बनाई गई थीं. इसलिए मुख्य तौर पर इस बार की प्रतिनिधि सभा में इस बात पर चर्चा होगी कि इन योजनाओं का कितना क्रियान्वयन हुआ और इन्हें प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए और क्या सुधार किए जाने चाहिए. इसके अलावा इस बात पर भी विचार होगा कि संघ और अन्य अनुषंगिक संगठनों के लिए जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनमें कितनी प्रगति हुई.''

शताब्दी वर्ष में संघ ने बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान चलाए हैं. संघ का दावा है कि गृहसंपर्क अभियान के तहत अब तक 10 करोड़ से ज्यादा घरों तक पहुंच बनाई गई है. इसके अलावा संघ की तरफ से व्याख्यान मालाएं भी आयोजित की गई हैं. देशभर में प्रमुख लोगों के बीच खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई व्याख्यान दिए हैं.

संघ के एक पदाधिकारी इस बैठक के एजेंडे के बारे में एक महत्वपूर्ण बात बताते हैं. वे कहते हैं, ''संघ के सांगठनिक ढांचे में बदलाव को लेकर भी पिछले कुछ समय से बात चल रही है. पिछली प्रतिनिधि सभा में इसके लिए एक समिति बनाई गई थी. उम्मीद है कि इस समिति के प्रस्तावों पर इस बार की प्रतिनिधि सभा में विस्तार से बात हो और इस बारे में कोई निर्णय लिया जाए.'' इस बारे में इंडिया टुडे ने एक विस्तृत रिपोर्ट (ढांचा बदल सकता है संघ) की थी.

इस बैठक के राजनीतिक संदर्भ भी हैं. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अब सालभर का भी वक्त नहीं बचा. संघ और BJP के लिहाज से उत्तर प्रदेश राजनीतिक तौर पर एक महत्वपूर्ण राज्य है. ऐसे में उत्तर प्रदेश में संघ के सभी संगठन आपसी समन्वयन के साथ कैसे प्रभावी ढंग से काम कर सकें, इस पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.

बीते दिनों विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए जो नियम जारी किए थे, उन्हें लेकर काफी विवाद रहा. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई. अब भी इन नियमों को लेकर स्पष्टता की स्थिति नहीं है. संघ के पदाधिकारियों से बात करने पर पता चलता है कि इस विषय पर भी इस बार की प्रतिनिधि सभा में चर्चा हो सकती है और संघ की राय केंद्र सरकार तक पहुंचाई जाएगी.

इस बैठक में लिए जाने वाले विषयों पर संघ के एक पदाधिकारी बताते हैं, ''पिछले वर्षों में संघ ने पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में पहल की हैं. इस सभा में इनकी समीक्षा तो होगी ही लेकिन आगे की रणनीति भी बनेगी. सबसे पहले शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा होगी. विजयदशमी उत्सव, गृहसंपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलन, युवा सम्मेलन, प्रमुख नागरिकों की सभाएं और सामाजिक सद्भाव बैठकें जैसे कार्यक्रमों के अनुभव साझा किए जाएंगे. देखा जाएगा कि क्या इनसे संघ की जनता में पहुंच बढ़ी है. बैठक में इनके परिणामों पर भी विचार होगा. संघ शाखाओं के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन ​की दिशा में हो रहे कार्यों पर भी बातचीत होगी. पंच परिवर्तन से संबंधित पहलों पर भी चर्चा होगी.'' संघ ने अपने पंच परिवर्तन के तहत पांच प्रमुख विषयों के लिया है. ये विषय हैं- सामाजिक सद्भाव, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्य.

प्रतिनिधि सभा का एक विषय संत रविदास की 650वीं जयंती हो सकती है. संघ इस पर वर्षभर के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. इनकी शुरुआत 1 फरवरी 2026 से हो गई है. उम्मीद है कि संत रविदास पर संघ की प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाए. जानकार इसे संघ की तरफ से दलित समुदाय से जुड़ाव बढ़ाने का प्रयास मान रहे हैं.

संघ की प्रतिनिधि सभा में जनसांख्यिकीय बदलावों पर भी चर्चा की उम्मीद है. खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में हुए जनसांख्यिकीय बदलावों पर बात हो सकती है. असम और पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा जैसे राज्यों में यह चुनावी मुद्दा है और प्र​तिनिधि सभा में इस विषय पर एक प्रस्ताव पारित हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा होने की उम्मीद है.

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