खास रपटः चित्रा का रहस्य योग!
कौन है वह रहस्यमय शख्स जिसने शेयर बाजार के साथ छल किए और एनएसई की डायरेक्टर को अपना सहर्ष ताबेदार बना लिया?

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने 6 मार्च को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया जिसे 'को-लोकेशन घोटाला’ कहा जा रहा है. इसी के साथ अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान गंवा चुकीं यह 'क्वीन ऑफ द बुर्स’ यानी शेयर बाजार की मल्लिका फिर सुर्खियों में आ गईं. 2013 में उन्हें 'वुमन लीडर ऑफ द ईयर’ चुनते वक्त फोर्ब्स इंडिया ने इन्हीं शब्दों से सुशोभित किया था.
लगातार पांच साल देश की सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल करने के बाद 2016 में बिजनेस टुडे ने उन्हें और ऊंचा उठाते हुए अपने 'हॉल ऑफ फेम’ में जगह दी. उनके पतन की शुरुआत का भी यही साल था, जब एनएसई बोर्ड और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने उनकी अगुआई वाले स्टॉक एक्सचेंज के कामकाज में गंभीर गड़बड़ियां पाईं, जिससे उन्हें कार्यकाल खत्म होने से डेढ़ साल पहले दिसंबर 2016 में इस्तीफा देना पड़ा.
इस फरवरी में सेबी ने 190 पेज के आदेश में दावा किया कि एक अज्ञात 'आध्यात्मिक शक्ति’ भारत में स्टॉक एक्सचेंज की पहली महिला प्रमुख रामकृष्ण को एनएसई के कामकाज के विभिन्न पहलुओं पर सलाह दे रही थी. सेबी को दिए गए जवाब में रामकृष्ण ने इस रहस्यमय शख्स की पहचान ज्यादातर हिमालय पर्वत पर रह रहे 'सिद्ध पुरुष’ या 'योगी’ के तौर पर की.
11 मार्च को सीबीआइ ने विशेष अदालत को बताया कि योगी जिस ईमेल अकाउंट से रामकृष्ण से संवाद कर रहा था उसे आनंद सुब्रमण्यम ने बनाया था. आनंद को रामकृष्ण ने 2013 में एनएसई के मुख्य रणनीतिक अधिकारी के तौर पर भर्ती किया और 2015 में ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (जीओओ) और एमडी तथा सीईओ का सलाहकार बना दिया. अर्नस्ट ऐंड यंग (ईवाई) की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट इशारा करती है कि यह योगी आनंद सुब्रमण्यम है.
रहस्यमय योगी
सुब्रमण्यम को सीबीआइ ने फरवरी में गिरफ्तार किया, यानी सेबी के उस आदेश के दो हफ्ते बाद, जिसमें रामकृष्ण को नियमों का उल्लंघन करके सुब्रमण्यम की सेवाएं लेने का दोषी ठहराया गया. सेबी के मुताबिक, उसका पूर्व कार्य अनुभव उस पद के लिए सुसंगत नहीं था जो उसे एनएसई में 10 गुना ज्यादा मेहनताने के साथ दिया जा रहा था.
उसकी तनख्वाह तकरीबन हर साल दोगुनी हो गई और 2016 में वह सालाना 4.21 करोड़ रुपए ले रहा था. रामकृष्ण के साथ उसकी नजदीकियों (दोनों के केबिन के बीच एक दरवाजा था जिससे वे आपस में जुड़े थे) और संगठन में बढ़ते रौब-दाब पर सबकी भौंहें तन गई थीं. एनएसई बोर्ड के एक पूर्व सदस्य कहते हैं,''ढेरों शिकायतें थीं कि वह असली बॉस बन गया है.’‘
सेबी को भी उसकी नियुक्ति को लेकर शिकायतें भेजीं गईं, जिसके बाद अक्तूबर 2016 में सुब्रमण्यम से जाने के लिए कह दिया गया. बोर्ड के पूर्व सदस्य याद करते हैं, ''जब बोर्ड ने रामकृष्ण को बताया कि सुब्रमण्यम को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है तो वे हतप्रभ थीं.’‘ वे यह भी बताते हैं कि एनएसई में कॉर्पोरेट राजकाज को लेकर उपजी चिंताओं की वजह से बोर्ड का तभी पुनर्गठन किया गया था.
बोर्ड के पूर्व सदस्य खुलासा करते हैं कि दो महीने बाद उन्होंने रामकृष्ण को भी हटाने का फैसला ले लिया था, पर जिस दिन बोर्ड की बैठक होनी थी, उसी सुबह उन्होंने इस्तीफा दे दिया. बोर्ड के पूर्व सदस्य कहते हैं कि उन्हें आसानी से विदा होने दिया गया और निपटारे के वक्त उन्हें वह सब सौंप दिया जो देना बनता था, ''ताकि ठीक उससे बचा जा सके जो अब हो रहा है.’‘
ईवाई की फॉरेंसिक रिपोर्ट एनएसई बोर्ड ने स्वीकार कर ली. यह दावा करती है कि आनंद.सुब्रमण्यम9 और साइरनमणि.10 यूजरनेम वाले स्काइप एकाउंट, जो सुब्रमण्यम के एनएसई डेस्कटॉप पर मिले, स्काइप एप्लीकेशन डेटाबेस से कन्फिगर किए गए और उन्हें सुब्रमण्यम के मोबाइल नंबर तथा योगी की उस ईमेल आइडी rigyajursama@outlook.com के साथ जोड़ा गया जिस पर रामकृष्ण बातचीत करती थीं.
यही नहीं, इस ईमेल आइडी से भेजे गए वर्ड डॉक्यूमेंट दिखाते हैं कि सुब्रमण्यम इनका लेखक था और भेजी गई इमेजों पर उसके चेन्नै के पते का जियो-टैग है. इस मेल आइडी से उम्मेद भवन पैलेस, जोधपुर में की गई एक बुकिंग सुब्रमण्यम के बैंक खाते के उस विवरण से मेल खाती है जिसमें होटल को करीब उसी वक्त किया गया 2.4 लाख रुपए का भुगतान दिखाया गया है.
मगर सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत बरुआ ने कहा कि रिपोर्ट निर्णायक रूप से साबित नहीं करती कि सुब्रमण्यम ही योगी है. बाजार के भीतरी जानकार भी इस कहानी को नहीं मानते. योगी और रामकृष्ण के बीच हुए संवाद में कंपनी में आंतरिक आवाजाही के ब्योरे और बातचीत भी शामिल हैं.
मसलन, सेबी की रिपोर्ट का यह अंश देखिए, ''सीमा प्यारी बच्ची है, उसे मांजने-चमकाने की जरूरत है, सबके पास अपने विकास के लिए गॉडफादर होता है, यह मैं हूं क्योंकि बीते सालों में मैंने वादा किया था, इसलिए उसे पदोन्नत करके एसएमई का प्रमुख बनाया जा सकता है और कारोबारी उत्कृष्टता के लिए प्रबंधन का प्रतिनिधि भी... रचना को वापस नियामकीय प्रमुख बनाया जा सकता है.. तोजो को कोलकाता और अचल को दिल्ली...’‘
सेबी को पूरा यकीन नहीं है कि सुब्रमण्यम ही वह रहस्यमय योगी है जिसे एनएसई के कामकाज के बारीक ब्योरे पता थे, लेकिन योगी के निर्देशों का फायदा तो बेशक उसे ही मिला. मेल के सिलसिले से पता चलता है कि योगी सुब्रमण्यम के वेतन में कटौती के लिए कह रहा था. ईवाई की रिपोर्ट में उद्धृत एक मेल कहता है, ''कंचन को सकल धनराशि से निकालकर अहसान के तौर पर मुझे समर्पित करना है.’‘ कंचन, सुब्रमण्यम का दूसरा नाम हो सकता है.
रामकृष्ण ने कहा कि वे 20 साल से योगी के निर्देशों का पालन करती रही थीं, और योगी को न केवल एनएसई के ढांचे और कार्यप्रणाली बल्कि शेयर बाजारों की भी गूढ़ जानकारी थी, पर सुब्रमण्यम को एनएसई से जुड़ने से पहले इस क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं था. उसके साथ काम कर चुके लोगों ने उसके तकनीकी हुनर को लेकर भी शक जाहिर किए. साथ ही, यकीन कर पाना मुश्किल है कि आपसी सौहार्द के लिए जाने जाने वाले रामकृष्ण और सुब्रमण्यम अपने पीछे मेल के निशान छोड़ेंगे, खासकर जब उनके केबिन जुड़े थे और वे आसानी से आमने-सामने जानकारी साझा कर सकते थे.
योगी के ईमेल प्रमोशन, लिस्टिंग, बोर्ड सीट और ऐसे ही एनएसई के आंतरिक मामलों से संबंधित हैं और उसे संगठन की उतनी गहन समझ है जितनी किसी पुराने तपे-तपाए व्यक्ति को होती. साझा की गई जानकारियों में एनएसई के लाभांश का भुगतान, संगठन का ढांचा, वित्तीय नतीजे, मानव संसाधन नीतियां, कारोबारी योजनाएं और मूल्यांकन शामिल हैं, यानी ऐसे ब्योरे जो वरिष्ठ प्रबंधन को ही पता होते.
सेबी ने ईवाई के इस सुझाव को तो खारिज कर दिया कि सुब्रमण्यम ही योगी है, पर यह पता करने की कोशिश नहीं की कि rigyajursama ईमेल आइडी का इस्तेमाल कौन कर रहा हो सकता है. फॉरेंसिक इंवेस्टिगेशन ऐंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के संस्थापक और एमडी निशांत सिंह के अनुसार, कोई भी राज्य का साइबर सेल ईमेल एकाउंट संचालित करने की लोकेशन जानकर, रहस्यमय शख्स की पहचान कर सकता है. वे कहते हैं, ''यह वाकई कोई बड़ा काम नहीं है.’‘
एनएसई का गठन
साल 1992 की बात है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में हर्षद मेहता घोटाले के बाद सरकार भारतीय पूंजी बाजारों में पारदर्शित लाना चाहती थी. उसी वक्त शीर्ष वित्तीय संस्थानों में भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (आइडीबीआइ) ने एनएसई की स्थापना की अगुआई की. 1992 में कंपनी के तौर पर इसका गठन हुआ और अगले साल एक्सचेंज की मान्यता मिली.
1985 में आइडीबीआइ के प्रोजेक्ट फाइनेंस डिवीजन से जुड़ी रामकृष्ण उस कोर टीम में थीं, जिसे तब आइडीबीआइ के चेयरमैन एस.एस. नाडकर्णी ने एनएसई को बिल्कुल शुरुआत से खड़ा करने और बीएसई के दबदबे का मुकाबला करने के लिए जोड़ा था. टीम की अगुआई तब आइडीबीआइ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आर.एच. पाटील कर रहे थे.
इसमें शामिल अन्य लोग थे रवि नारायण, जो 1994 से मार्च 2013 यानी रामकृष्ण के कमान संभालने से पहले तक एनएसई के प्रमुख थे; आशीष चौहान, जो एनएसई से बीएसई में आए और अंतत: शीर्ष पर पहुंचे; और राघवन पुत्रन, जो 2002 के आसपास एनएसई छोड़ने के बाद आध्यात्मिकता की तरफ चले गए, योगानंद परमहंस के मिशन से जुड़े और बताया जाता है कि कोलकाता के निकट एक आश्रम में रहे हैं.
एनएसई के अंदरूनी जानकारों का कहना है कि 2001 के शेयर बाजार घोटाले में बीएसई के पूरे बोर्ड को हटा दिया गया, पर पुत्रन के मातहत चल रहे ऑटोमेटेड लेंडिंग ऐंड बॉरोइंग मैकेनिज्म की ठीक से जांच नहीं की गई. उन्हें आसानी से जाने दिया गया और वे कई साल तक सलाहकार बने रहे.
एनएसई की संस्थापक टीम का हिस्सा होने के नाते रामकृष्ण ने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म विकसित करने में मुख्य भूमिका निभाई, जिसने स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग को पारदर्शी और वैश्विक मानदंडों के बराबर बना दिया.
ब्रोकर समुदाय ने इसका कड़ा विरोध किया, क्योंकि मुख्यत: उनकी मदद से स्थापित स्क्रीन-आधारित स्वचालित ट्रेडिंग प्रणाली खेल के नियम बदल रही थी. स्टॉक मार्केट में दशकों का अनुभव रखने वाले देश के एक शीर्ष फंड मैनेजर कहते हैं, ''उन्हें ब्रोकरों से लड़ना पड़ा. उन्होंने अपने पद की बदौलत पक्का किया कि एनएसई ताकतवर शक्तियों यानी नियामक, मंत्रालय और ब्रोकर समुदाय तक पहुंच के मामले में बीएसई से आगे हो.’‘
उन्होंने स्टॉक ब्रोकर समुदाय में ब्रोकरों, नियामक और नई दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक के शीर्ष आकाओं के साथ, जिनमें एक पूर्व वित्त मंत्री और एक प्रमुख अफसरशाह भी थे, भरपूर ताकत का इस्तेमाल किया. एनएसई में जितना उनके प्रति सम्मान था, उतना ही डर भी.
एमडी और सीईओ के तौर पर उनके कमान संभालने के बाद साढ़े तीन साल के भीतर एनएसई का कैश और डेरिवेटिव दोनों को मिलाकर प्रतिदिन औसत टर्नओवर 1.6 ट्रिलियन (खरब) रुपए से दोगुना बढ़कर 3.5 ट्रिलियन हो गया. नियामक सेबी की बैठकों में अक्सर रामकृष्ण का एजेंडा चलता था. वे पहले उस टीम में रह चुकी थीं जिसने सेबी की रूपरेखा बनाई थी.
एनएसई के शीर्ष प्रबंधन को सरकार का वरदहस्त और नियामक में अच्छा-खासा रौब-दाब हासिल था. अंदरूनी जानकारों का कहना है कि बीएसई में ब्रोकरों को अपने उन्हीं कामों पर सवालों का सामना करना पड़ता जिनके लिए वे एनएसई में बच निकल सकते थे. भारत के स्टॉक बाजारों का रंग-रूप बदलने में योगदान देते हुए रामकृष्ण ने खूब इनाम बटोरे. एनएसई की एमडी और सीईओ के रूप में तीन साल से कुछ ज्यादा वक्त में 44 करोड़ रुपए बनाए. इसमें 2016 में इस्तीफा देने से पहले आखिरी आठ महीनों का पारिश्रमिक 18 करोड़ रुपए शामिल है.
अंत की शुरुआत
सेबी को 2015 में व्हिसलफ्लोअर केन फॉग की एक शिकायत मिली, जिसने उस को-लोकेशन स्कैम कहे जा रहे इस घोटाले के प्रति उसके कान खड़े कर दिए. आरोप यह था कि कुछ ब्रोकर कर्मचारियों की मदद से एनएसई के सबसे तेज सर्वरों से जुड़ सकते हैं, जिससे उन्हें उस गला-काट प्रतिस्पर्धा के माहौल में जबरदस्त फायदा मिल जाता है जहां कुछ मिलीसेकंड की भी शुरुआती बढ़त का मतलब इस जानकारी से फायदा उठाने वालों के लिए लाखों रुपए हो सकता है.
जनवरी 2010 में एनएसई ने को-लोकेशन यानी सह-स्थापन की सुविधा देने की शुरुआत की, जिसमें सदस्य एक शुल्क के बदले अपने सर्वर एक्सचेंज के परिसरों में लगा सकते थे. इससे उन्हें कार्यपालक आदेशों तक ज्यादा तेज पहुंच का फायदा मिला, क्योंकि ये जगहें एक्सचेंज के सर्वरों के बिल्कुल बगल में थीं.
हालांकि दुनिया भर के एक्सचेंज बहुत ज्यादा ट्रेडिंग करने वाले बड़े सदस्यों को, जिनका लेन-देन एक निश्चित न्यूनतम सीमा से ज्यादा होता है, सह-स्थापन की सुविधा देते हैं, पर आलोचकों का कहना है कि इससे उन्हें अनुचित फायदा मिल जाता है, न्न्योंकि ट्रेडर को इससे बहुत फर्क पड़ता है कि उसे जानकारी कब मिलती है.
शिकायत से घटनाओं को ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जो 2016 में एमडी और सीईओ के पद से रामकृष्ण के इस्तीफे और हाल में उनकी गिरक्रतारी तक पहुंचा. कई सवालों के जवाब अब भी नहीं मिले हैं, मसलन, योगी कौन है और जिस घोटाले की सेबी की रिपोर्ट ने बामुश्किल सतह उधेड़ी है, वह आखिर कितना बड़ा है.
उत्थान और पतन...
भारत सरकार के आदेश पर अग्रणी वित्तीय संस्थाओं के समूह ने 1992 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना की. इन संस्थाओं में आइडीबीआइ या भारतीय औद्योगिक विकास बैंक भी था.
प्रशिक्षित चार्टर्ड एकाउंट चित्रा रामकृष्ण ने आइडीबीआइ में बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी करियर शुरू किया. कुछ वन्न्त सेबी की रूपरेखा स्थापित करने वहां गईं और फिर आइडीबीआइ में लौट आईं. तब आइडीबीआइ के चेयरमैन एस.एस. नाडकर्णी ने उनसे एनएसई की संस्थापक टीम का सदस्य बनने के लिए कहा.
शुरुआती सालों में रामकृष्ण ने देश भर की यात्राएं करके ब्रोकरों को एनएसई के जरिए ट्रेडिंग करने के लिए राजी किया. अखिल भारतीय वी-सैट नेटवर्क स्थापित करने में वे मुख्य मददगार थीं. निवेशकों के लिए वे इंटरनेट ट्रेडिंग और उनकी जरूरत के हिसाब से ढले उत्पाद लेकर आईं. इस सारे कायापलट की बदौलत एनएसई जल्द दुनिया के सबसे अव्वल आधुनिक एक्सचेंजों में शुमार हो गया. अप्रैल 2013 में वे भारत में एक्सचेंज की पहली महिला प्रमुख बनीं. शीर्ष पर रहते हुए साढ़े तीन साल में उन्होंने एनएसई का औसत दैनिक टर्नओवर 1.6 लाख करोड़ रुपए से दोगुना बढ़ाकर 3.5 लाख करोड़ रुपए कर दिया.
मार्च 2018 में कार्यकाल खत्म होने से एक साल तीन महीने पहले दिसंबर 2016 में उन्होंने विवाद के चलते इस्तीफा दे दिया. उनकी देखरेख में हुए को-लोकेशन घोटाले में उन्हें अन्य 14 लोगों के साथ कारण बताओ नोटिस दिए गए. एनएसई ने जनवरी 2010 में को-लोकेशन सुविधा देने की पेशकश की और इसके तहत सदस्यों को उनके सर्वर एक्सचेंज के परिसरों में लगाने दिए, जो दुनिया भर के एक्सचेंजों द्वारा अपने बड़े ट्रेडिंग सदस्यों को दी जाने वाली मानक प्रथा है.
2015 में केन फॉग नाम के व्हिसलब्लोअर की शिकायत ने एनएसई के कर्मचारियों की मिलीभगत से कुछ निश्चित ब्रोकरों को सबसे तेज सर्वरों तक पहुंच हासिल होने और कुछ सेकंड की इस बढ़ते की बदौलत कई लाख का अतिरिक्त मुनाफा कमाने को लेकर सेबी के कान खड़े कर दिए.
चित्रा पर भी एनएसई को निजी जागीर की तरह चलाने और कॉर्पोरेट राजकाज में गड़बड़ियों का आरोप लगा. संगठन के असल बॉस माने जा रहे आनंद सुब्रमण्यम (दाएं) की नियुक्ति, नजदीकी और रौब-दाब को लेकर भौंहें उठीं. अक्तूबर 2016 में उन्हें जाने को कह दिया गया. अगला नंबर चित्रा का था. जिस दिन उन्हें बर्खास्त किया जाने वाला था, उसी सुबह उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
इस साल एक योगी की मौजूदगी से नया विवाद उठ खड़ा हुआ. कहा जाता है कि चित्रा ने इस योगी को बेहद गोपनीय जानकारियां दीं. कुछ लोग मानते हैं कि सुब्रमण्यम ही योगी है, कुछ मानते हैं कि यह कोई और है जिसे अंदरूनी जानकारी थी और जो वास्तव में फैसले ले रहा था. 6 मार्च को चित्रा को गिरफ्तार किया गया, फिलहाल वे जेल में हैं.
सेबी के आदेश में दर्ज चित्रा रामकृष्ण और रहस्यमय योगी के बीच ई-मेल पर हुई बातचीत के अंश
24 फरवरी 2015 का मेल
नोटिसी 1 (चित्रा) की तरफ से अज्ञात शख्स को
मैंने पदोन्नति पर सुझावों को किनारे कर दिया है, स्वामी. आपके मार्गदर्शन की अपेक्षा है.
1. एसवीपी के वीपी चंद्रशेखर मुखर्जी जीओओ को रिपोर्ट करते हैं 2. वीपी के एवीपी नगेंद्र हेड इक्विटी कहलाएंगे और सीधे एमडी को रिपोर्ट करेंगे तथा परोक्ष तौर पर आरवी और जीओओ को भी रिपोर्ट करेंगे
3. एवीपी के सीएम तोजो बतौर हेड बी कोलकाता जाएंगे. अचल की तैनाती बतौर हेड बीडी डब्ल्यूआरओ में होगी. गौरव बतौर हेड बीडी दिल्ली जाएंगे. (गौरव को पदोन्नत किया जा सकता है बशर्ते वह साल का केआरए पूरा करे जो कि जनवरी तक कम ही है)
17 फरवरी 2015 का मेल
(अज्ञात शख्स की तरफ से नोटिसी1 को)
"...पी.एस. बैग तैयार रखो, मेरा अगले महीने सेशेल्स जाने का प्लान है, कंचन (आनंद सुब्रमण्यम) के कंचना के साथ लंदन जाने और भार्गव और तुम्हारे, दो बच्चों के साथ न्यूजीलैंड जाने से पहले मेरा प्रयास होगा कि तुम मेरे साथ चलो.
एन 4 दिसंबर 2015 का मेल
(अज्ञात शख्स की तरफ से नोटिसी1 को)
हमें सेल्फ लिस्टिंग पर कुछ लोगों के दरवाजों पर जाकर आवाज उठानी चाहिए. एफएम, पीएमओ सोमनाथन, कैबिनेट सेक्रेटरी, आर्थिक सलाहकार और अंत में पीएम. यह उतना मुश्किल नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो, हमें एक बार में दो लोगों से मिलना होगा, कंचन मेरे हिसाब से मूल्यांकन करेगी. डरो मत स्ट्रॉ जानती है उसे कब उसे कैपिलरी बनना है और कब नहीं. यहां कंचन स्ट्रॉ है और मैं उससे चूसने वाली ताकत और तुम हमेशा की तरह जरूरत पड़ने पर सब कुछ उल्टी कर दोगे. एसई की कोर टीम
डॉ. एच. आर. पाटील संस्थापक, प्रबंध निदेशक, एनएसई. एनएसई के इस वास्तुकार ने स्टॉक ट्रेडिंग का लोकतंत्रीकरण की क्रांति की. 74 साल की आयु में इनका निधन हुआ.
चित्रा रामकृष्ण
पूर्व सीईओ, एनएसई एनएसई की संस्थापक टीम का हिस्सा. किसी भारतीय स्टॉक एक्सचेंज की प्रमुख बनने वाली पहली महिला. 1985 में आइडीबीआइ में बतौर असिस्टेंट मैनेजर कैपिटल मार्केट प्रभारी करियर की शुरुआत की. सेबी का कानूनी ढांचा तैयार करने वाली टीम का हिस्सा रहीं. 2009 में एनएसई की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर बनीं और 2013 में सीईओ पद पर पदोन्नत. फिलहाल गिरफ्तार और सीबीआइ की हिरासत में हैं
रवि नारायण
चेयरमैन, एनएसई 1980 के दशक के आखिर में सरकार की तरफ से शेयर बाजार की कायाकल्प के सुझाव देने के लिए गठित कमेटी का हिस्सा रहे जिसने एनएसई की स्थापना की सलाह दी. संस्थापक टीम के अहम सदस्य रहे. 2017 में हटे और को-लोकेशन घोटाले में सीबीआइ की तरफ से 14 लोगों को भेजे गए कारण बताओ नोटिस की फेहरिस्त में शामिल. फिलहाल सीबीआइ इनसे पूछताछ कर रही है
राघवन पुत्रन
फिलहाल कोलकाता के नजदीक किसी आश्रम में 1993 में एनएसई ज्वाइन करने से पहले आइडीबीआइ में थे. हर्षद मेहता घोटाले के बाद 2002 के आसपास नौकरी छोड़ी और योगानंद आश्रम चले गए
आशीष चौहान
एमडी और सीईओ, बीएसई एनएसई की संस्थापक टीम का हिस्सा रहे और वहां साल 1993-2000 तक काम किया
के. कुमार
एमडी और सीईओ, आइसीसीएल एनएसई संस्थापक टीम का हिस्सा और एनएसई में 1993-1999 तक काम किया.