आधुनिक भारत के आधार-स्तंभः शान की सवारी

इसका सफर 1944 में शुरू हुआ था, जब बृजमोहन लाल मुंजाल और उनके भाइयों ने अमृतसर में साइकिल के पुर्जों का कारोबार शुरू किया था. बंटवारे के बाद मुंजाल अपना कारोबार लुधियाना ले आए.

हीरो साइकिल की एक फैक्ट्री
हीरो साइकिल की एक फैक्ट्री

 यादगार सफर

सबसे बड़े दुपहिया मोटरसाइकिल निर्माता हीरो भारतीय बाजार में 46 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ अपने उत्पादों से नए-नए मानदंड बनाते आ रहे हैं. भारत में यह चार-स्ट्रोक वाली मोटरसाइकिल लाने वाली पहली कंपनी है और इसने ईंधन बचत, उत्सर्जन नियंत्रण और गुणवत्ता के मामले में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं.

इसका सफर 1944 में शुरू हुआ था, जब बृजमोहन लाल मुंजाल और उनके भाइयों ने अमृतसर में साइकिल के पुर्जों का कारोबार शुरू किया था. बंटवारे के बाद मुंजाल अपना कारोबार लुधियाना ले आए. 1975 तक हीरो साइकिल्स भारत में सबसे बड़ी साइकिल निर्माता बन चुकी थी.

सन 1984 में कंपनी ने मोटरसाइकिल के कारोबार में उतरने के लिए होंडा मोटर कंपनी के साथ अनुबंध कर लिया. कंपनी ने हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और हरिद्वार में अपने कारखाने स्थापित करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है.

कंपनी ने नए उत्पाद के विकास, डिजिटलाइजेशन, क्षमता बढ़ाने और कारखानों के आधुनिकीकरण के लिए 2,500 करोड़ रु. का निवेश किया है. कंपनी अब प्रीमियम श्रेणी की बाइकों और स्कूटरों पर भी ध्यान केंद्रित करने जा रही है. हीरो मोटरकॉर्प ने जयपुर में सेंटर ऑफ इनोवेशन ऐंड टेक्नोलॉजी भी स्थापित किया है जहां से इसके नए किस्म के उत्पाद अगले 3-4 साल में बाजार में आने शुरू हो जाएंगे.

 क्या आप जानते हैं?

  1986 में हीरो साइकिल्स ने एक दिन में 18,500 साइकिलों का उत्पादन करके गिनेस बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया था

 पहली बार ईंधन की बचत और कम प्रदूषण वाली मोटरसाइकिलें आईं. होंडा के साथ कंपनी का 27 वर्ष का सहयोग भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास में सबसे लंबा रहा है.

 

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