भारतीय डाक विभागः सच्चा डाकिया
अपनी पहुंच करोड़ों भारतीयों तक बनाने वाला भारतीय डाक विभाग दुनिया का सबसे व्यापक डाक तंत्र है. मार्च 2015 में डाक महकमे के 1,54,939 पोस्ट ऑफिस थे, जिनमें से करीब 90 फीसदी ग्रामीण इलाकों में थे.

भारतीय डाकः स्थापनाः 1854
अपनी पहुंच करोड़ों भारतीयों तक बनाने वाला भारतीय डाक विभाग दुनिया का सबसे व्यापक डाक तंत्र है. मार्च 2015 में डाक महकमे के 1,54,939 पोस्ट ऑफिस थे, जिनमें से करीब 90 फीसदी ग्रामीण इलाकों में थे.
आपके पड़ोस में स्थित पोस्ट ऑफिस किसी बैंक की तरह भी काम करता है और अब ग्रामीण भारत में एक डिजिटल केंद्र की भी शक्ल अख्तियार कर ली है.
एक सपना
भारत में अंग्रेजी शासन शुरू होने के दो साल बाद 1861 तक कुल 889 पोस्ट ऑफिस बन चुके थे, जो सालाना करीब 4.30 करोड़ पत्रों और 45 लाख अखबारों के वितरण का काम करते थे. पोस्ट ऑफिस का पहला अधीक्षक 1870 में नियुक्त किया गया था. 1876 में ब्रिटिश इंडिया जनरल पोस्टल यूनियन का पहला गैर-संस्थापक सदस्य बना था. विश्व की आधिकारिक हवाई डाक उड़ान भारत में 18 फरवरी 1911 को हुई थी. यह केवल 18 किलोमीटर की यात्रा थी जिसमें 27 मिनट लगे थे. एक फ्रांसीसी पायलट ने करीब 15 किलो डाक (लगभग 6,000 पत्र और कार्ड) पहुंचाई थी, जिनमें ब्रिटेन के महाराजा जॉर्ज पंचम को लिखा गया एक पत्र भी शामिल था.
टेलीफोन और संचार के अन्य माध्यमों के आने से बहुत पहले से डाक विभाग भारत को जोडऩे के अलावा 15 करोड़ से ज्यादा लोगों को जमा खातों की सेवाएं भी देता है. डाक घर गरीब लोगों के लिए पैसों के लेन-देन का आसान सेवा केंद्र हैं. डिजिटल मनी ट्रांसफर से पहले इंडिया पोस्ट अपने 1,50,000 सेवा केंद्रों के जरिए 150 से भी ज्यादा वर्षों से मनीऑर्डर की सेवा देता आ रहा है. डाक विभाग ने पूरी तरह मानवीय संचालन पर निर्भर रहने के बाद अब डिजिटल मनीऑर्डर की सेवा शुरू कर दी है.
इंस्टेंट मनीऑर्डर से दूसरे शहरों तक चुटकियों में पैसा पहुंचाया जा सकता है. 31 मार्च 2015 तक पोस्ट ऑफिस बचत बैंक के पास 33.03 करोड़ ग्राहक थे. मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून) के तहत होने वाले भुगतानों के लिए भी इसके व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता रहा है. पोस्टल विभाग 9,583 पोस्ट ऑफिसों में सेंट्रल बैंकिंग सॉल्युशन शुरू कर चुका है. इसने 125 जगहों पर एटीएम सेवा भी शुरू कर दी है और पोस्ट ऑफिस बचत बैंक के ग्राहकों के लिए डेबिट कार्ड भी जारी किए जाते हैं.
आगे की योजना
इन दिनों ई-कॉमर्स को लोग हाथोहाथ ले रहे हैं और डाक विभाग भी पीछे नहीं रहना चाहता. डाक विभाग अब देश में ई-कॉमर्स की लहर पर सवार होने की योजना बना रहा है. इसके तहत डिलिवरी के लिए विशेष कॉरिडोर तैयार करने से लेकर पोस्टमैन को नई जिम्मेदारियों के लिए ट्रेनिंग देने तक के काम चल रहे हैं.
यह विभाग अब डिजिटल रूप से अपना संपर्क बढ़ाने पर पहले से भी ज्यादा जोर दे रहा है. यह पूरी तरह एक बैंक स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है. हालांकि इसका पहला आवेदन खारिज हो चुका है, लेकिन यह दोबारा लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता है.