विशेषांकः ऊंचा दांव

कामत बंधुओं ने 2010 में जेरोधा की स्थापना की. यह पारदर्शिता और रियायत के साथ ब्रोकरेज कारोबार मॉडल है.

नितिन कामत, निखिल कामत
नितिन कामत, निखिल कामत

नई नस्ल 100 नुमाइंदे/उद्यमी

नितिन कामत, 38 वर्ष, निखिल कामत 34 वर्ष
संस्थापक और सीईओ एवं  सह-संस्थापक और सीएफओ जेरोधा, बेंगलूरू

कामत बंधुओं ने 2010 में जेरोधा की स्थापना की. यह पारदर्शिता और रियायत के साथ ब्रोकरेज कारोबार मॉडल है. आज अनुमानित 50 लाख सक्रिय ग्राहकों के साथ यह देश में सबसे बड़ा ब्रोकरेज है.

आइआइएफएल वेल्थ हुरुन इंडिया की '40 ऐंड अंडर सेल्फ-मेड रिच लिस्ट’ 2020 के मुताबिक, वे 24,000 करोड़ रु. के साथ 40 साल से कम उम्र के भारत से सबसे अमीर उद्यमी हैं. हाल ही में उन्हें ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी स्थापित करने के लिए सेबी से अनुमति मिली है.

हालिया महीनों में खबरें आई हैं कि विभिन्न बैंकिंग और डीमेट खातों में भारतीयों की करीब 80,000 करोड़ रु. के दावेदार नहीं हैं. इसके बाद, सितंबर में नितिन ने ऐलान किया था कि जेरोधा अपने प्लेटफॉर्म पर एक 'अलर्ट फीचर’ जोड़ देगा ताकि जब कोई खाता निष्क्रिय हो जाए तो उसके नॉमिनी (नामित व्यक्ति) को खबर मिल जाए.

कारोबार को वरीयता अपने भाई के कारोबार में हाथ बंटाने के लिए निखिल कामत ने 16 साल की उम्र में (दसवीं क्लास के बाद) स्कूल की पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी

''शौक आपके बौद्धिक विकास में मदद करता है. जब आप कुछ नया सीखने की कोशिश करते हैं तो जीवन जीने के लिए जरूरी हुनर में तेजी से इजाफा होता है’’
—नितिन कामत

आला दर्जे की कारोबारी

कनिका टेकरीवाल, 33 वर्ष
संस्थापक और सीईओ, जेटसेटगो, दिल्ली

अक्सर आसमान की ओला/उबर कही जाने वाली विमान एग्रीगेटर सेवा जेटसेट गो की संस्थापक कनिका टेकरीवाल ने 24 साल की उम्र में कंपनी बनाई. अपने सफर में वह भीषण चुनौतियों से जूझकर आगे बढ़ीं. अपना बिजनेस मॉडल विकसित किए टेकरीवाल को अभी एक साल ही हुआ था कि उन्हें कैंसर हो गया.

तो भी, बीमारी का डटकर मुकाबला करते हुए उन्होंने महज 5,600 रुपए के निवेश से कारोबार शुरू किया. तब उनके पास अपना एक भी विमान नहीं था. उन्होंने अपना कारोबार एक ऐप से शुरू किया जिस पर ग्राहक चार्टर उड़ान बुक करवा सकते थे. लेकिन परेशानी यह थी कि शुरुआती सालों में जब वे अपने संभावित ग्राहकों से मिलना चाहतीं, उन्हें अक्सर इनकार कर दिया जाता.

यही नहीं, कभी-कभी कंपनी की बैठकों में भी उन्हें अनदेखा किया जाता और उनके कारोबार के बारे में सवाल उनके पुरुष साथियों से पूछे जाते. आज 150 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाली उनकी कंपनी में 200 कर्मचारी और दिल्ली, मुंबई, चेन्नै तथा हैदराबाद में दफ्तर हैं.

पिछले वित्त वर्ष यानी 2020-21 में टेकरीवाल की कंपनी ने 6,000 उड़ानें संचालित कीं और 1,00,000 हवाई यात्रियों को संभाला, जिनमें कई भारत के दौलतमंद और रसूखदार लोग थे, जिन्होंने कारोबारी बैठकों या चुनाव रैलियों में जाने के लिए उनकी कंपनी से विमान किराए पर लिए.

पुरुष प्रधान समाज की मुश्किलें एक बार संभावित ग्राहक के साथ एक बैठक में टेकरीवाल से कॉफी सर्व करने के लिए कहा गया

''मेरा सपना भारत को निजी उड्डयन के नक्शे पर लाना है और एक से दूसरी जगह के बीच सबसे तेज कनेक्टिविटी तैयार करना है’’

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