स्वास्थ्य सेवा का इलाज

स्वास्थ्य सेवा 2025 तक 54 लाख नौकरियों और 2020 तक संभवततः 8 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा का सृजन करता दिख रहा है.

स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दिया जाना बेहद जरूरी है
स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दिया जाना बेहद जरूरी है
वर्ष 2025 तक देश के स्वास्थ्य सेवा उद्योग के 400 अरब डॉलर का हो जाने की उम्मीद है. यह कई तरह की मांगों से प्रेरित होगा—2025 तक मध्यम वर्ग में 50 करोड़ से ज्यादा नए लोग जुड़ जाएंगे, 2020 तक 13 करोड़ से ज्यादा नए वरिष्ठ नागरिक होंगे, 30 करोड़ से ज्यादा लोगों पर असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) से मरने का खतरा होगा, 2020 तक बीमा का विस्तार 45 फीसदी होगा और 2025 तक अस्पतालों में 20 लाख से ज्यादा बिस्तरों की जरूरत होगी.

इस क्षेत्र में 2025 तक 54 लाख नौकरियों के सृजन की उम्मीद है. आज देश में सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध है. यदि हम इस पर काम करें, तो यह क्षेत्र 2020 तक विदेशी मुद्रा की कमाई दोगुनी यानी 8 अरब डॉलर तक कर सकता है. इस क्षेत्र में विकास का असर अन्य उद्योगों पर पड़ता है, क्योंकि समग्र सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि स्वास्थ्य पर किए गए खर्च से जुड़ी है.

पर इस संभावना को साकार करने में कई चुनौतियां हैं. असंगत स्वास्थ्य देखभाल, लचर आरोग्य और स्वच्छता, भरोसे की कमी, फंडिंग की चुनौतियां, विनिमय संबंधी अनिश्चितता और सीमित मानव संसाधनों के नतीजतन सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) हासिल नहीं हो पाए हैं.

ऐसे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी 2017) स्वागतयोग्य कदम है. जन स्वास्थ्य व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए इसे समयबद्ध तरीके से जीडीपी के 2.5 फीसदी तक ले जाने का फैसला अरसे से लंबित था. अतीत में एनएचपी सही देखभाल पर केंद्रित थी, अब निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अहम बदलाव है.

सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने का संकल्प इसके असर को टिकाऊ बनाएगा. इसके अलावा, आयुष और आधुनिक चिकित्सा के सह-अस्तित्व के साथ एकीकृत देखभाल को बढ़ावा देने का फैसला स्वागतयोग्य है. यह उच्च विशेषज्ञता वाले डिलिवरी ढांचे की कमियों को संतुलित करने और देश के पारंपरिक मेडिसिन के मजबूत सिस्टम को प्रमोट करेगा.

 ऐतिहासिक तौर पर, निजी क्षेत्र ने देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाई है. यह इससे स्पष्ट है कि निजी क्षेत्र की बाजार हिस्सेदारी 80 फीसदी है, वहीं बिस्तरों में 60 फीसदी, भर्ती मरीजों में से 60 फीसदी, बाहरी रोगियों में से 80 फीसदी और माध्यमिक, आला दर्जे की देखभाल सेवाओं की डिलिवरी में 80 फीसदी डॉक्टर निजी क्षेत्र के हैं.

यूनिवर्सल स्वास्थ्य कवरेज के एजेंडे को पूरा करने की क्षमता और संसाधन न तो सरकार और न ही निजी क्षेत्र के पास हैं. ऐसे में एनएचपी 2017 में सार्वजनिक लक्ष्यों के साथ निजी क्षेत्र के विकास को सरकार की ओर से मान्यता देना सराहनीय है. दोनों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी ही उपाय है. अब जब सरकार इस नीति को क्रियान्वयन फ्रेमवर्क में बदलने जा रही है, प्रभावी साझेदारी के लिए निम्नलिखित बिंदु जरूरी हैं:

सरकारी योजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए प्रभावी पीपीपी मॉडलों का विकास किया जाए. उच्च श्रेणी की देखभाल की पहुंच व्यापक किया जाए;
गुणवत्तापूर्ण देखभाल को सस्ता बनाने और इसके अर्थशास्त्र की आम समझ विकसित करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बातचीत हो. निजी सेवा प्रदाताओं की वित्तीय सेहत बहुत अच्छी नहीं है. महानगरों और दूसरी श्रेणी के शहरों में भी अस्पताल मामूली पीएटी (प्रॉफिट आक्रटर टैक्स) मार्जिन हासिल कर रहे हैं और आरओसीई (रिटर्न ऑन कैपिटल एप्लायड) पूंजी की लागत से कम है. इसे समग्रता से समझना जरूरी है;
मॉनिटर (एनएचएस), ब्रिटेन की तरह एक स्वतंत्र निकाय बनाएं, ताकि सार्वजनिक और निजी दोनों प्रदाताओं की वित्तीय सेहत का आकलन करने के लिए एक ढांचे का विकास किया जा सके, निजी प्रदाताओं के लिए एक स्वीकार्य रिटर्न एकमतता हो सके, जनता की निजी सामग्री की खरीद के लिए वास्तविक लागत के आधार पर दरें निर्धारित की जा सकें और स्वास्थ्य परिणामों की उपयुक्तता की निगरानी की जा सके;
चिकित्सा शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए नियम उदार बनाया जाए, जिनसे निवेश आकर्षित हों;
अवैध प्रैक्टिस को रोकने के लिए इंडस्ट्री और सरकार के परस्पर सहयोग से एक दंडात्मक व्यवस्था बने;
एनएचपी चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा पर ध्यान देने से चूक गई है, जो इस क्षेत्र का सबसे अहम हिस्सा है. चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ बढ़ते अविश्वास और हिंसा की घटनाएं इस क्षेत्र की वृद्धि को रोक देंगी.

भारत के यूनिवर्सल स्वास्थ्य कवरेज के सपने को पूरा करने का यह माकूल वक्त है. सरकारी और निजी क्षेत्र के पास इसके प्रति प्रतिबद्धता दिखाने और टिकाऊ साझेदारी के लिए बातचीत करने का शानदार मौका है.

(त्रेहन अग्रणी कार्डियक सर्जन और मेदांता, द मेडिसिटी के संस्थापक हैं)

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