विधानसभा चुनाव 2022ः अखिल पूर्वोत्तर? नया विचार
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा के बेटे और मेघालय के सीएम हैं, और एनपीपी को अखिल पूर्वोत्तर पार्टी में बदलने की योजना बना रहे हैं.

पार्टी: एनपीपी
अधिकतर पर्यवेक्षक मणिपुर चुनावों को दो मशहूर राष्ट्रीय पार्टियों—भाजपा और कांग्रेस—के बीच संघर्ष के रूप में देख रहे हैं. लेकिन एक क्षेत्रीय ताकत—और यह कोई मणिपुर में पैदा नहीं हुई है—अब खामोशी और आहिस्ते से सत्ता तक पहुंच बनाने की उम्मीद कर रही है.
मणिपुर में भाजपा-नीत सरकार का हिस्सा नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) ने इस बार चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है, और 60 सदस्यों वाले सदन में चार सदस्यों की अपनी मौजूदा संख्या को बढ़ाकर दहाई के अंकों में ले जाने की उसकी आकांक्षा है. यह एनपीपी अध्यक्ष कॉनराड के. संगमा के लेखा-जोखा का हिस्सा है.
वे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा के बेटे और मेघालय के सीएम हैं, और एनपीपी को अखिल पूर्वोत्तर पार्टी में बदलने की योजना बना रहे हैं. राज्यों और समुदायों के बीच प्रतिद्वंद्विता से घिरे इस क्षेत्र में सार्वभौमिकता की दिशा में यह एक अनूठा प्रयोग है. एनपीपी पहले ही असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में अपनी सांगठनिक शाखाओं का विस्तार कर रही है.
प्रदेश इकाइयां अपना नैरेटिव खुद गढ़ें, उन पर कोई विचार लादा न जाए, यह संगमा की शैली है. मणिपुर में इस पार्टी की अगुआई उप-मुख्यमंत्री और पूर्व-डीजीपी यमनम जॉयकुमार सिंह और ऑक्सफोर्ड से पढ़ी उनकी बेटी रतिका कर रही हैं.